Thursday, May 24, 2018

अच्छा खााओ, पीयो मस्त रहो, खुशियों का देश भूटान

शाकाहारी हैं तो भूटान में घबराएं नहीं - खाने पीने की बात करें तो भले ही भूटान बुद्ध का देश है पर यहां शायद ही कोई शाकाहारी हो। पर अगर आप भूटान की यात्रा पर हैं और शाकाहारी हैं तो घबराने की बात नहीं है। आपका काम चल जाएगा।
वैसे तो ज्यादातर भूटान के लोग सर्वाहारी हैं। भले ही लोग बौद्ध धर्म को मानते हों पर यहां बीफ खुलेआम खाया जाता है। बीफ का मतलब इसमें गोमांस भी शामिल है। हमारे टैक्सी ड्राईवर बताते हैं कि उनकी पत्नी बीफ नहीं खाती। उसे लगता है जिस जानवर का हम दूध पीते हैं उसका मांस कैसे खा सकते हैं। पर भूटान में इस तरह की सोच वाले इक्के दुक्के लोग ही हैं। ज्यादातर लोग गोमांस भी खाते हैं।

संयोग से हम राजधानी थिंपू के जिस होटल में ठहरे उसका रेस्टोरेंट शाकाहारी है। पर यहां कुछ शाकाहारी रेस्टोरेंट में अंडा भी पेश किया जाता है। होटल गासिल के आधार तल पर रिसेप्शन के साथ रेस्टोरेंट हैं। होटल का कुक भारतीय है। यहां पर आपको पंजाबी थाली भी खाने में मिल जाएगी। यहां शाकाहारी थाली 150 रुपये की है। इस थाली में चपाती, चावल, सब्जी, दाल, पापड़, मिठाई आदि सब कुछ है। अनादि को थाली खूब पसंद आई । पंजाबी थाली में तंदूरी रोटी भी मिल जाती है। गासिल खाना हमें इतना पसंद आया कि अगले दो दिन होटल में भूटान  में रुकने के बावजूद हम खाने यहीं आते रहे। होटल भूटान भी शाकाहारी है। पर उस थ्री स्टार होटल का रेस्टोरेंट महंगा है।
सुबह नास्ते में होटल गासिल में पराठे मिल जाते हैं। एक पराठा 50 रुपये का है जो नास्ते के लिए पर्याप्त है। भूटान के ज्यादातर होटल में शराब भी परोसी जाती है।
समोसा भी मिलता है – भूटान के सब्जी बाजार वाली सड़क पर घूमते हुए कुछ सस्ते रेस्टोरेंट नजर आए। पर किसी रेस्टोरेंट में खुले में कुछ रखा हुआ नहीं दिखाई दिया। दरवाजा खोलकर अंदर जाइए तो बैठकर कुछ खा पी  सकते हैं। इनमें सिर्फ एक वेज रिफ्रेशमेंट वाला है। पर कई दुकानों में समोसे मिल जाते हैं। ये समोसा सुबह बनाकर रख देते हैं। दिन भर लोग गर्म करके खाते रहते हैं।

थिंप में पराठा – थिंपू के नोरजिम लाम मुख्य सड़क हमारे ड्राईवर साहब हमें एक पराठे की दुकान पर ले गए। यहां सुबह दस बजे से रात नौ बजे तक पराठा और चाय मिलता है। यह शाकाहारी नास्ता घर है। यहां आप पराठा के अलावा चाउमिन खा सकते हैं। एक पराठा 40 रुपये का है। साथ में वे चटनी देते हैं। दो पराठा खा लें तो भरपेट भोजन हो जाता है। यह खाने के लिए थिंपू में किफायती जगह है। यह पराठे की दुकान होटल नोरलिंग बिल्डिंग के बेसमेंट में है। बेसमेंट कई नास्ता घर है पर इसमें एक ही शाकाहारी नास्ता घर है।


कहीं स्ट्रीट फूड नहीं – पूरे थिंपू शहर मे ठेले वाले खोमचे वाले दिखाई नहीं देते। जो भी खाने नास्ते की दुकाने हैं वह बंद दरवाजे के अंदर है। कहीं खुले मे खाने पीने की कोई चीज बिकती हुई नजर नहीं आती है। फुटपाथ पर खाने पीने के स्टाल न होने के कारण खाना पीना थोड़ा महंगा जरूर है, पर इससे स्वच्छता बनी रहती है। हमारे टैक्सी ड्राईवर बताते हैं कि जब दिन में उन्हें कहीं बाहर खाना होता है तो उनके भी 100 से 150 रुपये खर्च हो जाते हैं।  
सिटी होटल पारो का खाना –  पारो के सिटी होटल के भोजनालय में खाने का अनुभव भी काफी अच्छा रहा। हालांकि यह शाकाहारी नहीं है पर स्वच्छता का स्तर काफी अच्छा है। हमने यहां दो बार फ्राइड राइस तो एक बार बिरयानी और दाल आर्डर करके खाया। खाने पीने की दरें भी वाजिब हैं। वैसे पारो के सबसे किफायती होटल ऑल सीजन्स का भी अपना भोजनालय है।
पुनाखा और पारो के रास्ते में हमें लोबासा के में रेडीमेड पूरियां बिकती हुई दिखाई दीं। यह हमारे यहां के गोलगप्पे का बड़ा रूप है। लोग इसे खरीद लेते हैं और नास्ते में नमक और चटनी के साथ खाते हैं। आप शाकाहारी हैं तो बेकरी से पावरोटी, नमकीन, चावल के मीठे लड्डू ( मुरुंडा या लाई ) आदि  भी खरीद सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  
( BHUTAN VEG FOOD, PARO, THIMPU, PUNAKHA ) 


3 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन एवरेस्ट को नापने वाली पहली भारतीय महिला को शुभकामनायें : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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    1. धन्यवाद, राजाजी

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  2. देख कर खाने को मन कर गया

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