Tuesday, March 6, 2018

कमाल - रेलवे स्टेशन है या पेंटिंग गैलरी

हरे भरे राज्य त्रिपुरा के रेलवे स्टेशनों की छटा भी निराली है। नार्थ फ्रंटियर रेलवे ने त्रिपुरा के रेलवे स्टेशनों के इतना सुंदर सजाया है कि ये स्टेशन किसी पर्यटक स्थल और आर्ट गैलरी जैसे नजर आते हैं। इसका सिलसिला धर्मनगर से ही आरंभ हो जाता है।
 एमजी से बीजी हो गई पर चाल तो है धीमी - दूसरी बार पूर्वोत्तर के सुंदर राज्य त्रिपुरा में प्रवेश कर रहा हूं। चुरईबाड़ी के बाद ट्रेन त्रिपुरा के छोटे छोटे स्टेशनों को पार कर रही है। अपने निर्धारित समय से ट्रेन लेट हो गई है। हमारे सामने वाली सीट पर एक महिला रेलवे कर्मचारी हैं जो करीमगंज से अगरतला जा रही हैं। मैं तुलना कर रहा हूं अगरतला पैसेंजर तो मीटरगेज से ब्राडगेज हो जाने के बाद भी धीमी गति से चल रही है। मुझे पांच साल पहले ता सफर याद आ रहा है जब रेल कुलांचे भर रही थी . साथ चल रही महिला रेलवे कर्मी कहती हैं, एमजी से बीजी हो गया, पर स्पीड नहीं बढ़ी है। स्पीड बढ़ना क्या ट्रेन तो पहले से भी धीमी गति से चल रही है। कुमारघाट से पहले ट्रेन तकरीबन एक किलोमीटर लंबी सुरंग से होकर गुजरी। इसके बाद एक और सुरंग आई हालांकि यह ज्यादा लंबी नहीं है।  
आर्ट गैलरी बने रेलवे स्टेशन –  नदियापुर के बाद ट्रेन धर्मनगर पहुंच गई है। धर्मनगर त्रिपुरा शहर का अगरतला के बाद दूसरा प्रमुख शहर है। मुझे धर्मनगर, पनिसागर और कुमारघाट जैसे तमाम स्टेशन बड़े साफ सुथरे नजर आ रहे हैं। प्लेटफार्म से लगी दीवारों पर शानदार पेंटिंग बनाई गई हैं। इन चित्रों में रामायण और महाभारत के प्रसंगों को बड़ी खूबसूरती से उकेरा गया। स्टेशन पर घूमते हुए यूं प्रतीत होता है मानो हम किसी आर्ट गैलरी में आकर खड़े हो गए हैं। इतने बेहतरीन प्रयास के लिए नार्थ इस्ट फ्रंटियर रेलवे के लमडिंग डिविजन के उन तमाम अधिकारियों का धन्यवाद बनता है जिन्होंने इन स्टेशनों को इतने सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया है।
धर्मनगर के बाद आया पनिसागर। पनिसागर रेलवे स्टेशन पर भी वैसी ही आर्ट गैलरी दिखाई देती है। दिल खुश हो जाता है। पनिसागर के बारे में एक बात और अगर आपके पास अपना वाहन है तो यहां से मिजोरम के बैरबी की दूरी ज्यादा नहीं है। 


आईजोल की तरफ से आते हुए बैरबी होकर सीधा पानिसागर पहुंचा जा सकता है। दूसरा रास्ता है आईजोल, साइरंग, लेंगपुई से ममित होते हुए एनएच 108 से पनिसागर पहुंचा जा सकता है। पर इस पर टैक्सियां शायद ही चलती हैं।
अगला स्टेशन है पेंचारथल। यहां पर अगरतला से आ रही सिलचर पैसेंजर की क्रासिंग हुई। पेंचारथल में उदयन बौद्ध विहार देखने के लिए उतरा जा सकता है।

जब मैं कुमारघाट रेलवे स्टेशन पर उतर जाता हूं तो स्टेशन से बाहर निकलने से पहले प्लेटफार्म पर एक बार फिर बड़े ही सुंदर और मोहक चित्र दिखाई देते हैं। इन मोहक चित्रों को देख लेने में कुछ मिनट देना चाहता हूं।
पर मेरा टिकट तो अगरतला तक का है, मैं कुमारघाट में ही क्यों उतर गया। तो इसकी कहानी भी सुन लिजिए। दूसरी बार त्रिपुरा जा रहा हूं। तीन दिन का समय है। तो इस बार कुछ नए स्थानों की ओर जाना है जहां पिछली बार नहीं जा सका था। ट्रेन में चलते हुए उनाकोटि के बारे में याद आया।

मैंने मोबाइल पर गूगल सर्च किया। पता चला धर्मनगर के या कुमारघाट के करीब है। तो धर्मनगर में होटल सर्च किया। होटल उनाकोटि में 300 रुपये और उससे ऊपर के कमरे उपलब्ध हैं। धर्मनगर से उनाकोटि 19 किलोमीटर है। आटो-टैक्सी बुक करनी पड़ेगी। टैक्सी वाला 1000 लेगा। मैं देखता हूं कैलाशहर से उनाकोटि 8 किलोमीटर है। कैलाशहर में गूगल पर होटल सर्च करता हूं। शहर में श्रीकृष्ण होटल दिखा। उनको फोन मिलाया। बताया कमरा 250, 300 का उपलब्ध है। होटल वाले ने बताया कि आप ट्रेन से कुमारघाट उतरें वहां से कैलाशहर के लिए शेयरिंग टैक्सियां मिल जाएंगी। तो मैं धर्मनगर उतरने का इरादा त्याग देता हूं। पर अचानक कुमारघाट से होटल उनाकोटि का फोन आता है। आप आए नहीं हम आपका इंतजार कर रहे हैं। मैंने कहा मेरा कार्यक्रम बदल गया है। ये सुनकर उन्होंने थोड़ी नाराजगी भी दिखाई। 
तो कुमारघाट रेलवे स्टेशन उतरने के बाद बाहर निकलता हूं। यहां से कैलाशहर का कोई वाहन दिखाई नहीं दे रहा। तब लोगों ने बताया कि आप बस स्टैंड पहुंचे। बैटरी रिक्शा से 10 रुपये देकर बस स्टैंड पहुंच गया। यहां से टाटा मैजिक जा रही है कैलाशहर के लिए। मैं मैजिक में बैठ गया, और गाड़ी चल पड़ी एक नए सफर पर।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  
( DHARAMNAGAR, KUMARGHAT, PANNISAGAR, KAILASHAHAR) 

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