Thursday, March 8, 2018

अनूठे शिव के धाम उनाकोटि की ओर

कैलाशहर के श्रीकृष्णा होटल के कमरे में सो रहा हूं। मेरे मोबाइल का अलार्म बज उठा। सुबह के पांच बज गए हैं। सर्दी के दिन हैं तो क्या हुआ। मैं छह बजे तक स्नान करके तैयार हो गया। जब आप कहीं घूमने निकले हों तो सुबह सुबह निकल जाना बेहतर रहता है। सुबह की खुली हवा में टहलना हो जाता है, इसके साथ ही दोपहर तक आप काफी कुछ घूम चुके रहते हो।
मैंने जिन आटो वाले से बात की थी उनको फोन लगाया, कोई उत्तर नहीं आया। तब होटल के नीचे घूम रहे एक दुकानदार ने मदद की। होटल के सामने एक आटोवाले साधन मालाकार का घर है। उन्हे आवाज देकर जगाया। वे सो रहे थे, कई बार आवाज लगाने पर जगकर बाहर आए। वे मुझे 250 रुपये में उनकोटि घूमाने को तैयार हो गए। साधन को हिंदी भी अच्छी आती है। उन्होंने बताया कि वे काफी सैलानियों को उनकोटि घूमा भी चुके हैं। तो मैं उनके साथ ही चल पड़ा। एक किलोमीटर जाने पर दूसरे आटो वाले हमारा पीछा करते आए जिनसे हमने एक दिन पहले बात की थी। अब वे लड़ाई करने लगे।

हमने कहा, आपको सुबह फोन किया था कोई उत्तर नहीं मिला तो हमने नया आटो बुक किया। पर वे समय का हवाला दे रहे थे, कि मैं समय पर पहुंच गया था पर आप पहले ही दूसरा आटो लेकर चल पड़े। खैर उन्हें 50 रुपये देकर पीछा छुड़ाया। पहली बात को उन्हें हिंदी नहीं आती थी। दूसरी उनसे 400 रुपये में बात हुई थी, तो मैं साधन मालाकार 250 और उन्हें 50 रुपये देने के बाद भी 100 रुपये के फायदे में ही था।
 खैर उनसे पीछा छुडाकर हमलोग आगे चले। आगे चीनी बगान चौराहा आया। यहां पर एक दुकान पर हम चाय पीने रूके। वैसे तो मैं चाय बहुत कम पीता हूं, पर सरदी की सुबह की चाय अच्छी लगती है। पांच रुपये की चाय है। हमने आटो वाले साधन कोई भी चाय पिलाई, मठरी भी खाने को कहा। चाय के बाद अब फिर शुरू हुआ एक बार फिर उनाकोटि का सफर।
अजंत एलोरा को टक्कर देती उनाकोटि की मूर्तियां-  उनाकोटि की गुफाएं अपने सौंदर्य और ऐतिहासिकता में अजंता और एलोरा को टक्कर देती हैं। पर पूर्वोत्तर के सुदूर राज्य त्रिपुरा में होने के कारण यहां कम सैलानी पहुंचते हैं।
कैलाशहर बाजार से त्रिपुरा के प्रसिद्ध उनाकोटि गुफाओं की दूरी आठ किलोमीटर है। यह कैलाशहर-धर्मनगर मार्ग पर है। धर्मनगर से आएं तो 19 किलोमीटर पड़ेगा। मुख्य सड़क से बायीं तरफ उनाकोटि के लिए रास्ता मुड़ता है। यहां पथ संकेतक लगा है। आप चाहें तो कैलाशहर –कुमारघाट मार्ग पर चीनी बगान के पास उतरकर पैदल चलकर भी उनाकोटि पहुंच सकते हैं।
उनाकोटि गुफाओं के प्रवेश द्वार पर पार्किंग हैं। वन विभाग और पुलिस के जवान तैनात रहते हैं। यहां कोई प्रवेश टिकट नहीं है। सुबह सुबह यहां पहुंचने वाला मैं पहला सैलानी हूं। प्रवेश द्वार से अंदर की तरफ चल पड़ता हूं। आटो वाले साधन बोलते हैं कि मैं यहीं आपका इंतजार करूंगा, आप चाहे जितनी देर लगाएं अच्छी तरह घूम कर वापस लौटें। उन्होंने कहा आराम से घूमिए, अकेले हैं तो भी डरने की कोई बात नहीं है।
उनाकोटि में अंदर प्रवेश करते ही आंखे फटी रह जाती हैं। यों पूछता हूं ये कहां आ गए हम। यहां प्रकृति ने पग पग पर अनूठा सौंदर्य बिखेर रखा है। यह स्थल इतिहास, पुरातत्व और धार्मिक खूबियों से भरपूर है। यहां का रंग और गंध पर्यटकों को अपनी ओर आमंत्रित करता प्रतीत होता है। उनाकोटि एक औसत ऊंचाई वाली पर्वत श्रृंखला है, जो स्वर्गिक आनंद का एहसास कराता है।
मनोरम वादियों में शिव परिवार की मूर्तियां - 
लहरदार पगडंडियों से होकर घने जंगलों के बीच से गुजरते हुए, नदी की घाटियां और संकरी जलधाराएं और जल स्रोत का मनोरम नजारा सैलानियों का मन मोह लेता है। यहां अनोखी वनस्पतियां नजर आती हैं तो जंगल में वन्य जीवों के होने का एहसास रोमांचित करता है। तकरीबन एक किलोमीटर में विस्तारित उनाकोटि में शिव परिवार की मूर्तियां हैं। उनाकोटि में पहाड़ों की चट्टानों पर बनाए गए नक्काशी के शिल्प और पत्थर की मूर्तियां देखने को मिलती हैं।

उनाकोटि मतलब एक करोड़ से एक कम - उनाकोटि के बारे में कहा जाता है कि इस स्थान पर शिव की एक करोड़ से एक कम मूर्तियां विद्यमान हैं। वहां शिव की एक करोड़ से एक कम मूर्तियां हैं। त्रिपुरा में कल्लू नाम का एक कुम्हार रहता था। वह शिव जी के साथ रहना चाहता था। वह उनके साथ कैलाश पर्वत जाना चाहता था। भगवान शिव ने शर्त रखी कि उसे एक रात में शिव जी की एक  उसे एक रात में शिव जी की एक करोड़ मूर्तियां बनानी होंगी। कल्लू जाने के लिए बहुत उत्सुक्त था इसलिए तुरंत मूर्तियां बनाने लगा। परन्तु एक मूर्ति रह गई और सुबह हो गई। इसलिए वह शिव जी के साथ नहीं जा सका और वहीं रह गया। उसी के नाम से त्रिपुरा के उस स्थान का नाम उनाकोटि पड़ा। उनाकोटि का अर्थ है एक करोड़ से एक कम।
 ( जारी....)
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(UNAKOTI, KAILASHAR, TRIPURA ) 

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