Friday, January 19, 2018

दुनिया भर के सैलानियों को बुलाता है केरल का आयुर्वेद

जब आप केरल के अलग अलग शहरों में घूमते हैं तो आपको केरला आयुर्वेद के साइन बोर्ड नजर आते हैं। मुन्नार में भी आप आयुर्वेदिक स्पा, मसाज थेरेपी आदि का लाभ उठा सकते हैं। खास तौर पर रिजार्ट और लग्जरी होटलों में ये सुविधा उपलब्ध है। आपको पता है कि केरल में आने वाले विदेशी सैलानियों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग होते हैं जो केरल में आकर आयुर्वेदिक स्पा, पंचकर्म चिकित्सा, हिलिंग आदि कराते हैं। आयुर्वेद का केरल में पर्यटन कोई नई ऊंचाई तक पहुंचाने में बड़ा योगदान है। कोच्चि के आसपास और मुन्नार में कई बड़े होटल और रिजार्ट में आयुर्वेदिक चिकित्सा और पंचकर्म की सेवाएं प्राप्त की जा सकती हैं। आज केरल भारत का एकमात्र राज्य है जहां पूर्ण समर्पण के साथ आयुर्वेद की सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

यहां आकर आप मसाज थेरेपी, कंबिनेसन थेरेपी, पंचकर्म, मौसमी पैकेज आदि से खुद को तरोताजा रख सकते हैं। कई रिसार्ट अपने यहां रहने के साथ थेरेपी का पैकेज प्रदान करते हैं। ये पैकेज पांच सितारा दरों पर उपलब्ध होती हैं। मुन्नार के क्षेत्र में तमाम रिजार्ट ऐसे पैकेज के बड़ी कमाई कर रहे हैं। आप मुन्नार के अलावा वायनाड, कोट्टायम, थ्रिशूर, थिरुवनंतपुरम, अलपुजा आदि जिलों में कई रिजार्ट में इस तरह के पैकेज का आनंद लेकर सेहत संवार सकते हैं। इन रिजार्ट का आर्गेनिक वातावरण मन मोह लेता है। ज्यादातर रिजार्ट आर्गेनिक उत्पादों से बना शाकाहारी आहार प्रवास के दौरान परोसते हैं।

चिकित्सा के लिए मानसून बेहतरीन समय – आयुर्वेद के पारंपरिक ग्रंथों से पता चलता है कि कायाकल्प कार्यक्रमों के लिए मानसून का मौसम सबसे अच्छा रहता है। इस दौरान वातावरण धूल रहित और शीतल रहता है। शरीर के रोम-छिद्र अधिकतम खुले होते हैं जो हर्बल तेल और उपचार के लिए शरीर को अनुकूल बनाते हैं।

आयुर्वेद की प्राचीन भूमि है केरल - वास्तव में केरल आयुर्वेद की अति प्राचीन भूमि है। राज्य की सम जलवायुजड़ी-बूटी और औषधीय पौधों से भरपूर जंगलों की प्राकृतिक प्रचुरता और ठंडा मौसम ( जून जुलाई और अक्तूबर नवम्बर) आयुर्वेद के आरोग्य प्रदान करने वाले और स्वास्थ्यकर औषधि पैकेज के लिए बेहतरीन है।

अगर भारत में आयुर्वेद के विकास की बात करें तो यह 600 ईस्वी पूर्व के आसपास माना जाता है। चिकित्सा की यह पद्धति शारीरिक विकारों की चिकित्सा के साथ-साथ उनसे बचने के उपायों पर बल देती है। देश में द्रविडों और आर्यों के समय से ही आयुर्वेद की चिकित्सा होती रही है। आजयह चिकित्सा की अनूठी शाखा है जो देश के बाहर भी लोकप्रिय हो रही है। आयुर्वेद केवल प्रभावित अंगों के उपचार में ही विश्वास नहीं करता बल्कि किसी व्यक्ति की संपूर्ण चिकित्सा करता है। यह आपको प्राकृतिक रूप से तरो-ताजा करता है। साथ ही शरीर के सारे विषैले असंतुलनों को दूर करता है और इससे व्यक्ति को शरीर में प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने का मौका मिलता है।

फिल्म स्टार अक्षय कुमार हाल के दिनों में केरल में अपनी थकावट मिटा कर आए है। अक्षय ने थकान दूर करने के लिए कोई स्‍पा सेंटर नहीं बल्कि एक आयुर्वेदिक सेंटर चुनाजहां अक्षय हर तरह की नई तकनीक से दूर रहे। यहां तक की इस सेंटर में अक्षय कुमार के पास उनका फोन और सोशल मीडिया भी नहीं था।

फिल्म स्टार और राजनेता भी तरोताजा होने आते हैं - केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन भी समय समय पर आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ लेकर खुद को तरोताजा रखने में यकीन रखते हैं। यही कारण है कि 90 साल से ज्यादा के उम्र में भी वे 2016 के विधान सभा चुनाव में पूरी ऊर्जा से सक्रिय दिखाई दिए। कांग्रेस के नेता और पूर्व रक्षा मंत्री मंत्री ए. के. एंटनी जब केरल में 2001-2004 तक मुख्यमंत्री थेतब वह भी मानसून के मौसम में अपना आयुर्वेदिक उपचार कराया करते थे। आपको पता होगा कि आयुर्वेद अर्थराइटिस,  स्पांडिलाइटिस,  माइग्रेन,  लकवासिरदर्द,  गैस,  कब्ज,  सांस के रोग सहित अन्य बीमारियों में काफी लाभ पहुंचाता है।

केरल में कोट्टकल आर्य वैद्यशाला 

कोट्टकल आर्य वैद्यशाला - केरल आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र सिर्फ राज्य में भी नहीं बल्कि राज्य से बाहर भी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। केरल का प्रसिद्ध आयुर्वेदिक संस्थान 'कोट्टकल आर्य वैद्यशाला'  की शाखाएं केरल के बाहर कई राज्यों में फैल चुकी है। दिल्ली में पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा में इसका विशाल अस्पताल हमने देखा है, जहां बड़ी ईमानदारी के साथ मरीजों की चिकित्सा की जाती है। आर्य वैद्यशाला की स्थापना वैद्यराज पी एस वारियार ने 1902 में की थी। गांव में क्लिनिक के तौर पर शुरु हुआ ये केंद्र आज कई बड़े अस्पताल, डिस्पेंसरी चलाने के साथ अपनी दवाओं के निर्माण भी खुद ही करता है। अपनी तीन इकाइयों में यह 550 से ज्यादा दवाओं का निर्माण भी करता है।

 आयुर्वेद का मक्का

24 से 28 डिग्री रहता है केरल का तापमान जो सुरम्य है आयुर्वेद का मक्का

12,000 आयुर्वेदिक डाक्टर केरल में चिकित्सा में लगे हैं

900 से ज्यादा जड़ी बूटियां और औषधीय पौधे पाए जाते हैं केरल में

700 औषधीय पौधे पाए जाते है अगस्त्यकूदम पहाड़ी पर

100 सरकारी आयुर्वेदिक हास्पीटल हैं राज्य में जिसमें 2700 बिस्तर उपलब्ध हैं

800 पंजीकृत आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली इकाइयां हैं राज्य में

1889 में देश का पहला आयुर्वेदिक कॉलेज केरल में आरंभ हुआ

38 से अधिक केरल टूरिज्म से मान्यता प्राप्त आयुर्वेदिक रिजार्ट हैं राज्य में


-         vidyutp@gmail.com

( KERALA AYURVEDA, WELLNESS, MONSOON,  KOTTAKKAL ARYA VAIDYA SALA )

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