Monday, February 5, 2018

जयनगर का मोआ – सर्दियों की लोकप्रिय मिठाई

कोलकाता की सड़कों पर घूमते हुए इस बार एक नई मिठाई के दर्शन हुए। अब देखा तो खाया भी। खाया तो ऐसा स्वाद भाया कि बार बार खाने की इच्छा हुई। यह मिठाई है जयनगर का मोआ। मोआ मतलब क्या। यह ऐसी मिठाई है जो सालों भर नहीं मिलती।
धान का लावा जिसे बांग्ला में खोई कहते हैं, और खजूर के गुड़ से तैयार होती है ये मिठाई। वैसे तो कई जगह बनती है पर दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर शहर की मोआ मिठाई प्रसिद्ध है। धान के लावा को बांगला में कनकचूर खोई कहते हैं। मोआ ऐसी मिठाई है जो सिर्फ दिसंबर और जनवरी में ही मिलता है, जब नए धान की फसल बाजार में आती है। यह सर्दियों की लोकप्रिय मिठाई है। स्वाद का तो क्या कहना। हल्की मिठाई मुंह में रखते ही घुल जाती है। वास्तव में मोआ सिर्फ दूध से बनने वाली मिठाई नहीं है। यह धान यानी चावल और दुग्ध पदार्थ का अनूठा मेल है।
जयनगर के मोआ के निर्माण में गाय के घी का इस्तेमाल होता है। कई बार में इसमें पोस्ता दाना, इलाइची, किसमिस और काजू का भी इस्तेमाल होता है। अपनी अनूठी निर्माण प्रक्रिया और स्वाद के कारण इस मिठाई को 2015 में ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीई ) भी प्राप्त हो चुका है।

अगर आप सर्दियों में कोलकाता के आसपास हैं तो जयनगर के मोआ की तलाश जरूर करें। वास्तव में खजूर का गुड़ और धान के लावा की नई फसल सर्दियों में ही आती है इसलिए इस मिठाई का निर्माण सर्दी के दिनों में ही होता है। जयनगर शहर और आसपास में 250 से ज्यादा दुकानें हैं जहां पर आपको मोआ खाने को मिल जाएगा। इसे आप कोलकाता शहर के विभिन्न इलाकों में भी मिठाई की दुकानों पर प्राप्त कर सकते हैं। जय नगर मोआ निर्माणकारी सोसाइटी के प्रयासों से मोआ को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन मिल गया है। तो खीर कदम, संदेश, रसगुल्ला से आगे बढ़कर अब मोआ की बात भी खास बंगाली मिठाई के तौर पर की जा रही है। एक मोआ 7 से 10 रुपये प्रति पीस मिलता है। इसे आप किलो के भाव से भी खरीद सकते हैं। कोलकाता प्रेसक्लब में लगे बाजार में जयनगर से आए लोक मिल गए जो अपने यहां से मोआ लेकर आए थे।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(MOA, JAINAGAR, BENGAL, SWEETS ) 

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