Friday, March 16, 2018

त्रिपुरा का उदयपुर - मंदिरों का शहर

राजस्थान के उदयपुर के अलावा देश में दो उदयपुर और हैं। गुजरात में छोटा उदयपुर तो त्रिपुरा में उदयपुर शहर। त्रिपुरा का उदयपुर राजधानी अगरतला से 55 किलोमीटर आगे गोमती नदी के तट पर बसा एक प्यारा शहर है। यह दक्षिण त्रिपुरा (गोमती) जिले का मुख्यालय भी है। इस शहर की पहचान त्रिपुर सुंदरी मंदिर के कारण है।
झीलों का शहर है त्रिपुरा का उदयपुर
त्रिपुरा का उदयपुर भी राजस्थान के उदयपुर की तरह ही झीलों का शहर है। यहां त्रिपुर सुंदरी मंदिर के पास स्थित कल्याण सागर के अलावा कई और सुंदर झीलें है। इन झीलों के चारों तरफ सुंदर फुटपाथ बनाए गए हैं। इस झील के किनारे मछुआरों के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी खोला गया है। ये सभी झीले कृत्रिम हैं, इनकी खुदाई त्रिपुरा के राजाओं द्वारा जल स्रोत के संरक्षण के लिए कराई गई थीं।
एक बार फिर माताबाड़ी, उदयपुर में। ( त्रिपुर सुंदरी मंदिर ) 
उदयपुर की झीलों के नाम धानी सागर, विजय सागर, अमरनाथ दीघी, अमर सागर, जगन्नाथ दीघी आदि हैं। अगरतला और धर्मनगर के बाद उदयपुर त्रिपुरा का तीसरा बड़ा शहर भी है। शहर की आबादी 40 हजार के आसपास है। उदयपुर में काजी नजरूल इस्लाम के नाम पर नजरूल ग्रंथागार नामक पुस्तकालय भी स्थापित है। शहर में प्रसिद्ध रमेश हाईस्कूल स्थित है। मुख्यमंत्री माणिक सरकार इसी स्कूल के पूर्व छात्र हैं।
ऐतिहासिक महत्व के मंदिर-
माताबाड़ी (त्रिपुर सुंदरी ) मंदिर के अलावा यहां कई और मंदिर हैं। सभी मंदिर ऐतिहासिक महत्व हैं। जगन्नाथबाड़ी, महादेव बाड़ी, लोकनाथ मंदिर, सत्संग विहार और भुवनेश्वरी मंदिर उदयपुर शहर के कुछ प्रसिद्ध मंदिर हैं।
अपनी पिछली यात्रा में मैं माताबाड़ी के दर्शन करके लौट गया था। इस बार भुवनेश्वरी मंदिर जाने की इच्छा है। तो मेलाघर से उदयपुर पहुंचने पर टैक्सी से उतरने के बाद एक आटो वाले से बात करता हूं। वह सौ रुपये में भुवनेश्वरी मंदिर ले जाने और वापस बस स्टैंड छोड़ने को तैयार हो जाते हैं।
शिव का मनोरम मंदिर - महादेव बाड़ी
त्रिपुरा के शहर उदयपुर के मुख्य शहर में महादेव बाड़ी स्थित है। यह शिव मंदिर समूह है। शिव मंदिर के अलावा परिसर में दो और अत्यंत सुंदर और ऐतिहासिक महत्व के मंदिर हैं। महादेव बाड़ी के पास महादेव दीघी सरोवर बना है। इस मंदिर के दूसरी तरफ विजय सागर नामक विशाल सरोवर भी है। महादेव बाड़ी के मंदिरों का निर्माण त्रिपुरा के राजा महाराज धन्य माणिक्य के शासन काल में हुआ था। 
बाद में महाराज कल्याण माणिक्य और राम माणिक्य के शासन काल में इसकी मरम्मत और विस्तार का काम हुआ। इनका निर्माण काल 1650 से 1672 के बीच का है। बंगीय शैली में बने इन मंदिरों के निर्माण में लाल पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर के दीवारों पर सुंदर नक्काशी है। अपने सुंदर वास्तुकला के कारण ये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित मंदिर समूह है। बाद में इस मंदिर का पुनर्निर्माण महाराजा राधाकिशोर माणिक्य के शासन काल में साल 1900 के आसपास हुआ।
महादेव बाड़ी मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम की ओर से है। महादेव बाडी के शिव मंदिर में विशाल शिवलिंगम स्थापित है। मंदिर में नियमित पूजा पाठ होता है। यहां दर्शन से लिए दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। शिवरात्रि के मौके पर यहां विशाल मेला लगता है। मंदिर परिसर के बाहर पूजा प्रसाद की दुकानें हैं।
महादेव बाड़ी परिसर में दो और मंदिर हैं जिनके नाम चतुर्दश देव मंदिर और त्रिलोकीनाथ मंदिर हैं। हालांकि इन मंदिरों में कोई भी मूर्ति स्थापित नहीं है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो शेरों की पत्थरों से काटकर बनाई गई प्रतिमा स्थापित की गई है।
गुनाबती मंदिर समूह
महादेव मंदिर से आगे तीन मंदिरों का समूह है। इसे तीन मंदिर या गुनाबती मंदिर समूह कहते हैं। इन तीन मंदिरों का निर्माण 1668 में त्रिपुरा की महारानी और महाराजा गोविंद माणिक्य की पत्नी गुणावती द्वारा करवाया गया था। महारानी गुणावती बहुत ही आस्थावान महिला थीं। 
-विद्युत प्रकाश मौर्य
 ( TRIPURA, UDAIPUR, TEMPLE TOWN, GOMATI RIVER ) 

1 comment:

  1. उदयपुर - राजस्थान के निकट बांसवाड़ा में भी त्रिपुरा सुन्दरी का मन्दिर है।

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