Friday, June 1, 2018

थिंपू से वापसी - बस का सुहाना सफर

अलविदा थिंपु... फिर मिलेंगे - थिंपू मे हमारा आखिरी दिन है। मतलब वापसी की तैयारी। पर इन पांच दिनों में इस शहर से ऐसा अपनापन हो गया है कि जी चाहता है कुछ दिन और गुजारें यहां। पर फिर कभी सही। सुबह 11 बजे हमने होटल से चेकआउट किया। नास्ते में हमलोग पराठे खा चुके हैं। होटल से निकल कर पैदल क्राफ्ट बाजार घूमते हुए एक छोटा सा हस्तनिर्मित पर्स खरीदते हैं हम। यहां हमारी मुलाकात एक भारतीय सैलानी परिवार से होती है। उनके साथ भूटान की दूतावास की महिला कर्मचारी हैं। अभी अभी पढ़ाई पूरी करके भूटान सरकार की विदेश सेवा में नौकरी करने लगी हैं। वे पूछती हैं कैसा लगा आपको भूटान। मैंने कहा बार बार आना चाहूंगा। उनसे कुछ वाक्य और बातें होती हैं। उनकी मिठास घुली जुबान में बातें हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। पर हमारी बस हमारा इंतजार कर रही है। तो अलविदा थिंपू .. फिर मिलेंगे।

हम कोई टैक्सी नहीं बुक करते। अपना सामान ड्रैग करते हुए थिंपू शहर की सड़कों पर आगे बढ़ते हैं। पिता-पुत्र एक बार फिर थिंपू शहर को अच्छी तरह देख लेना चाहते हैं कि अभी दिल नहीं भरा।
हमलोग बस स्टैंड समय से थोड़ा पहले पहुंच गए हैं। वांगचू नदी के पुल के किनारे स्थित हैं थिंपू का बस स्टैंड और टैक्सी स्टैंड। कुछ छोटी टैक्सी वाले पीछ पड़ जाते हैं। अभी टूरिस्ट सीजन नहीं है तो 500 रुपये प्रति सवारी भी फुंटशोलिंग तक जाने को तैयार हैं। पर हमने तो बस में दो दिन पहले ही आरक्षण करा रखा है। हमारी बस का समय 2 बजे है। हमलोग बस स्टैंड के प्रतीक्षालय मेंबैठकर इंतजार कर रहे हैं। यहां से अलग अलग छह सात कंपनियों की बसें चलती हैं। सबके अलग अलग बुकिंग काउंटर बने हैं। थिंपू से फुंटशोलिंग के अलावा गलपे बार्डर के लिए भी बस है। पर फुंटशोलिंग के लिए सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक अमूमन हर आधे घंटे पर बस सेवा है। पर इनमें टिकट अग्रिम बुक करना पड़ता है।


ये 21 सीटों वाली कोस्टर बस है। बस आरामदेह है। इसमें लेग स्पेस भी अच्छा है। आधे घंटे पहले बस में आकर लोग बैठने लगे हैं। बस के कंडक्टर ने हमारा सामान ऊपर बांध दिया है। पर दो नन्हे नन्हें बैग हमने साथ रखे हैं। बस के ड्राईवर बहुत संयत ढंग से बस चला रहे हैं। चूजोम और चापचा के बीच परमिट प्वाइंट पर हमारे परमिट वापसी में भी चेक हुए। बस वापसी में भी वोंखा में एक होटल में खाने के लिए रूकी। पर हमने कुछ खाया नहीं। शाम होने लगी है। खाना तो जयगांव में ही जाकर खाएंगे। फुंटशोलिंग से कोई 20 किलोमीटर पहले से शहर दिखाई देने लगता है। पहाड़ों की ऊंचाई से नीचे को ओर आते हुए शहर रंग बिरंगा नजर आ रहा है।

फुंटशोलिंग शहर से पहले चेकपोस्ट पर हमारा परमिट फिर चेक हुआ और अबकी जमा हो गया। इस बस में21 सवारियों में सिर्फ हम दो ही सैलानी हैं, बाकी सभी लोग भूटान के हैं। साढ़े पांच घंटे के सफर के बाद हमलोग 7.30 बजे फुंटशोलिंग के बस स्टैंड में हैं। हल्की बारिश हो रही है। हम अपना सामान लेकर पैदल चलते हुए भूटान पहुंच गए। पदयात्रियों के लिए बने एग्जिट गेट से बाहर हुए और भारत की धरती पर पहुंच गए। अपनी घड़ी को आधा घंटा पीछे किया। लिंक रोड पर उसी आराम लॉज में पहुंचे। नवीन जी ने हमें वहीं कमरा दिया, जो जाते समय दिया था। तीसरी मंजिल पर 170 नंबर। सामान रखकर एक बार फिर हमलोग जयगांव की सड़कों पर चहलकदमी कर रहे थे। अनादि ने मोमो खाना पसंद किया तो मैंने आराम लॉज के भोजनालय की थाली। जमकर खाया और थोड़ा सड़क पर टहलने के बाद आकर सो गए।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( THIMPU TO PHUNTSHOLING, BUS JOURNEY ) 

फुंटशोलिंग का बस स्टैंड रात में। 

2 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन भारतीय महिला तीरंदाज़ खिलाड़ी - डोला बनर्जी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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