Monday, June 11, 2018

पटियाला का काली माता मंदिर

पंजाब के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है पटियाला श्री काली माता का मंदिर। श्री काली देवी जी का मंदिर करीब 100 साल पुराना है। यहां पर न केवल पटियाला शहर बल्कि पंजाब के हर जिले से और आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु  माथा टेकने आते हैं।

काली माता मंदिर का परिसर विशाल है। अक्सर यहां दर्शन के लिए लंबी लाइन लगी रहती है। प्रवेश द्वार के बाहर बड़ी संख्या में प्रसाद की दुकाने हैं। मुख्य मंदिर के पीछे विशाल आंगन यज्ञशाला और कुछ और मंदिर समूह हैं। मंदिर परिसर में राज राजेश्वरी देवी का मंदिर है। कहा जाता है कि यह काली माता मंदिर से भी पुराना है।

काली माता मंदिर का निर्माण भी पटियाला के राजघराने द्वारा करवाया गया था। पटियाला के महाराजा भूपिदंर सिंह ने मंदिर के निर्माण का नींव पत्थर 1936 में रखा था। मंदिर को महाराजा कर्म सिंह ने बनवाया था। मंदिर में स्थापित काली माता की मूर्ति छह फीट की है। मां का सौंदर्य अदभुत है। यहां स्थापित मां काली माता जी की मूर्ति कलकत्ता से खास तौर पर मंगवाई गई थी। उस समय देवी मां की मूर्ति का मुख शहर के बाहर की तरफ यानी बारादरी गार्डन की तरफ रखा गया था और तब उधर शहर का विस्तार नहीं था। जैसे-जैसे आबादी बढ़ी और लोग उस तरफ जाकर रहने लगे तो देवी मां की नजरों के तेज का प्रभाव वहां रहने वाले लोगों पर न पड़े इसलिए मंदिर में एक विशाल दीवार बना दी गई। श्रद्धालु ऐसा मानते हैं कि मां की आंखों में काफी तेज है।

नवरात्र में लगता है मेला- मंदिर में हर साल नवरात्र के दौरान लाखों की संख्या में भक्तों का आना जाना होता है। रोजाना सुबह देवी मां को स्नान कराया जाता है और श्रंगार किया जाता है। नौ देवियों की पूजा भी विधि विधान के साथ संपन्न होती है। नवरात्र में भक्त आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में आते हैं। हजारों की संख्या में आने वाले भक्त अष्टमी के दिन सुबह से लेकर दोपहर तक कतार में लगकर मां के दर्शन होते हैं। नवरात्र में जब मंदिर के आसपास विशाल मेला लग जाता है तब माल रोड से नौ दिन के लिए वाहनों का गुजरना रोक दिया जाता है।

शराब, बकरे और मुर्गे भी चढ़ाते हैं – काली माता मंदिर में कुछ रोचक परपंराएं हैं। मंदिर में नवरात्र में बकरे, मुर्गे के अलावा शराब का प्रसाद भी चढ़ाया जाता है। कई श्रद्धालु यहां सालों भर शराब की बोतलें लेकर माता को चढ़ाने आते हैं। इसके अलावा कड़ाह प्रसाद और मीठा पान का भी मां के चरणों में भोग लगाया जाता है।

माता का लंगर - मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए यहां रोजाना मंदिर में लंगर का इंतजाम है। पर लंगर का समय निर्धारित है। लंगर हॉल में प्रेरक नीति वचन लिखे गए हैं।

कैसे पहुंचे -  काली माता मंदिर पटियाला शहर के मॉल रोड पर बारादरी उद्यान के पास स्थित है। श्री काली माता का मंदिर बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन से पैदल 10 मिनट में या फिर रिक्शा अथवा तीन पहिया वाहन के जरिये मात्र पांच मिनट में ही पहुंचा जा सकता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( KALI MATA MANDIR, PATIALA, PUNJAB )

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