Wednesday, April 11, 2018

गंगटोक से लाचुंग घाटी की ओर

डिकाचू में तीस्ता नदी। 
पिछली बार अपनी गंगोटक यात्रा में मैं लाथुला की ओर गया था। तब पुराना बाबा हरभजन सिंह मंदिर तक हमारी गाड़ी गई थी। इस बार हम किसी नए क्षेत्र में जाना चाहते हैं। हम नामची के बारे में सोच रहे थे। पर हमारे होटल प्लेजेंट हिल रेसीडेंसी के संचालक बिसमिल्लाह भाई ने हमें उत्तर सिक्किम के लाचुंग वैली जाने की सलाह दी। उनके पास सिक्किम के सैर सपाटा वाले स्थलों की अच्छी जानकारी और व्यवहारिक अनुभव है। मार्च महीने में भी सिक्किम के तमाम इलाकों में अच्छी बर्फबारी हो रही है। नाथुला मार्ग पर छांगु लेक के आगे का रास्ता इन दिनों बंद है। हमें पता चला कि रोज सैलानी छांगु लेक या 15 माइल से ही लौट कर आ जा रहे हैं।
तो बिशमिल्लाह भाई की सलाह पर हमने उत्तर सिक्किम की तरफ जाना तय किया।
उत्तर सिक्किम जिला सिक्किम राज्य के चार जिलों में से एक है। इस जिले का मुख्यालय मांगन है। उत्तरी सिक्किम जिले का अधिकांश हिस्सा पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित है, क्योंकि इस संवेदनशील जिले की सीमा चीन से मिलती है। इसलिए नाथुला की तरह यहां के लिए भी पास निकलवाना पड़ता है। लाचुंग जाने के लिए दो दिनों का पैकेज गंगटोक में मिलता है। इसमें पहले दिन सुबह गाड़ी लेकर आपको लाचुंग की तरह जाती है। यह 125 किलोमीटर का सफर है। रात्रि विश्राम लाचुंग में होता है। अगले दिन युमथांग वैली, जीरो प्वाइंट आदि की सैर के बाद देर शाम तक गंगटोक वापसी। इस पैकेज में दोपहर का भोजन, रात्रि भोजन, अगले दिन सुबह का नास्ता और दोपहर का खाना के साथ ही रात्रि में लाचुंग में होटल में रहना भी शामिल है।

यह पैकेज 1200 रुपये प्रति यात्री से 1700 रुपये प्रति यात्री तक का हो सकता है। हमने एनएच 31ए पर नाथुला टूर एंड ट्रैवल्स से अपना पैकेज बुक कराया। यह ट्रैवल एजेंसी एमजी रोड के ठीक नीचे स्थित है। पैकेज 1200 रुपये में तय हो गया। तो परमिट के लिए आधार कार्ड और दो तस्वीरें जमा करानी थी। अनादि की तस्वीरें नहीं थीं तो बगल वाली दुकान में फटाफट फोटो खिंचवाकर दे दिया गया। पैकेज बुक होने के बाद हमलोग एमजी रोड पर टहलने निकल गए। लक्ष्मी स्वीट्स में छोले भठूरे, पूरी और मिठाइयां खाई गईं। थोड़ा एमजी रोड की रौनके बहार लूटने के बाद अनादि ने मोमोज भी उदरस्थ किए। उसके बाद हमलोग होटल वापस चल पड़े।

चार हिस्सों में बंटा है सिक्किम-  तो सिक्किम चार हिस्सों में बंटा है टूरिज्म के लिहाज से भी। नार्थ सिक्किम (मुख्यालय मंगन ) में लाचूंग घाटी, यामथांग वैली, जीरो प्वाइंट और कटाव आदि इलाके आते हैं।

दक्षिण सिक्किम जिले में नामची आता है। यह गंगटोक से दार्जिलिंग के मार्ग पर है। इसमें नामची में चार धाम मंदिर चाय बागान और भी कुछ दिलकश नजारे हैं।  पूर्व सिक्किम जिले में गंगटोक शहर और उसके आसपास के इलाके आते हैं। इसी जिले में छांगु लेक, बाबा मंदिर आदि इलाके आते हैं।

पश्चिम सिक्किम जिले का मुख्यालय गेजिंग हैं। पश्चिम सिक्किम पूर्वी हिमालय क्षेत्र के सबसे खूबसूरत और पवित्र स्थानों में गिना जाता है। यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए भी जाना जाता है। यह मठभूमि है। यहां के कुछ मठ तो शताब्दियों पुराने हैं। एक रिज पर स्थित संगा चोलिंग मठ 1697 में बना था। इसे सिक्किम राज्य के सबसे प्राचीन मठों में एक माना जाता है। यहां की खेचियापलरी झील अति सुंदर है। पर फिलहाल तो चलेंगे उत्तर सिक्किम में लाचुंग की ओर।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( NATHULA TOURS, VAJRA STAND, LACHUNG ) 
  


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