Saturday, April 28, 2018

नेशनल म्युजियम पारो और भूटान का कहानी

पारो पहुंचने के बाद हमारे पास आधा दिन का समय है। हमने तय किया कि आज पारो के मुख्य दर्शनीय स्थलों को देख लेते हैं और कल सुबह का समय टाइगर नेस्ट के लिए रखेंगे। क्योंकि टाइगर नेस्ट में आधा दिन लग जाना है। पारो के अलग अलग स्थलों को घूमने के लिए टैक्सी बुक करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि नेशनल म्युजियम, पारो जोंग, किचू लाखांग जोंग, टाइगर नेस्ट का स्टार्ट प्वाइंट सभी अलग अलग जगहों पर दूरी पर हैं।
टैक्सी वाले आधे दिन में पारो घूमाने के लिए 1000 रुपये मांगे। यह वाजिब था। तो हमारा पहला पड़ाव है नेशनल म्यूजियम पारो। इसका प्रवेश टिकट 25 रुपये है। भारतीय नागरिकों के लिए भी 25 रुपये ही है। भूटान के नागरिकों के लिए 10 भूटानी रुपये। तो बौद्ध भिक्षुओं के लिए निःशुल्क है।

नेशनल म्युजिम पारो का पुराना भवन 1649 का बना हुआ है। वास्तव में यह एक गोल वाच टावर था। इसे ता जोंग भी कहते हैं। इसका निर्माण ला नेगोनपा तेनजिन द्रुकद्रा द्वारा कराया गया जो पारो के गवर्नर थे। इसमें वृताकार सीढ़ियां हैं और हथियार रखने की जगह भी है। ऊंचाई पर होने के कारण यहां से पारो की वादियां बड़ी सुंदर दिखाई देती हैं। इसके कई भवन अब नेस्तनाबूद हो चुके हैं। पर 1965 में यहां नया निर्माण शुरू हुआ और भूटान की ऐतिहासिक स्मृतियों को सहेजने का काम शुरू हुआ।
संग्रहालय के अंदर मोबाइल बैग आदि लेकर नहीं जा सकते हैं। बाहर निःशुल्क लॉकर की सुविधा है।
मास्क गैलरी -  संग्रहालय के अंदर सबसे पहले मास्क गैलरी है। इसमें भूटान के अलग अलग इलाकों में होने वाले मास्क उत्सव की झलक देखी जा सकती है। मुखौटा निर्माण कला भूटान के वज्रयान बौद्ध मत से संबंध रखती है।आज भी भूटान में अलग अलग स्थलों पर मास्क फेस्टिवल होते हैं। 
थंगक गैलरी - 
दूसरी गैलरी थंगक चित्रकला है। इसमें कपड़े पर गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी चित्र देखे जा सकते हैं। यहां 16वीं सदी से लेकर 18वीं सदी तक की थंगक पेंटिंग देखी जा सकती है।

तीसरी गैलरी में नामग्याल (विजय की देवी) के क्ले से बनी मूर्तियां देखी जा सकती हैं। चौथी गैलरी भूटान के प्राकृतिक इतिहास से आपका परिचय कराती है। यहां भूटान की वन संपदा, भूगोल और वन्य जीवों के बारे में विस्तार से जाना जा सकता है। 

जाति और धर्म - भूटान में आधिकारिक धर्म बौद्ध धर्म की महायान शाखा हैजिसका अनुपालन देश की लगभग तीन चौथाई जनता करती है। भूटान की 25 प्रतिशत जनसंख्या हिंदू धर्म की अनुयायियों की भी है। भूटान के हिंदू धर्मी नेपाली मूल के लोग हैजिन्हे ल्होछमपा भी कहा जाता है। भूटान  में ज्यादातर लोग यही के मूल निवासी हैंजिन को गांलोप कहा जाता है और इनका निकट का संबंध तिब्बत की कुछ प्रजातियों से है। इसके अलावा यह पर  प्रजातियों में नेपाली है और इनका सम्बन्ध नेपाल राज्य से है। उसके बाद शरछोगपा और ल्होछमपा हैं।
भूटान की भाषाएं - यहां की आधिकारिक भाषा जोङखा हैइसके साथ ही यहां कई अन्य भाषाएं बोली जाती हैंजिनमें कुछ तो विलुप्त होने के कगार पर हैं।पूरे भूटान में लोग 23 तरह की भाषाएं बोलते हैं।

72 फीसदी हिस्सा भूटान का वन क्षेत्र है।
35 फीसदी इलाका संरक्षित क्षेत्र में आता है।
04 वन्य जीव क्षेत्र और 4 नेशनल पार्क हैं भूटान में
60 फीसदी हिस्सा हमेशा वन क्षेत्र रखने का संकल्प लिया गया है।
38394 वर्ग किलोमीटर है राज्य का क्षेत्रफल। 
6.50 लाख है भूटान की आबादी।
300 किलोमीटर सीमा तिब्बत (चीन) से लगतीहै।
150 किलोमीटर से अधिक सीमा भारत से लगती है।
07 जनजातीय समूह हैं भूटान में
23 भाषाएं बोली जाती हैं देश में
46 प्रजातियां बुरांश की पाई जाती हैं भूटान में
770 तक की चिड़ियां इस देश में पायी  गई हैं।

पूरे संग्रहालय को घूमने के बाद भूटान के इतिहास और देश के विकास की गाथा से रूबरू हो सकते हैं। नेशनल म्यूजियम के अंदर एक सोवनियर शॉप भी है। यहां से आप हस्त निर्मित वस्तुएं, पुस्तकें आदि खरीद सकते हैं। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
-         ( PARO, BHUTAN ) 

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