Wednesday, March 7, 2018

मनु नदी के तट पर कैलाशहर – सातवीं सदी से आबाद है

कैलाशहर बांग्लादेश की सीमा पर स्थित त्रिपुरा का एक पुराना शहर है। यह उनाकोटि जिले का मुख्यालय भी है। कुमारघाट रेलवे स्टेशन से कैलाशहर की दूरी 23 किलोमीटर है। जबकि धर्मनगर से कैलाशहर की दूरी 28 किलोमीटर है। पर कैलाशहर कुमारघाट से पहुंचना वाहन की उपलब्धता के लिहाज से ज्यादा सुगम है। सड़के ग्रामीण है। ट्रैफिक का दबाव ज्यादा नहीं है। कुमारघाट से चली टाटा मैजिक ग्रामीण और हरे भरे जंगल वाले रास्तों से होती हुई तकरीबन एक घंटे में कैलाशहर बाजार पहुंचा देती है। टैक्सी-बस स्टैंड से वे मुझे एक बैटरी रिक्शा वाले के हवाले कर देते हैं। नए मोटर स्टैंड और जिला जेल के बीच मनु नदी पर पुल है। मनु नदी शहर के बीचों बीच गुजरती है।

जिला जेल से आगे जाकर मुख्य बाजार में बायीं तरफ श्रीकृष्ण होटल नजर आता है। इसमें नीचे भोजनालय है और ऊपर आवासीय कमरे। 300 रुपये का कमरा हवादार है। कमरे में टीवी भी है। होटल वाले एंट्री के लिए कंप्यूटर ऑन कर आनलाइन फोटो खिंचते हैं फिर रजिस्टर में जरूरी सूचनाएं भरते हैं।
कैलाशहर त्रिपुरा का एक ऐतिहासिक शहर है। यह सातवीं सदी में भी आबाद शहर था। यहां का बाजार समान्य सा लगता है। पर यहां एयरपोर्ट भी है। बांग्लादेश का लंबा बार्डर है। यहां से बांग्लादेश में प्रवेश के लिए चेकपोस्ट भी है। उनाकोटि जिले का मुख्यालय होने के कारण यहां तमाम सरकारी दफ्तर हैं। जेल के पास एक नवनिर्मित विशाल टाउनहाल नजर आता है। उसपार बांग्लादेश के शमशेरनगर, शरीफपुर और कमलागंज जैसे बाजार पड़ते हैं। बांग्लादेश के ज्यादातर शहरों के नाम अब भी हिंदी या संस्कृतनिष्ठ सुनाई देते हैं।
कैलाशहर जिला मुख्यालय है पर शहर की आबादी 24 हजार के आसपास है। हिंदू बहुल शहर में कई मंदिर हैं। मुझे कल सुबह उनाकोटि घूमना है इसलिए आज शाम को शहर घूमने के लिए पूरा समय है। तो मैं पैदल पैदल बाजार का चक्कर लगाता हूं। सबसे पहले सब्जी बाजार में। कई सब्जियां बहुत सस्ती हैं। कच्चा पपीता 10 रुपये किलो। पका हुआ केला 5 रुपये दर्जन। चिकेन, मछली और अंडे के बाजार में खूब भीड है। सूखी हुई मछलियां भी बाजार में बिक रही हैं।
कैलाशहर परंपरागत तौर पर कांग्रेस का गढ रहा है। यहां से बीराजीत सिन्हा छह बार विधायक रहे हैं। वे वर्तमान में त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। पर इस बार शहर में भाजपा का प्रचार भी खूब दिखाई दे रहा है।
आर्ट क्राफ्ट मेला और जैतून का अचार –
इन दिनों कैलाशहर में एक कला शिल्प मेला लगा हुआ। मैं उसे देखने के लिए पहुंच गया। मेले में पूर्वोत्तर के कई राज्यों के वस्त्रों के स्टाल हैं। यहां से एक त्रिपुरा शाल खरीदा। वैसे त्रिपुरा के बने मफलर भी बड़े सुंदर होते हैं। मंच पर रंगारंग कार्यक्रम चल रहा है। एक अचार के स्टाल पर रुका। पनिसागर के अचार वाले हैं। इनके पास कई किस्म का अचार है। यहां से मैंने जैतून का अचार लिया। यह मुझे कुछ अलग लगा। त्रिपुरा के कई हिस्सों में जैतून की खेती हो रही है। गंगा सेल्फ हेल्प ग्रुप, पनिसागर के स्टाल पर काफी कुछ खरीदने लायक था। कई किस्म के अचार और जूस। स्टाल पर मौजूद युवक ने बताया कि अभी वे पुणे में स्टाल लगाकर अच्छी बिक्री करके लौटे हैं।
रात हो गई है। पर मैंने रात को डिनर करने के बजाय, कचौरी, जलेबी और मिठाइयां खाकर पेट भर लिया है। एक आटोवाले से अगले दिन उनाकोटि चलने के लिए बात कर ली, इसके बाद होटल में आकर जल्दी सो गया।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( KAILASHAHAR, ART CRAFT, PANNISAGAR, TRIPURA, SRI KRISHNA HOTEL ) 

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