Wednesday, June 13, 2018

किला मुबारक – मुगल और राजस्थानी शिल्प का अनूठा मेल

पटियाला के बस स्टैंड से निकलकर मैं एक रिक्शे वाले को किला मुबारक छोड़ने को कहता हूं। हालांकि शेयरिंग आटो से जाने का विकल्प था, पर रिक्शा से शहर को देखने का आनंद ही कुछ और है। तो रिक्शा वाले हमें पटियाला के पुराने बाजार, सब्जी मंडी, तंग गलियों से घुमाते हुए दर्शनी गेट पर लाकर छोड़ देते हैं। बताते हैं कि सामने किला मुबारक का गेट है। मैं अठारहवीं सदी के विशाल इमारत के सामने खड़ा हूं जो आजकल बदहाल है।

वास्तव में पटियाला का किला मुबारक सिख इतिहास का दमकता हुआ पहलू है जो अब बिखर रहा है। यह किला वास्तुकला का एक आदर्श उदाहरण और शहर के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक है। पूरे पटियाला शहर का विस्तार किला मुबारक परिसर के चारों तरफ हुआ है। साल 1764 में महाराजा आला सिंह ने इस किले के निर्माण कराया था। यह किला ओल्ड मोती बाग पैलेस के निर्माण से पहले तक, पटियाला राजपरिवार का निवास हुआ करता था।


लगभग 10 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस किले का निर्माण सबसे पहले एक मिट्टी के किले के रूप में किया गया था।  बाद में इसे एक पक्के किले के रूप में विशाल रूप प्रदान किया गया। इस महल की वास्तुकला उत्तर मुगल और राजस्थानी शैली का बेहतर मिश्रण है। सबसे पहले बाबा आला सह जी ने 1756 में यहां कच्ची पट्टी बनाई थी। यहीं पर 1764 में किला मुबारक की स्थापना की गई । 
इस किले में किला अंद्रू या मुख्‍य महल, गेस्‍ट हाउस और दरबार हॉल परिसर के प्रमुख हिस्से हैं। बाजार से जब आप दर्शनी गेट से प्रवेश करते हैं तो दाहिनी तरफ दरबार हॉल है। इसमें एक संग्रहालय का निर्माण कराया गया है। पर यह संग्रहालय किले के रखरखाव के कारण बंद किया हुआ है।

किला मुबारक का किला अंद्रूं सैलानियों को खास तौर पर आकर्षित करता है। इसके वास्‍तुशिल्‍प पर उत्‍तर मुगलकालीन और राजस्‍थानी शिल्‍प का प्रभाव स्‍पष्‍ट रूप से देखा जा सकता हे। किला परिसर में उत्‍तर और दक्षिण छोरों पर 10 बरामदे बनाए गए हैं जिनका आकार प्रकार अलग तरह का है।
जब मुख्‍य महल को आप देखते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह महलों का एक झुंड हो। इस किले में हर कमरे का अलग नाम और पहचान है। किला परिसर के महलों को बड़ी संख्‍या में भित्ति चित्रों से सजाया गया है। इन्‍हें महाराजा नरेन्‍द्र सिंह की देखरेख में बनवाया गया था। किला मुबारक के अंदर बने इन महलों में 16 रंगे हुए और कांच से सजाए गए चेंबर भी हैं।

महल के दरबार कक्ष में भगवान विष्‍णु के अवतारों और वीरता की कहानियों को दर्शाया गया है। तो महिला चेंबर में लोकप्रिय रोमांटिक कहानियों चित्रित की गईं हैं। महल के अन्‍य दो चेंबरों में अच्‍छे और बुरे राजाओं के गुण-दोषों पर भी प्रकाश डाला गया है। इन महलों में बने भित्ति चित्र 19 वीं शताब्‍दी में बने भारत के श्रेष्‍ण भित्ति चित्रों में गिने जाते हैं। ये भित्ति चित्र राजस्‍थानी, पहाड़ी और अवधि संस्‍कृति की छवि पेश करते हैं।

दरबार हॉल में देखे गुरु गोबिंद सिंह की तलवार – यह दो मंजिला हॉल एक ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। हॉल में लकड़ी और कांच की शानदार कारीगरी की गई है। दरबार हॉल सार्वजनिक समारोहों में लोगों के एकत्रित होने के लिए बनवाया गया था। इस हॉल को ही अब एक संग्रहालय में तब्‍दील कर दिया गया है। इसमें आकर्षण झाड़ फानूस और विभिन्‍न अस्‍त्र-शस्‍त्रों को प्रदर्शित किया गया है। इस संग्रहालय में गुरु गोबिंद सिंह की तलवार और कटार के साथ-साथ नादिरशाह की तलवार भी देखी जा सकती है।
- vidyutp@gmail.com
( KILA MUBARAK, PATIALA, DARABR HALL ) 

1 comment:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व रक्तदान दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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