Monday, April 16, 2018

गंगटोक से गणेश टोक - गणपति विराज रहे हैं...

सुबह सुबह हमारी इच्छा गंगटोक के स्थानीय स्थलों के दर्शन की थी। बिसमिल्लाह भाई की पत्नी के हाथों बनाए पराठे खाने के बाद हमलोग निकल पड़े। अनादि को पराठा इतना पसंद आया कि उन्होने एक पैक भी करा लिया। टैक्सी वाले सोनम भूटिया (87689-40513) को फोन लगाया, पर वे नामची चले गए हैं। उन्होंने कहा आप नाराज न हों मैं दूसरे साथी को भेजता हूं। पर हमारे पास मधुकर टैक्सी वाले ( 97490-62299 ) का नंबर है। मधुकर भाई 9 बजे टैक्सी लेकर होटल के बाहर हाजिर हो गए। सात प्वाइंट 700 रुपये में देखना तय हुआ था। हमने होटल से चेकआउट करके अपना सामान भी टैक्सी में डाल लिया। तय हुआ कि गंगटोक दर्शन के बाद वे हमें देवराली टैक्सी स्टैंड छोड़ देंगे।
मधुकर भाई की उम्र 73 साल है। नेपाली हैं। 60 की उम्र में सिक्किम सरकार की नौकरी से रिटायर हो गए हैं। पर रिटायर होने के बाद घर में नहीं बैठे। कहते हैं काम नहीं करूंगा तो बीमार हो जाउंगा। तो 73 साल की उम्र में कुशलता से टैक्सी चला रहे हैं। लंबी उम्र के कारण उनके पास जानकारियों का खजाना है। उन्होंने कहा है कि सभी दर्शनीय स्थलों पर मैं पार्किंग में वाहन न लगाकर थोड़ा दूर सड़क पर पार्क करूंगा इस तरह आपका पार्किंग का खर्च बच जाएगा।
तो हमारा पहला पड़ाव है। फ्लावर गार्डन। एमजी से थोड़ा आगे यह एक छोटा सा निजी उद्यान है। 20 रुपये का प्रवेश टिकट है। मुन्नार के बोटानिकल गार्डन से काफी छोटा है। पर देखने में कोई बुराई नहीं है। इस गार्डन में तिब्बती बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा भी आ चुके हैं। इसके बाद हमलोग पहुंचे हैं गणेश टोक।  
गगंटोक शहर में दो ऊंचे मंदिर हैं। हनुमान टोक और गणेश टोक। गणेश टोक की दूरी सिक्किम एक एमजी रोड से 7 किलोमीटर है। मंदिर का परिसर बड़ा ही भव्य और सुंदर है। मंदिर के प्राचीर से गंगटोक शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है। गणेश टोक की ऊंचाई 6500 फीट है। यहां पहुंचने के लिए आपको टैक्सी बुक करनी पड़ेगी।
गणेश टोक मंदिर में जूते घर में पांव के जूते उतारने के बाद तीन मंजिले मकान के बराबर सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। मंदिर के अंदर नेपाली पुजारी तैनात दिखाई देते हैं। वे भक्तों को प्रसाद देते हैं और हाथों में कलावा बांध देते हैं। मंदिर के अंदर गणेश जी की विशाल और सुंदर प्रतिमा है। मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा पथ बना है। इस परिक्रमा पथ से गंगटोक शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है। कुछ लोग यहां से देर तक जी भर के शहर का नजारा करते हैं। मंदिर परिसर में एक गिफ्ट शॉप भी है। परिसर में पार्किंग और शौचालय, पेयजल आदि का इंतजाम भी है।
गणेश टोक के ठीक सामने गंगटोक को जूलोजिकल गार्डन का प्रवेश द्वार है। आपके पास समय है तो अंदर घूमने जा सकते हैं। इसके बाद हमारा अगला पड़ाव है ताशी व्यू प्वाइंट। पर इससे पहले हमें ड्राईवर साहब गंगटोक शहर का वाटर रिजरवयार दिखाते हैं। पहाड़ो से झरनों से आने वाला पानी यहां स्टाक किया जाता है। फिर उसे प्यूरीफाई करके पूरे शहर को सप्लाई किया जाता है। पूरे गंगटोक शहर को यहीं से पानी मिलता है। कहीं कोई हैंडपंप या बोरिंग की जरूरत नहीं है।
ताशी व्यू प्वाइंट से पहाड़ों का नजारा करने के लिए लोग जुटते हैं। यहां हमारी मुलाकात बनारस के एक शिक्षक दंपति से हुई जो हमें एक दिन पहले युमथांग वैली में मिले थे। मधुकर भाई हमें गंगटोक का प्लांट कंजरवेशन सेंटर दिखाते हैं। वास्तव में यह विशाल सरकारी बोटानिकल गार्डन है। रास्ते में एक ल्हासा फाल्स नामक झरना भी आता है। पर फिलहाल वहां पानी कम आ रहा है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(GANESH TOK, GANGTOK, TASHI VIEW POINT )          
   

1 comment:

  1. बढ़िया। ऐसे ही घुमते रहिए। और हमे भी नजारे दिखाते रहिए।

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