Saturday, April 7, 2018

कानपुर - लाल ईमली और एल्गिन कॉटन मिल

लाल इमली की बिल्डिंग और घंटाघर । 
यूपी के शहर कानपुर को कभी भारत का मैनेचेस्टर कहा जाता था। तो इस मैनेचेस्टर के अहम हिस्सा थे लाल ईमली और एल्गिन कॉटन मिल जैसी कंपनियां। ब्रिटिश काल में कानपुर वस्त्र उद्योग का बड़ा केंद्र था। कानपुर की एल्गिन कॉटन मिल बंद हो चुकी है तो अब लाल ईमली सिसक सिसक कर चल रही है। 1980 के दशक में जाएं तो कानपुर और लाल ईमली एक दूसरे के प्रयाय थे।  आज भी लाल ईमली फैक्ट्री की विशाल ईमारत दूर से नजर आती है। यह ईमारत बाहर से किसी बड़े संस्थान सी भव्यता लिए हुए है। इस इमारत के साथ लगा ऊंचा घंटा घर भी है। मिल की इमारत गोथिक शैली में लाल ईंटो से बनी है।
यहां के प्रसिद्ध सूट और लोई के लिए लाल ईमली को जाना जाता था। हर कनपुर के लोगों के मुंह से यही निकलता था, लेकिन एक ऐसी घड़ी आई जब लाल इमली की चिमनियों से धुआं निकलना बंद हो गया। 

तो थोड़ा जानते हैं लाल ईमली के बारे में। साल 1876 में पांच अंग्रेज जॉर्ज ऐलेन, वीई कूपर, गैविन एस जोन्स, डॉक्टर कोंडोन और बिवैन पेटमैन ने मिलकर कानपुर की सिविल लाइंस में एक छोटी सी मिल की स्थापना की थी। यह मिल ब्रिटिश सेना के सिपाहियों के लिए कंबल बनाने का काम करती थी। इसका नाम कानपोर वुलेन मिल्स रखा गया। इस इमारत के परिसर में एक विशाल ईमली का पेड़ हुआ करता था। उस पेड़ के नाम पर इसका ब्रांड नाम लाल ईमली रखा गया।  बाद  इस मिल ने आम लोगों के लिए भी कंबल, शॉल और ऊन बनाना शुरू हुआ। लाल ईमली ने अपने इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 1910 में लाल ईमली के फैक्ट्री में भीषण आग लगी थी।


लाल ईमली के आसपास मजदूरों की विशाल कालोनी बन गई थी। इन मजदूरों को समय पर फैक्ट्री पहुंचने के लिए लाल ईमली के परिस में विशाल घंटाघर का निर्माण कराया गया। ये घंटाघर 1911 में बनना शुरू हुआ था जो 1921 में बनकर तैयार हुआ।

सन 1947 में देश आजाद होने के बाद लाल ईमली मिल भारतीय हाथों में आ गई। पर उसके बाद कभी भी मिल ठीक से चल नहीं पाई। 1987 तक लाल ईमली के उत्पादों की बाजार में तूती बोलती थी। पर धीरे धीरे सब कुछ पटरी से उतरने लगा। कभी जिस फैक्ट्री में 5 हजार मजदूर काम करते थे। अब वहां 1000 से भी कम मजदूर हैं।

हालांकि साल 2017 में लंबे समय से बंद चल रही कानपुर वुलन मिल्स (लाल इमलीके दिन बदलने की उम्मीद जागती हुई दिखी। केंद्र सरकार पैकेज देकर लाल ईमली को फिर से जीवंत करना चाहती थी। 
कानपुर की बंद पड़ी एतिहासिक एल्गिन कॉटन मिल । 

एल्गिन कॉटन मिल – मुझे कानपुर में घूमते हुए एल्गिन कॉटन मिल की बंद पड़ी विशाल इमारत नजर आती है। लाल इमली, म्योर मिलएल्गिन मिलकानपुर कॉटन मिल और अथर्टन मिल कानपुर के अति प्रसिद्ध मिलें हुआ करती थीं। यहां का बना ज्यादातर माल लंदन एक्सपोर्ट होता था। लेकिन अब मिल एक खंडहर बना नजर आता है। 1864 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के पिता एडवर्ड एल्गिन के नाम पर इस मिल की स्थापना की गई थी। यहां बनने वाली साठिया चद्दर, तौलिया, बेड शीट उम्दा किस्म का होता था। कभी इस मिल की बनी तौलिया लंदन की महारानी को खूब पसंद आती थी। कानपुर को उत्तर भारत का मैनेचेस्टर बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले एल्गिन मिल के बाहर अब सन्नाटा पसरा रहता है।
- vidyutp@gmail.com


( KANPUR, LAL IMLI, BRITISH INDIA CORPORATION, CAWNPORE WOLLEN MILLS, ELGIN COTTEN MILL ) 

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