Saturday, May 12, 2018

भूटान में 1998 में लोकतंत्र की बयार शुरू हुई

खूबसूरत देश भूटान में इंग्लैंड की तरह गणतंत्र और पारंपरिक राजतांत्रिक शासन पद्धति है। लंबे समय से राजा के शासन के बाद इस देश में 1998 में लोकतंत्र की बयार शुरू हुई। भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंगे वांगचुक ने देश में जनता का शासन लाने का फैसला किया। इसके लिए क्रमबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक शासन की स्थापना की गई। अब भूटान में डुअल सिस्टम ऑफ गवर्नमेंट चलता है। यहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार और प्रधानमंत्री भी हैं लेकिन साथ ही देश का राजा भी होता है। 

जिग्मे सिंगे शासनकाल में ही भूटान में इंटरनेट और टेलीविजन को 1999 में ही इजाजत दी गई थी। 1970 में पहली बार किसी विदेशी पर्यटक को यहां आने की इजाजत दी गई थी। भूटान शासन के लिहाज से 20 जिलों में विभाजित है।
2001 में तत्कालीन नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक ने दैनिक कामकाज का दायित्व निर्वाचित मंत्रिपरिषद को सौंपा था। साल 2006 में अपने बेटे के पक्ष में गद्दी त्याग दी। चौथे भूटान नरेश ने ही देश को लोकतंत्र बनाने का फैसला किया। उन्हीं की पहल पर 2008 में चुनाव कराए गए।

भूटान की संसद यानी शोगडू में कुल 154 सीटे होती हैं। इसमे स्थानीय रूप से चुने गए प्रतिनिधि (105), धार्मिक प्रतिनिधि (12) और राजा द्वारा नामांकित प्रतिनिधि (37) होते हैं।

अब राजा भी हटाया जा सकता है - हालांकि भूटान में राजा का पद वंशानुगत चला आ रहा है लेकिन नए संविधान के मुताबिक भूटान के संसद शोगडू के दो तिहाई बहुमत द्वारा राजा को हटाया भी जा सकता है। भूटान का संविधान काफी प्रगतिशील है। इसमें देश में हमेशा 60 फीसदी हिस्सा वन क्षेत्र रखने का संकल्प लिया गया है। भूटान दुनिया का पहला कार्बन नेगेटिव देश भी है। मतलब ये जितना कार्बन डाईऑक्साइड बनाता है, उससे ज्यादा अवशोषित करता है।
2008 में पहला चुनाव - भूटान में पहले आम चुनाव 2008 में कराए गए थे। इसमें सिर्फ दो पार्टियों ने ही हिस्सा लिया था और राजशाही से संबंधित भूटान पीस एंड प्रॉसपैरिटी पार्टी (डीपीटी) चुनाव जीत गई थी। तब जिग्मे थिनले प्रधानमंत्री बनाए गए थे। वे 2013 तक देश के प्रधानमंत्री रहे।

2013 में दूसरा चुनाव - पर 2013 में दूसरा चुनाव विपक्षी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रिटिक पार्टी ने जीता। इसके बाद भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे बनाए गए। वे कई बार भारत की यात्रा पर आ चुके हैं।

2018 में तीसरा चुनाव - 2018 भूटान का चुनावी साल है। देश में तीसरी बार चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई। नेशनल काउंसिल के लिए 20 अप्रैल को वोट डाले गए। मार्च 2018 में जब हम भूटान की सड़कों पर घूम रहे थे, तो कई जगह लगे बोर्ड पर भूटान के चुनाव की जानकारी चस्पा की गई थी। साथ ही लोगों से वोट डालने की अपील की गई थी।

20 अप्रैल 2018 को भूटान नेशनल काउंसिल के लिए मतदान हुए।
4.32 लाख मतदाता थे कुल देश में। इसमें महिला मतदाता  51 फीसदी हैं (2,20,881) 
127 कुल उम्मीदवारों में महिला उम्मीदवार सिर्फ 6 चुनाव लड़ी। 19 मार्च पर्चा दाखिल करने की आखिरी तारीख थी।

88,915 मतदाता ऐसे हैं जो डाक से वोट डालने वाले रहे, इनमें  1,964 भूटान के मतदाता विदेश में थे।
2008 में 3.12 लाख, 2013 में 3.79 लाख मतदाता थे।
2,000 मतदाताओं के साथ गासा सबसे छोटा चुनाव क्षेत्र है।
05 पंजीकृत दल मैदान में – बीकेपी , डीसीटी , डीएनटी , पीडीपी, डीजीटी आदि। 2018 में भूटान हैपीनेस पार्टी मतलब डीजीटी भी मैदान में उतरी ।
 --- vidyutp@gmail.com
( BHUTAN, ELECTION , 2008, 2013, 2018 ) 

No comments:

Post a Comment