Tuesday, November 14, 2017

ओल्ड गोवा के ऐतिहासिक चर्चों की ओर

ओल्ड गोवा, पोंडा, बेलगावी की ओर जाता हाईवे...
हमलोग ओल्ड गोवा की ओर चल पड़े हैं। यहां गोवा की पुरानी ऐतिहासिक विरासत के दर्शन होंगे। राजधानी पणजी से ओल्ड गोवा की दूरी 12 किलोमीटर है। यह पोंडा, बेलगाम , हुबली (कर्नाटक) की ओर जा रहे नेशनल हाईवे नंबर 4 ए पर है। यह सड़क बहुत अच्छी बनी है। इस पर कई जगह सर्विस रोड भी है। हमारी एक्टिवा तेज गति से रास्ता नाप रही है। हम ओल्ड गोवा पहुंच चुके हैं। चौराहे पर गांधी जी की प्रतिमा नजर आती है। बापू एक बच्चे को दुलार करते हुए नजर आ रहे हैं। गांधी सर्किल से बायीं तरफ मुड़ने पर हम ओल्ड गोवा के पुराने चर्चों को देखेंगे। वैसे आप ओल्ड गोवा पणजी से चलने वाली नियमित बसों से भी पहुंच सकते हैं।
ओल्ड गोवा का गांधी सर्किल। यहां भी हैं बापू...
ओल्ड गोवा का नाम वेल्हा भी है। ओल्ड गोवा भी काफी समय तक गोवा की राजधानी रह चुका है। कदंबा राजतंत्र के शासन में 1050 से 1080 के बीच जयकेशी से शासन काल में राजधानी चंद्रपुर से स्थानांतरित होकर वेल्हा (ओल्ड गोवा ) में आ गई। इसका नाम गोवापुरी रखा गया। यह तब बड़े व्यापारिक शहर के तौर पर विकसित हुआ। कदंबा शासन काल में समुद्री व्यापार ने भी नई ऊंचाइयों को छुआ। कदंबा शासन काल के लोप होने के बाद गोवा देवगिरी के यादवों के शासन में आ गया। देवगिरी के यादव राजा रामचंद्र (1271) के शासन काल में गोवा में कई मंदिरों का भी निर्माण हुआ। इनमें तंबदी सुरला का महादेव मंदिर प्रमुख है। गोवा ने चंदोर पर मुहम्मद बिन तुगलक का आक्रमण भी देखा।


चौदहवीं सदी में गोवा विजय नगर सम्राज्य का हिस्सा बन गया। विजय नगर राजा यहां से अरबी घोड़ों की तिजारत करते थे। 1469 में गोवा गुलबर्ग के बहमनी सल्तनत का हिस्सा बना। 1488 में गोवा बीजापुर के अदिलशाही सल्तनत का हिस्सा बन गया। इस दौरान ओल्ड गोवा का वेल्हा बहुत ही प्रमुख शहर बन गया था। यह बीजापुर के बाद दूसरी राजधानी के तौर पर जाना जाता था।  1498 में वास्कोडिगामा के कालीकट आने के बाद पुर्तगालियों ने कोचीन में अपना व्यापारिक केंद्र बनाया।

1510 में पुर्तगाली अफांसो डे अलबुबर्क ने ओल्ड गोवा को आदिलशाही सल्तनत से अपने कब्जे में लिया। इस तरह से ओल्ड गोवा में पुर्तगाली कब्जे की शुरुआत हुई। हालांकि शिवाजी और संभाजी की पुर्तगालियों से लड़ाई हुई, पर आगे गोवा, दमन, दीव और दादरा नगर हवेली जैसे समुद्र तटीय इलाकों पर पुर्तगालियों का कब्जा बढ़ता गया। ये क्षेत्र ब्रिटेन से भारत की आजादी के बाद जाकर स्वतंत्र भारत का हिस्सा बन सके।

हम अब ओल्ड गोवा के एक विश्व विरासत स्मारक के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे हैं। बॉम जीसस महागिरजाघर या बॉम जीसस बेसेलिका को यूनेस्को ने विश्व विरासत की सूची में शामिल किया है। साल 1986 में चर्चेज एंड कानवेंट्स ऑफ गोवा को विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया। इन चर्च में बॉम बेसेलिका प्रमुख है।

गोवा के ज्यादातर चर्च पुर्तगालियों द्वारा निर्मित हैं। आज पूरे गोवा की आबादी में 35 फीसदी क्रिस्चियन लोग हैं। पुर्तगालियों के आगमन के बाद गोवा में बड़ी संख्या में चर्चों का निर्माण हुआ। अब ये चर्च भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन चुके हैं। ओल्ड गोवा के ये चर्च लोगों के दर्शन के लिए सुबह 8.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक खुले रहते हैं। इनमें प्रवेश का कोई टिकट नहीं है।
हालांकि संग्रहालय सुबह 10 से 5 बजे तक खुला रहता है। इसमें प्रवेश के लिए 15 रुपये का टिकट है। संग्रहालय के अंदर फोटोग्राफी वर्जित है। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(OLD GOA, GANDHI CIRCLE, CHURCH ) 



आगे पढ़िए- ओल्ड गोवा की विश्व विरासत बॉम बेसेलिका के बारे में..

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