Tuesday, February 27, 2018

चंफाई न जा पाने का अफसोस और वापसी

मिजोरम यात्रा में मेरी पूरी कोशिश चंफाई जाने की थी। इसके लिए हमने दो दिन सुरक्षित कर रखा था। पर ऐसा हो न सका। वास्तव में 25 दिसंबर से लेकर 3 जनवरी तक हर साल मिजोरम उत्सव मनाता है। इस दौरान पूरी तरह छुट्टियां होती हैं। छुट्टियां मतलब की छुट्टियां। दुकान बाजार बंद। टैक्सी सूमो भी बंद। तो भाई साहब आईजोल से चंफाई की शेयरिंग टैक्सी सेवाएं भी बंद थीं। एक जनवरी को बंद, दो जनवरी को बंद। तो हमने आईजोल और आसपास घूमने के बाद वापस लौटना तय किया। गनीमत है कि आईजोल से सिलचर और करीमगंज के लिए टैक्सी सेवाएं चल रही हैं।
दो जनवरी की सुबह। आईजोल शहर में हल्की बारिश ने और ठंड बढ़ा दी है। मैं जारकोट मिलेनियम सेंटर के आसपास टैक्सी स्टैंड पर जाकर सुबह 5 से 6 बजे के बीच अच्छी तरह पड़ताल कर लेता हूं। कोई टैक्सी चंफाई नहीं जा रही है। राजू ने कहा था कि वह अपनी गाड़ी लेकर चंफाई जाएगा। पर राजू का फोन नहीं लग रहा।

अब मैं सिलचर वापस जाने का तय करता हूं। जारकोट से वापसी के लिए सूमो में सीट बुक करा लेता हूं। खिड़की वाली सीट मिल गई है। अब सूमो के भरने का इंतजार है। टैक्सी स्टैंड में एक मिजो दंपत्ति चाय बना रहे हैं। सर्दी की सुबह में हल्की बारिश के बीच चाय पीने का मजा ही कुछ अलग है। चाय पीते हुए देखता हूं वे पूरियां भी तल रहे हैं। तो 20 रुपये में चार पूरियां और सब्जी के 10 रुपये अलग से। सुबह का हल्का नास्ता हो गया। लो अब सूमो भी भर गई। सुबह सात बजे वापसी का सफर शुरू हो गया।

रास्ता जाना पहचाना है। वही रास्ता जिससे आना हुआ था। पर सुबह की बारिश में बादल पेड़ो से अटखेलियां करते नजर आ रहे हैं। कुछ किलोमीटर चलने के बाद लेंगपुई एयरपोर्ट की ओर जाने का संकेतक नजर आता है। अब आईजोल तक  रेल नेटवर्क का काम चल रहा है। इसके बाद रेल साइरांग तक आ जाएगा। यह आईजोल से 20 किलोमीटर रह जाएगा। वापसी में भी सूमो वाले  सुबह नास्ते के लिए एक ढाबे में रुकते हैं। पर मैं नास्ता कर चुका हूं आईजोल में ही। टैक्सी आगे चल पड़ती है। कोलासिब में कुछ सवारियां उतर गईं। एक मिजो महिला जो अपने तीन बच्चों के साथ थी, उसकी मंजिल यहीं तक थी। सूमो वाले कुछ देर यहां रुकते हैं। नई सवारियों के इंतजार में। पर कोई नहीं आता। हमलोग आगे बढ चले। बादलों के संग संग सफर जारी है। धूप शरमा कर कहीं छिप गई है।
सूमो के ड्राईवर को डीजल चाहिए। पंप पर खत्म है। वे घर के आगे रुकते हैं। वह बड़े गैलन में डीजल लेकर आता है। एक पाईप के सहारे सूमो में डीजल भरा गया। खुराक मिलने पर गाड़ी आगे बढ़ी। सड़क पर कुछ मिजो महिलाएं और बच्चे टहलते नजर आ रहे हैं। मैं उन्हें अलविदा कहता हूं। हम एक बार फिर असम के कछार में प्रवेश कर गए हैं।अब धूप निकल आई है। दोपहर हो गई है और हमारी सूमो सोनाई रोड पर दौड़ रही है। सिलचर के मिजोरम हाउस पहुंचने पर सूमो का सफर शेष हो गया। पर मेरा सफर...सफर तो अभी जारी है। फिलहाल अलविदा मिजोरम।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(MIZORAM, RETURN, AIZAWL) 

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