Thursday, March 15, 2018

मेलाघर से उदयपुर – लाल सलाम बनाम भगवा राजनीति

मैं नीरमहल का सौंदर्य देखकर अब उदयपुर के लिए चल पड़ा हूं। नीरमहल से लगा बाजार मेलाघर सोनमूड़ा विधानसभा क्षेत्र में आता है। सोनमूड़ा भी बांग्लादेश का बार्डर शहर है। यहां से बांग्लादेश का शहर कोमिल्ला नजदीक है। कोमिल्ला महान संगीतकार सचिनदेव बर्मन की जन्म स्थली है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से बात करके सचिन दादा के पैतृक आवास को पर्यटक स्थल में तब्दील करा दिया है। अब लोग अगरतला से वीजा लेकर सोनमुड़ा होकर कोमिल्ला तक जाते हैं। अगरतला से कोमिल्ला सुबह जाकर शाम तक लौट भी सकते हैं।
कभी कोमिल्ला में त्रिपुरा राजघराने की बड़ी लाइब्रेरी भी हुआ करती थी। हमें नीरमहल में नाविक संजीव बर्मन बताते हैं कि सचिव देव बर्मन के पिता नवदीप बर्मन को ही त्रिपुरा का राजा बनना था पर वे कम आयु के कारण राजा नहीं बन सके। उनके चाचा राजा बन गए। तो उन्हे कोमिल्ला की जमींदारी मिली। कोमिल्ला में नवदीप बर्मन के नाम पर स्कूल भी है। सचिन दादा का मन तो कभी जमींदारी और राजकाज में लगा ही नहीं। वे संगीत के लिए ही बने थे।
खैर सोनामूड़ा और आसपास का इलाका धान उत्पादक है। त्रिपुरा का बेहतरीन किस्म का धान इधर होता है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार की विधानसभा धानपुर भी मेलाघर के पास ही है। संजीव बर्मन बताते हैं कि इस बार के चुनाव में भाजपा का प्रचार जबरदस्त जरूर है पर सीपीएम की पकड़ इतनी कमजोर नहीं हुई है। राज्य मुसलमान तो भाजपा को वोट हरगिज नहीं देगा। सिपाहाजिला जिले में मुस्लिम वोट निर्णायक है।
नीरमहल से वापसी में बैटरी रिक्शा से मेला घर बाजार पहुंच गया हूं। यहां टैक्सी, बस स्टैंड से उदयपुर के लिए टैक्सी की तलाश में हूं। जल्दी ही एक जीप मिल गई उदयपुर जाने वाली। यहां से उदयपुर की दूरी 22 किलोमीटर है। हमारे बगल वाली सीट पर एक मुस्लिम युवक बैठे हैं। वे सबरूम इलाके में एक निःशुल्क मकतब चलाते हैं। वे अपना कार्ड देकर कहते हैं कभी हमारे यहां आइएगा। उदयपुर शहर के करीब पहुंच गए हैं हम। पर यहां भाजपा की बहुत बड़ी बाइक रैली निकल रही है। इसके कारण सड़क पर जाम लगा है। तकरीबन 4000 बाइक की रैली है। पूरा शहर भगवा झंडों से पटा पड़ा है। सिर्फ उदयपुर ही नहीं बल्कि पूरे त्रिपुरा के ज्यादातर शहरों में आज भाजपा की रैली है।


राज्य में 1993 से लगातार वामदल का शासन है। 1998 से मानिक सरकार मुख्यमंत्री हैं। अपने शासन के शानदार 20 साल पूरे कर चुके हैं, पर उन्हें इस बार भाजपा से बड़ी चुनौती मिल रही है। कांग्रेस और तृणमूल दौड़ में नहीं हैं इस बार। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम ने त्रिपुरा में 60 में से 49 सीटें जीती थीं। राज्य की 20 आदिवासी समाज के लिए आरक्षित सीटों में 19 सीपीएम के खाते में गई थीं।

पर इस बार वामपंथ (लाल सलाम) को भगवा पार्टी से बड़ी चुनौती मिल रही है। संयोग से जब मैं इस बार त्रिपुरा पहुंचा हूं तो सियासी पारा चढ़ा हुआ है। त्रिपुरा भाजपा के अध्यक्ष बिप्लब देव यहीं उदयपुर के पास के गांव के रहने वाले हैं। उनकी पढाई उदयपुर में ही हुई है। लंबे समय तक संघ के कार्यकर्ता रहे। उनके अंदर नेतृत्व कौशल को गढ़ने में केएन गोविंदाचार्य का बड़ा योगदान रहा है।

त्रिपुर सुंदरी मंदिर में पत्नी के साथ पूजा करते बिप्लब देब। 
तीन मार्च 2018 को आए नतीजे में त्रिपुरा में भाजपा गठबंधन को 43 सीटें मिलीं और सीपीएम को 16 सीटें। 25 साल बाद सीपीएम त्रिपुरा से सत्ता से बाहर हो गई। इसके साथ ही राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 
(MELAGHAR, UDAIPUR, CPM, BJP ) 

No comments:

Post a Comment