Wednesday, February 14, 2018

आईजोल में असम राइफल्स – समोसा और मिठाई

आईजोल की सुबह - होटल की खिड़की से 
एक जनवरी की सुबह। आईजोल में हल्की गुनगुनी सर्दी है। मैं सड़क पर सुबह सुबह टहलने निकल पड़ा हूं। मिलेनियम सेंटर पार करके गवर्नमेंट हास्पीटल वाली रोड पर आगे बढ़ता हूं। थोड़ा चलने पर असम राइफल्स का कैंप आ गया। असम राइफल्स मतलब देश की सबसे पुरानी पारा मिलिट्री फोर्स का शिविर। पूर्वोत्तर के हर राज्य में इनका शिविर है।  
आईजोल में यही एक जगह है जहां पर समोसा मिल सकता है। दरअसल आईजोल शहर के बीचों बीच यह असम राइफल्स का शिविर क्षेत्र है। यहां पर बटालियन का दफ्तर, स्टेडियम, मंदिर और कैंटीन आदि है। कैंटीन में एक बड़ी दुकान है, जहां दैनिक जरूरत की सारी चीजें मिल जाती है। दुकान सुबह सुबह खुल जाती है। इसी परिसर में एक एक चाय नास्ते की दुकान भी है। वैसे तो यह असम राइफल्स के अधीन है, पर यहां कोई आम नागरिक भी आकर खा पी सकता है। मैं सुबह-सुबह दो समोसे आर्डर करता हूं। एक समोसा 10 रुपये का। अगर सब्जी लेना चाहें तो 10 रुपये की अलग से है। कैंटीन में कुछ मिठाइयां भी हैं। रसगुल्ला और कलाकंद आदि। मैं एक गुलाब जामुन भी मांग लेता हूं। इस तरह 40 रुपये में नास्ता हो गया सुबह का।

असम राइफल्स की कैंटीन में समोसा 
आईजोल इस मामले में नगालैंड की राजधानी कोहिमा से बेहतर है जहां कुछ शाकाहारी खाने पीने को मिल जाता है। आगे बढ़ता हूं। सामने असम राइफल्स का मंदिर है। मंदिर के अंदर से ढोल मजीरे की आवाज आ रही है। मंदिर में कीर्तन चल रहा है। वह भी भोजपुरी में। मैं अंदर जाने की इच्छा जताता हूं पर मंदिर के प्रवेश द्वार पर तैनात असम राइफल्स के जवान कहते हैं एक घंटे बाद आइएगा। अभी पूजा चल रही है। कीर्तन की मधुर आवाज कानों में घुल रही है। पर मैं आगे बढ़ जाता हूं। असम राइफल्स का वार मेमोरियल नजर आता है। उसके आगे विशाल स्टेडियम भी है। असम राइफल्स के बटालियन मुख्यालय का दफ्तर आ जाता है। उसके सामने बापू की एक प्रतिमा भी नजर आती है। यहीं आईजोल के स्टेट बैंक की मुख्य शाखा भी नजर आती है।


कुछ बातें मिजोरम के बारे में - मिजो शब्द की उत्पत्ति के बारे में ठीक से मालूम नहीं है। पर 19वीं शताब्दी में इस क्षेत्र में ब्रिटिश मिशनरियों का प्रभाव फैल गया। इसका परिणाम हुआ कि इस समय तो अधिकांश मिजो लोग ईसाई धर्म को ही मानते हैं। पर मिजोरम के इसाई कैथोलिक बहुत कम हैं। यहां पर प्रेसबिटिरियन चर्च का बोलबाला है।

साक्षरता में आगे - मिजो भाषा की अपनी कोई लिपि नहीं है। इसाई मिशनरियों ने मिजो भाषा और औपचारिक शिक्षा के लिए रोमन लिपि को अपनाया। मिजोरम में शिक्षा की दर तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में यह 88.8 प्रतिशत हैजो कि पूरे देश में दूसरे स्थान पर है।
वैसे मिजो लोग मूलतः किसान होते हैं। अतः उनकी तमाम गतिविधियां तथा त्योहार भी जंगल की कटाई करके की जाने वाली झूम खेती से ही जुड़े हैं। मिजो लोग बेहतरीन बुनकर होते हैं। इसलिए यहां की यात्रा के दौरान यहां की महिलाओं द्वारा हाथ के बुने कपड़े खरीद सकते हैं।

फुटबाल में भी मिजोरम आगे – आईजोल की सड़कों पर मुझे आईजोल फुटबाल क्लब का बड़ा बोर्ड नजर आता है। पता चला कि मिजोरम फुटबाल खेलने में आगे है। साल 2017 में मिजोरम की फुटबाल टीम ने कमाल किया। संतोष ट्राफी पर कब्जा जमाने के बाद 25 अप्रैल 2017 को मिजोरम के मुख्यमंत्री ललथन हवला ने कहाआज के दौर में फुटबाल मिजोरम के लड़कों के लिए प्राथमिकता है। मेरी टीम ने संतोष ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।  मैं बेहद खुश हूं।  मुझे अपनी टीम पर गर्व है। मैं इसके लिए आइजोल फुटबाल क्लब के मालिस रोबर्ट रोमाविया रोयटे को भी श्रेय देता हूं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
(AIZAWL, ASSAM RIFLES, TEMPLE )  



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