Tuesday, December 26, 2017

काजू और कॉफी का शहर मंगलुर

कर्नाटक का मंगलुरु शहर। एक सुंदर आबोहवा वाला समुद्र तटीय शहर। एक प्राचीन शहर है जो वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। मंगलुरु का रेलवे स्टेशन भी काफी व्यवस्थित है। मंगलुरु सेंट्रल स्टेशन का कोड है MAQ यहां से केरल, बेंगलुर, चेन्नई आदि शहरों के लिए सीधी ट्रेनें चलती हैं। मंगलुरु सेंट्रल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर एक माइलस्टोन लगा है जिस पर लिखा है चेन्नई 550 मील। मंगलुरु सेंट्रल रेलवे स्टेशन का पुराना नाम कनकनाडी हुआ करता था।
हमलोग प्लेटफार्म नंबर दो से एक पर आ गए हैं। क्लाक रुम की तलाश कर अपने दो बैग वहां जमा करा देते हैं। आजकल दरें है 15 रुपये प्रति बैग। हमलोग तैयार हैं कुछ घंटे शहर में घूमने के लिए। पर पहले थोड़ी पेटपूजा। प्लेटफार्म नंबर एक पर आईआरसीटीसी द्वारा संचालित शाकाहारी और मांसाहारी रेस्टोरेंट है। यहां लगातार खाने पीने वालों की भीड़ नजर आ रही है। डोसा, इडली, बड़ा आदि हमलोग खाते हैं। दरें काफी वाजिब हैं। 

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से मंगलुरु की दूरी 350 किलोमीटर है। रेल के अलावा दोनों शहर शानदार सड़क मार्ग से भी जुड़े हैं। साल 2011 की जनगणना में मंगलुरु की आबादी 6.23 लाख थी।1947 से पहले तक मंगलुरु मद्रास प्रेसिडेंसी का हिस्सा था। पर 1956 में इसे मैसूर राज्य से जोड़ा गया जो बाद में कर्नाटक हो गया। आजकल यह दक्षिण कन्नडा जिले का मुख्यालय है। मंगलुरु का ये नाम शहर में स्थित मंगलादेवी के मंदिर के नाम से मिला है। आप मंगलुरु में सुंदर समुद्र तट के अलावा मंजूनाथ स्वामी यानी शिव का मंदिर देख सकते हैं। शहर में कई सुंदर चर्च भी हैं, जिनमें सेंट पॉल चर्च प्रमुख है। और हां मंगलुरु आए हैं तो गड़बड़ आइसक्रीम खाए बिना आगे न बढ़ें।

मंगलुरु काजू और कॉफी की तिजारत के लिए जाना जाता है। यह तटीय शहर काजू प्रोसेसिंग का बड़ा केंद्र है। देश से काजू और कॉफी के निर्यात में 75 फीसदी हिस्सेदारी मंगलुरु की रहती है। मंगलुरु बड़ा बंदरगाह शहर भी है। यहां से लक्षद्वीप के लिए भी जहाज चलते हैं। मंगलुरु हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री ऐश्वर्या राय का भी शहर है। मौसम के लिहाज से मंगलुरु सालों भर सदाबहार रहता है। अधिकतम तापमान 38 तक जाता है तो न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जाता।
प्रीपेड आटोरिक्शा का अनुशासन -
हमलोग रेलवे स्टेशन से बाहर निकल गए हैं। मंजूनाथ स्वामी मंदिर जाना है। लोगों ने बताया था प्रीपेड आटो ले लिजिए। लाइन में लगकर प्रीपेड आटो का टोकन लिया। किराया है 59 रुपये। काउंटर वाले भाई का शुल्क 2 रुपये। मंगलुरु स्टेशन से आपके कहीं भी जाना हो प्रीपेड आटो ही लेना होगा। कोई भी आटोवाला सीधे सवारी बिठा ही नहीं सकता। कहीं कोई अराजकता नहीं। कोई ठगी नहीं।
यात्री और आटोरिक्शा सब कुछ नंबर से और नियमबद्धता से। यह सब कुछ मंगलुरु में हो सकता है तो दिल्ली में क्यों नहीं। हो सकता है सरकार में इच्छाशक्ति चाहिए। जब मंजूनाथ स्वामी मंदिर पहुंचकर हमारी यात्रा खत्म हुई तो हमने आटो वाले को 60 रुपये दिए तो उसने एक रुपये वापस कर दिए। इतनी इमानदारी दिल्ली के आटोवालों में हो सकती है क्या। वापसी में भी मंदिर से हर जगह के लिए आटो मिल रहे थे। यहां कोई प्रीपेड काउंटर नहीं है। पर चार आटोवाले लाइन में लगे हैं। नंबर आने पर ही सवारी बिठा रहे हैं। सवारी ने जहां कहा वहां चलने को तैयार। इधर उधर जाने को लेकर कोई ना नुकुर नहीं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(MANGLURU CENTRAL, RAIL, KARNATKA ) 


1 comment:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन स्वतंत्रता सेनानी - ऊधम सिंह और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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