Sunday, June 10, 2018

गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब पटियाला

तलवंडी साबो से पटियाला की वापसी की राह पर हूं। बस की खिड़की से कई जगह मेले लगे हुए दिखाई दे रहे हैं। पंजाब के गांव गांव में ऐसे मेले खूब लगते हैं। यहां तो राजनीतिक दलों के कार्यक्रम में भी गीत संगीत की महफिल खूब जमती है, वरना नेताओं के रसहीन भाषण सुनने के लिए जनता की भीड़ नहीं उमड़ती है।

कुछ घंटे के सफर में हम पटियाला शहर में पहुंच चुके हैं। पटियाला शहर का प्रमुख गुरु घर और सिख पंथ की आस्था स्थली है गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब। मैं शाम ढलने के बाद गुरुद्वारा परिसर में पहुंच गया हूं। यहां सालों भर हर रोज श्रद्धालुओं का जमावड़ा देखा जा सकता है। यह पंजाब के बड़े ही समृद्ध गुरुद्वारा में से एक है। कभी यह गुरुद्वारा लेहल गांव में हुआ करता था, पर शहर के विस्तार के बाद अब यह पटियाला मुख्य शहर का हिस्सा है। इस गुरुद्वारा का संबंध नवम गुरु तेगबहादुर जी से है।
नवम पातशाही गुरुतेगबहादुर आए थे यहां
सिख इतिहास के मुताबिक लेहल गांव का भागराम नामक एक झीवर हुआ करता था। उसने गुरुतेगबहादुर से मुलाकात कर अपने गांव में आने का आग्रह किया। उसे उम्मीद थी कि गुरु जी दर्शन देकर उसके गांव को पवित्र करेंगे तो गांव के लोगों को बीमारियों से निजात मिलेगी और उनके दुख दूर हो जाएंगे। गुरु जी ने उसका आग्रह स्वीकार किया। सन 1672 में 24 जनवरी को माघ सुदी शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन गुरु जी यहां आए। यहां वे एक बरगद के पेड़ के नीचे ठहरे। बगल में एक विशाल तालाब था। गुरुजी जी स्थल पर बैठे उसका नाम दुख निवारण हो गया।

सिख श्रद्धालुओं को विश्वास है कि इस स्थल के तालाब के जल में दुख दूर करने की क्षमता है। तो यहां आने वाले श्रद्धालु इस तालाब का पवित्र जल का सेवन करते हैं। वर्तमान में गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब का जो विशाल भवन और सरोवर है उसका निर्माण 1930 से 1942 के बीच हुआ है। इसे पटियाला के महाराजा यादविंदर सिंह ने बनवाया था। अब यह गुरुद्वारा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधीन है।
कई एकड़ में फैले इस गुरुद्वारा का मुख्य भवन और उसके आसपास का परिवेश काफी सुंदर है। सुबह से लेकर देर रात तक यहां श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। मुख्य हॉल के आसपास और कई छोटे छोटे प्रार्थना कक्ष बने हुए हैं। गुरुघर में श्रद्धालुओं को हलवा प्रसाद मिलता है। रात के समय विशाल सरोवर से गुरुद्वारे का सौंदर्य देखते ही बनता है। रात की रोशनी में यहां की छटा श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है।
प्रवेश द्वार से बायीं तरफ पीछे जाने पर विशाल लंगर हॉल है। यहां श्रद्धालुओं के लिए अखंड लंगर चलता रहता है। वैसे तो गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में सालों भर उत्सव सा माहौल रहता है।

पर खास तौर पर माघ शुक्ल पक्ष पंचमी यानी वसंत पंचमी के दिन यहां बडा उत्सव मनाया जाता है। यह नवम पातशाही गुरु तेगबहादुर के इस स्थल पर आने की तारीख है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जुटते हैं और विशेष दीवान सजाया जाता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(GURUDWARA DUKH NIVARAN SAHIB, PATIALA ) 

No comments:

Post a Comment