Saturday, December 16, 2017

कारवार से गोकर्ण वाया अंकोला बस से

कर्नाटक के शहर कारवार बस स्टैंड से हमने अगली बस ली है अंकोला के लिए। यह कर्नाटक रोडवेज की बस है। गोकर्ण पहुंचने का एक तरीका है कोंकण रेल से गोकर्ण रोड रेलवे स्टेशन उतरें, वहां से गोकर्ण के लिए आटो रिक्शा लें। रेलवे स्टेशन से गोकर्ण बाजार 8 किलोमीटर है।

अगर सड़क मार्ग से जा रहे हैं तो कुमटा से गोकर्ण के लिए सीधी बसें हैं, या फिर अंकोला से। कुमटा से गोकर्ण के लिए हर आधे घंटे पर बस है। इसलिए सुगम यह है रेल से भी जाना हो तो कुमटा उतर कर बस ली जाए।

कारवार से अंकोला की दूरी 35 किलोमीटर है। बस सह्याद्रि की पर्वतमाला को काटकर बनाई गई सड़क से गुजर रही है। एक तरफ समंदर है तो दूसरे तरफ पहाड़। कारवार शहर के बाहर कई किलोमीटर तक नौ सेना का इलाका साथ चलता रहा। हरे भरे धान के खेत, नारियल के पेड़, केले के पेड़ दिखाई दे रहे हैं। एक घंटे बाद हमलोग अंकोला शहर में पहुंच गए हैं। अंकोला उत्तर कन्नडा जिले का एक तालुका है। यह आम और काजू के लिए प्रसिद्ध है। 13 अप्रैल 1930 को एमपी नादकर्णी की अगुवाई में 40 हजार लोगों ने अंकोला मे गांधी जी के आह्वान पर नमक कानून तोड़ा था।
कारवार में ट्रक पर जा रहा रेलवे का लोकोमोटिव (इंजन ) 


संयोग से हम कारवार से अंकोला के लिए जिस बस में सवार हुए हैं वह कुमटा तक जाने वाली है। सहयात्रियों की सलाह पर हमने इसमें मदनगिरी तक का टिकट ले लिया है। लोगों ने बताया आप मदनगिरी पेट्रोल पंप के स्टाप पर उतर जाएं। वहां से कुमटा से गोकर्ण आने वाली बस मिल जाएगी। इससे आप जल्दी गोकर्ण पहुंच जाएंगे. वहीं आपको अंकोला से गोकर्ण वाली बस का इंतजार देर तक करना पड़ सकता है। अगर कोई बस अंकोला से चलेगी तो वह भी मदनगिरी पेट्रोल पंप के मोड़ से ही गोकर्ण के लिए मुड़ेगी।

अंकोला के बाद एनएच 66 पर पहाड़ों  काटते हुए सुंदर रास्ते पर हम चल रहे हैं। गंगावली नदी के पुल के बाद अचानक मदनगिरी में भारत पेट्रोलियम का पेट्रोल पंप आ जाता है। हमलोग चौकन्ने थे, उतर गए बस से। यहां तो बायीं तरफ एक पेट्रोल पंप है। दाहिनी तरफ एक ग्रामीण सड़क दिखाई दे रही है। तिराहे पर एक छोटी सी दुकान है। कोई पथ संकेतक बोर्ड नहीं लगा है गोकर्ण के लिए। पर दुकानदार ने बताया कि यहीं पर बस आएगी। तो हमलोग भी उनकी बात मानकर बस का इंतजार करने लगे। इसी इंतजार के दौरान हमलोग दुकानदार भाई से थोडी बातें करते हैं।
मदनगिरी मोड पर गोकर्ण के लिे बस का इंतजार। 
हमलोग दुकान से केले खरीदकर भी खा लेते हैं। थोड़े इंतजार के बाद कर्नाटक रोडवेज की कुमटा से चली बस आती है। हमलोग फटाफट बस में बैठ जाते हैं। बस में महिला कंडक्टर हैं। हम उनसे तीन टिकट खरीदते हैं। बस आधी खाली है, सो आराम से सीट मिल गई। मदनगिरी मोड़ से गोकर्ण 9 किलोमीटर है। 15 मिनट बाद हमलोग गोकर्ण के बस स्टैंड में हैं।

मांजागुनी से फेरी का रास्ता - हमें रास्ते में एक सज्जन ने बताया था कि आप अंकोला से मांजागुनी की बस लें। वहां से फेरी से गंगावाली नदी पार करके गोकर्ण पहुंच सकते हैं। इस मार्ग से दूरी 15 किलोमीटर है। जबकि मदनगिरी मार्ग से 26 किलोमीटर। पर हमें मांजागुनी मार्ग अनजाना लगा और बसों का बारंबारता का भी पता नहीं था इसलिए इस मार्ग को नहीं चुना। पर बाद में गूगल मैप देखकर लगा कि मांजागुनी मार्ग भी रोमांचक हो सकता था।

ऐसा रहा सफर – कोलवा से मडगांव – 6 किमी, मडगांव से कारवार – 72 किमी, कारवार से अंकोला 35 किमी, कारवार से मदनगिरी 17 किमी, मदनगिरी से गोकर्ण 9 किमी – कुल – 139 किमी।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य

( KARWAR, ANKOLA, MADANGIRI, GOKARNA, GANGAVALI RIVER ) 
गोकर्ण से पहले गंगावली नदी का विस्तार। 

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