Tuesday, June 5, 2018

एक बार फिर पंज दरिया के देस- पंजाब की ओर

कई साल बाद एक बार फिर पंजाब जा रहा हूं। मेरी मंजिल है पटियाला। सफर शुरु होता है नई दिल्ली के कश्मीरी गेट आईएसबीटी से। रात के 12 बजे कश्मीरी गेट से पटियाला के लिए हरियाणा रोडवेज की बस मिल गई। हरियाणा रोडवेज के ड्राईवर अपनी रफ्तार के लिए जाने जाते हैं। रात में बस रास्ते में करनाल से आगे ओएसिस फूड प्लाजा पर खाने पीने के लिए रुकती है। पर अपन तो घर से ही खा पीकर चले हैं। फूड प्लाजा के अलग अलग स्टाल का मुआयना करने के बाद कुछ नमकीन के पैकेट लेकर बैग में रख लिए। रास्ते में काम आएंगे। अल सुबह हम पटियाला बस स्टैंड में पहुंच चुके हैं। पंजाब के बाकी बस स्टैंड की तुलना में पटियाला का बस स्टैंड कोई शानदार नहीं है। पटियाला से तलवंडी साबो की दूरी 140 किलोमीटर के आसपास है।

पंजाब की बेहतरीन सड़कें – सुबह सुबह अच्छी ठंड पड़ रही है। इस बीच मुझे सुनाम की बस मिल जाती है। बस पटियाला शहर की सीमा पार करते हुए संगरूर जिले में प्रवेश कर जाती है। इससे पहले पटियाला शहर के बाहर कैंटोनमेंट इलाका पड़ता है। मैं देख पा रहा हूं कि पंजाब की सड़के अब काफी अच्छी बन गई हैं। साथ ही पंजाब रोडवेज की सूरत भी बदल गई है। 15 साल पहले चलने वाली खटारा बसों की जगह नई अच्छी बसें आ गई है। कुछ घंटे में में सुनाम शहर में है। सुनाम संगरूर जिले में है। पर सुनाम प्रसिद्ध है शहीद उधम सिंह के कारण। सुनाम में ही महान शहीद उधम सिंह का जन्म हुआ था। वही उधम सिंह कंबोज जिन्होंने जलियांवाला बाग कांड का बदला लिया था। सुनाम शहर के बस स्टैंड में उनकी मूर्ति लगी हुई है।

मानसा जिला कपास के खेत – सुनाम से मैं दूसरी बस लेता हूं मानसा के लिए। मानसा पंजाब के एक जिला है। यही वह जिला है जहां अपने पंजाब प्रवास के दौरान मैं नहीं आ सका था। मानसा जिला प्रसिद्ध है कपास की खेती के लिए। सड़क  के दोनों ओर कपास की फसल लहलहा रही है। थोड़ी देर में बस मानसा शहर में पहुंच चुकी है। मानसा जिला मुख्यालय है। यह आबादी में कोई बड़ा शहर नहीं है। यह पंजाब का एक छोटा जिला है। सीमा के लिहाज से यह संगरूर, बठिंडा और पटियाला से लगता है।

मानसा से मैंने दूसरी बस ली है तलवंडी साबो के लिए। मानसा से तलवंडी साबो की दूरी 35 किलोमीटर है। वैसे तो तलवंडी साबो बठिंडा जिले में आता है। पर यह दूरी से लिहाज से मानसा शहर से ज्यादा नजदीक है। अगर दिल्ली तरफ से जाना हो तो मानसा से होकर जाना ज्यादा बेहतर हो सकता है। मानसा से तलवंडी साबो के बीच कोई बड़ा शहर नहीं आता है। पर रास्ते में कुछ शैक्षणिक संस्थान दिखाई देते हैं। एक घंटे में बस तलवंडी साबो पहुंच जाती है। बस में ज्यादा भीड़ नहीं है। टुकड़ो में की गई यात्रा आरामदेह रही।

तलवंडी साबो का बस स्टैंड भी किसी गुर घर सरीखा ही प्रतीत होता है। बस स्टैंड के बाहर हमें एक मोडिफाइड मारूति 800 दिखाई देती है। इसे स्टेशन वैगन का रूप दिया गया है। इस तरह क प्रयोग पंजाबी लोग ही कर सकते हैं। क्या आपने देखी है ऐसी मारूति कभी।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( DELHI- AMBALA- PATIYALA- SUNAM- MANSA-TALWANDI SABO ) ( यात्राकाल - दिसंबर 2017) 
मारुति 800 बन गई है स्टेशन वैगन। कैसी है.....
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