Friday, March 2, 2018

कछार का सुंदर मंदिर – अरुणाचल काली बाड़ी

सुबह के पांच बजे तैयार होकर सिलचर का होटल छोड़ दिया। वहां से रेलवे स्टेशन के लिए आटो रिक्शा मिल गया। योजना ये थी रेलवे स्टेशन से सुबह 7 बजे चलने वाली पैसेंजर ट्रेन से अगले स्टेशन अरुणाचल जंक्शन उतर जाउंगा। वहां से अरुणाचल कालीबाड़ी जाउंगा। फिर एक घंटे बाद अरुणाचल जंक्शन से अगरतला पैसेंजर पकड़ लूंगा। ऐसी सलाह हमें सिलचर के होटल अंजलि के मैनेजर बापी ने दी थी। अगरतला पैसेंजर में स्लिपर क्लास में आरक्षण मिल गया है। पर मैं सिलचर रेलवे स्टेशन पर सुबह 6 बजे ही पहुंच गया हूं। सात बजे वाली पैसेंजर के इंतजार के बजाए मैं एक आटोवाले से बात करता हूं कि वह अरुणाचल काली बाड़ी छोड़ दे। वह तैयार हो गया। मुझे लगा कि आटो से जाने पर मैं कालीबाड़ी में ज्यादा समय दे पाऊंगा। ये निर्णय ठीक भी रहा। सुबह सूर्योदय होने के साथ ही मैं कालीबाड़ी पहुंच गया हूं।
अरुणाचल कालीबाड़ी – मां काली का अदभुत रूप देखें
हरे भरे क्षेत्र में , शहर के कोलाहल से दूर एक टीले पर अरुणाचल कालीबाड़ी स्थित है। इस मंदिर की स्थापना आध्यात्मिक संत और मां काली के साधक दयानंद ठाकुर ने की थी। यह सिलचर शहर से 7 किलोमीटर दूर मासिमपुर में स्थित है। मासिमपुर सेना की छावनी भी है। आपको भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। ये असम के कछार क्षेत्र का अरुणाचल है। यह अरुणाचल प्रदेश राज्य नहीं है। मासिमपुर ग्राम में स्थित इस अरुणाचल आश्रम के नाम पर ही यहां के रेलवे स्टेशन का भी नाम अरुणाचल है।
मंदिर में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 70 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। एक सुंदर टीले पर मंदिर स्थित है। चारों तरफ हरियाली का वास है। वास्तव में यह मंदिर न होकर एक आश्रम है।
अरुणाचल आश्रम में मुख्यमंत्री मां काली का है। इसकी स्थापना स्वामी दयानंद ठाकुर ने की थी। मां काली की प्रतिमा अत्यंत सुंदर है। इसका विग्रह काशी से लाया गया था। यहां का नाम मां आनंदमयी दिया गया है।
मंदिर सुबह 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक खुला रहता है। आश्रम वासी विधिपूर्वक रोज मंदिर में पूजा करते हैं। नवरात्रि और प्रमुख त्योहारों के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। आश्रम में मां काली के अलावा शिव जी का भी मंदिर है।
बांग्ला सन 1313 ई ( 14 जनवरी 1909 ) को मकर संक्रांति के दिन अरुणाचल आश्रम की स्थापना की गई। इसी दिन आश्रम का स्थापना दिवस हर साल मनाया जाता है। सिलचर और आसपास के लोगों में इस आश्रम और कालीबाड़ी को लेकर अगाध श्रद्धा है।
ठाकुर दयानंद जी ने अरुणाचल आश्रम के अलावा कई और आश्रमों की स्थापना की। इसमें त्रिपुरा  चुरईबाड़ी में दयानंद धाम , कोलाकाता में पानीहाटी में आश्रम, गुवाहाटी में आश्रम, झारखंड में कविलासपुर, देवघर में लीलामंदिर आश्रम बनाया गया है। लीलामंदिर देवघर आश्रम की स्थापना 1921 में की गई।

बांग्लादेश में उनके दो  आश्रम हैं। इनमें अमृत मंदिर आश्रम, बामोई हबीगंज गौरांग आश्रम, सुईहारी, दीनापुर बांग्लादेश है। ये सभी आश्रम आज भी सुव्वयवस्थित रूप से संचालन में हैं। पर सभी आश्रमों में सबसे पुराना अरुणाचल आश्रम, सिलचर है।
कालीबाड़ी के प्रवेश द्वार के पास छोटा सा बाजार भी है। यहां पूजन सामग्री और प्रसाद की भी दुकाने हैं। यहां पहुंचने के लिए सालों भर मौसम अच्छा रहता है। 
कैसे पहुंचे – सिलचर रेलवे स्टेशन (तारापुर) से 7 किलोमीटर की दूरी पर मासिमपुर में कालीबाड़ी स्थित है। आटो से जा सकते हैं। अरुणाचल जंक्शन रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी एक किलोमीटर है। रेलवे लाइन के साथ चलते हुए मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  
( ARUNCAHAL KALIBARI, DAYANAND THAKUR ) 

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