Friday, November 10, 2017

गोवा का मतलब है मछली... और क्या...

मैं और अनादि अगोडा फोर्ट से नीचे उतर रहे हैं। सामने मंडोवी नदी के तट पर सुबह सुबह जाल फेंकते मछुआरे नजर आते हैं। हमलोग रुक जाते हैं। दर्जनों मछुआरो को मछली पकड़ते हुए देखना अच्छा लगता है। कुछ देर तक हमलोग उनका श्रम देखते हैं। वास्तव में मछली पकड़ना चाहे नदी में हो या समंदर में एक बड़ा ही श्रम साध्य कार्य है। सूरज उगने से पहले ही मछुआरों की टीम मछली पकड़ने के लिए पूरी तैयारी से निकल पड़ती है। इनके साथ होती है एक नाव और महाजाल।

जाल फेंकने के बाद काफी देर तक टोह लेने का काम चलता है। इसके बाद जाल को खींचा जाता है। जब जाल किनारे आता है तो  इसमें फंस जाती हैं काफी मछलियां। पर इन मछलियों के साथ इसमें कई और जलीय जीव भी आ जाते हैं। ये जलीय जीव कई बार जहरीले भी होते हैं। मछुआरों के जाल में कई बार सांप भी आ जाते हैं। मछलियों की पहचान रखने वाले मछुआरे मछलियों को अलग करते हैं। फिर जलीय जीवों को वापस समंदर में फेंकने जाते हैं। यह सब कुछ मछुआरों के लिए रोज का रुटीन बन गया है।

मंडोवी नदी के अलावा मुझे दक्षिण गोवा के कोलवा बीच पर भी मछुआरे बड़े मनोयोग से मछली पकड़ने में लगे हुए दिखाई देते हैं। जब मछलियां पकड़ने का काम पूरा हो जाता है तब वे अपनी नाव को किनारे लगा देते हैं। फिर मछलियों का बंटवारा कर चल पड़ते हैं घर की ओर।

गोवा देश में शीर्ष समुद्र तटीय पर्यटन स्थलों में से एक है। राज्य के भारतीय-पुर्तगाली भोजन, विशेष रूप से समुद्री भोजन यहां आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। खास तौर पर यहां आने वाले लोग गोवान फिश करी खाना पसंद करते हैं। इसे यहां खास तौर पर येलो मस्टर्ड बेस पर तैयार किया जाता है।
मछली उत्पादन में कमी आई -

गोवा को भले ही मछली के लिए जाना जाता हो पर हाल के सालों में यहां मछली उत्पादन में कमी आई है। समुद्री मछली के उत्पादन में जुलाई 2015 से जून 2016 के दौरान कमी देखने को मिली है। इस कमी का मुख्य कारण सार्डिन मछली के पकड़ने में आई कमी है।

मछली पालन मंत्रालय द्वारा गोवा विधानसभा के पटल पर रखे गए आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में कुल 80,849 टन सार्डिन मछली पकड़ी गई थी। वहीं, 2015 में यह घटकर 57,270 टन रह गई। जबकि साल 2016 में अब तक 6,481 टन सार्डिन पकड़ी गई है। मछली पकड़ने में आई कमी का मुख्य कारण एलईडी लाइटों के साथ मछली पकड़ने पर लगाई गई रोक है। गोवा के मत्स्य पालन विभाग ने केंद्रीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) से मछली संसाधनों पर एलईडी लाइट के पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करने को कहा है। गोवा के जल क्षेत्र में एलईडी लाइटों के प्रयोग पर रोक लगाने का आदेश 12 मई, 2016 को जारी किया गया था।

अब मछली खरीदने पर सब्सिडी - उत्पादन कम होने के कारण गोवा में मछली महंगी होती जा रही है। पर साल 2017 में गोवा सरकार ने मछली खाने के शौकीनों के लिए बड़ा ऐलान किया है। राज्य सरकार बहुत जल्द ही मछली सब्सिडी रेट पर उपलब्ध कराएगी। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  ( FISH, GOA, FISHING, SNAKE )
( आगे पढ़िए -पणजी गोवा की राजधानी  के बारे में ) 
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1 comment:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 109वां शहादत दिवस - कनाईलाल दत्त - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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