Thursday, January 18, 2018

मुन्नार – चित्रापुरम के चाय के बगान

मुन्नार के लिए ऑनलाइन होटल की तलाश करते हुए मैंने ये देखा था कि चित्रापुरम इलाके में काफी होटल दिखाई दे रहे हैं। हालांकि मैंने वहां होटल बुक नहीं किया, पर मुन्नार में रहते हुए चित्रापुरम जाने की इच्छा हुई। दरअसल चित्रापुरम मुन्नार से इडुकी और अलेप्पी जाने वाली सड़क पर एक गांव है।

मुन्नार से 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव में कुछ महंगे होटल और कुछ सस्ते गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। यह इलाका शहर के कोलाहल से दूर हरे भरे चाय के बगानों के बीच बसा है। खाने पीने के सीमित विकल्प हैं। पर उन लोगों के लिए अच्छा है तो अपनी कुछ दिनों की छुट्टियां प्रदूषण से दूर, शहर के चिल्लपों से दूर किसी गांव में गुजारना चाहते हैं। चित्रापुरम में रहते हुए आपको आसपास में घूमने के लिए होटल द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले टैक्सियों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

मैं सुबह सुबह जगकर टहलने निकलता हूं। मुन्नार बाजार के बस स्टैंड से अलेप्पी जाने वली बस में बैठ जाता हूं। कंडक्टर से चित्रापुरम की टिकट ले लिया। बस में मेरे अगल बगल में बिहार के दो युवा इंजीनियर बैठे हैं जो मुन्नार घूमने के बाद अब अपने पिता के साथ अलेप्पी जा रहे हैं। मुन्नार को छोड़ते हुए वे बस में वीडियो बना रहे हैं। दोस्तों के संग वीडियो लाइव करने  जुटे हैं। बस हरे भरे चाय बगान  के बीचों बीच बनी सड़क पर आगे बढ़ रही है। अचानक कंडक्टर महोदय बताते हैं चित्रापुरम आ गया। मैं उतर जाता हूं,पर सुबह के कुहरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा। सामने एक बिल्डिंग जाता हूं। यह चर्च है। यहां पर रविवार की सर्विस में हिस्सा लेने लोग पहुंच रहे हैं। मैं गॉड को नमन कर आगे बढ़ जाता हूं। सड़क पर कुछ दूर चलने पर कुछ गेस्ट हाउस और होटल दिखाई देते हैं। आगे एक तिराहा आया। यहां पर चित्रापुरम पावर हाउस तीन किलोमीटर का बोर्ड लगा हुआ दिखाई देता है। मैं रास्ता बदलकर उसी तरफ चल पडता हूं। एक विशाल रिजार्ट दिखाई देता है। वहां से आगे बढ़ने पर चाय विशाल बगान।

चित्रापुरम के यह बगान भी टाटा टी की ही संपदा है। मैं चाय के बगानों में घुस जाता हूं। हल्की हल्की बारिश शुरू हो चुकी है। पर मैं बेपरवाह चाय के बगानों में टहल रहा हूं। यहां टी एस्टेट के अंदर भी एक लग्जरी होटल दिखाई देता है। कई सैलानी ऐसे हैं जो टी एस्टेट के अंदर बने होटल में निवास करना चाहते हैं।

अगर आप चाय की खेती में गहराई से जाएं तो पता चलता है कि इसमें भी कई तरह की उत्पाद निकलते हैं। पर चाय की फसल को बार बार नहीं लगाना पड़ता।एक बार बाग लगा दिया तो यह 100 से 150 साल तक चाय देता रहता है। बस करीने से इसकी पत्तियों को तोड़ना पड़ता है। मुन्नार में जगह जगह हमें महिलाएं चाय की पत्तियां तोड़ती हुई नजर आती हैं।

थोड़ी देर बाद वापस लौटने की सोचता हूं। मुख्य सड़क पर आकर एक रेस्टोरेंट में चाय की एक प्याली पीने की इच्छा जताता हूं।भला चाय के बगानों से लौटकर जो आया हूं तो एक प्याली चाय क्यों पी ली जाए। हल्की बारिश में भींग चुका हूं तो चाय और भी अच्छी लगती है। फिर मुन्नार बाजार वापस जाने के लिए बस मिल जाती है।


-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(MUNNAR, CHITRAPURAM, TEA ESTATE, TATA TEA ) 

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