Saturday, October 7, 2017

यहां आइए और आदिवासी समाज का जीवन देखिए...

अगर शहर में रहकर ग्राम्य जीवन की झलक देखनी हो तो भोपाल के मानव संग्रहालय को जरूर देखिए। यह संग्रहालय भोपाल के श्यामला हिल्स पर बना है। घूमने के लिए कई घंटे का समय निकाल कर रखिए। यह संग्रहालय 200 एकड़ में बना हुआ है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का उद्देश्य आदिवासी और ग्राम्य जीवन से जनता को रुबरू करना है। अपने तरह का यह न सिर्फ भारत में बल्कि एशिया का अनूठा संग्रहालय है। यह संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार का एक स्वायत्त शासी संस्थान है। भोपाल में स्थित यह संग्रहालय वास्तव में राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है।
यहां आप भारत के अलग राज्यों के जनजातीय समाज का जीवन देख सकते हैं। संग्राहलय में अलग अलग क्षेत्र के आदिवासी परिवारों को लाकर कुछ समय के लिए रखा जाता है। यहां उनका परंपरागत घर, खानपान और जीवन शैली देखी जा सकती है।  यहां उनके बरतन, रसोई घर, कामकाज के उपकरण, पहनावा आदि को देखा जा सकता है। यहां आप जनजातीय आवास, तटीय गांव, देश की नदी घाटी संस्कृति को करीब से देख सकते हैं। भारत की सांस्कृतिक विविधता को देखने के लिए मानव संग्रहालय के सुंदर जगह हो सकती है। 

मानव संग्रहालय में जनजातियों द्वारा उपासना की जाने वाली मूर्तियां, संगीत में इस्तेमाल किए जाने वाले वाद्य यंत्र, आभूषण, चित्रकारी, प्रस्तर उपकरण, कृषि उपकरण, शिकार करने के हथियार, तीर कमान आदि देखे जा सकते हैं। मैं जब 1994 में यहां पहुंचा था तो छत्तीसगढ राज्य का गठन नहीं हुआ था। तब यहां  छत्तीसगढ़ की भी जनजातियां निवास करती थीं। अब वे जनजातियां वहां से हट गई हैं। फिर भी मध्य प्रदेश की लगभग 40 जनजातियों द्वारा निर्मित कालकृतियों को यहां देखा जा सकता है। इनमें सहरिया, भील, गोंड भरिया, कोरकू, प्रधान, मवासी, बैगा, पनिगा, खैरवार कोल, पाव भिलाला, बारेला, पटेलिया, डामोर आदि की झलक आप यहां देख सकते हैं।

पहले दिल्ली में खुला था यह संग्रहालय-  वास्तव में यह संग्रहालय 21 मार्च 1977 में नई दिल्ली के बहावलपुर हाउस में खोला गया था। परंतु दिल्ली में पर्याप्त जमीन व स्थान के अभाव में इसे भोपाल में लाया गया। चूंकि श्यामला पहाडी के एक भाग में पहले से ही प्रागैतिहासिक काल की प्रस्तर पर बनी कुछ कलाकृतियां मौजूद थीं, इसलिए इसे यहीं स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यहां पर 32 परंपरागत चित्रित प्रागऐतिहासिक काल का दर्शित करने वाले शैलाश्रय भी हैं। संग्रहालय के अंदर कई प्रदर्शनी कक्ष भी बनाए गए हैं।

खुलने का समय - हर रोज 10 बजे से शाम 5 बजे तक मानव संग्रहालय खुला रहता है। हर सोमवार और राजकीय अवकाश के दिनों में बंद रहता है। आजकल प्रवेश टिकट 30 रुपये का है। संग्रहालय में प्रवेश गेट नंबर एक और गेट नंबर दो से किया जा सकता है।  जिन लोगों ने कभी गांव नहीं देखा हो उनके लिए यह स्थल अदभुत है। वहीं छात्रों और बच्चों को भी यह जगह लुभा सकता है। मानव संग्रहालय के परिसर से भोपाल की झील का सुंदर नजारा दिखाई देता है। 

सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र भारत भवन - मानव संग्रहालय के एक कोने पर भारत भवन, भोपाल बना है। यह भोपाल की सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। इसकी स्थापना 1982 में की गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इसका उदघाटन किया था। इस भवन का डिजाइन प्रसिद्ध वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने तैयार किया था।इस भवन के अंदर आर्ट गैलरी, इनडोर और आउटडोर सभागार आदि का निर्माण कराया गया है। भारत भवन में प्रमुख कलाकारों की पेंटिंग की प्रदर्शनी देखी जा सकती है। एक समय में भारत भवन विवादों का भी केंद्र रहा है। पर भारत भवन भोपाल की साहित्य और रंगकर्म की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। अक्सर यहां फिल्म शो, नाटक और चित्रकला प्रदर्शनियां जारी रहती हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य 

( BHOPAL, ITARSI, BHARAT BHAWAN, SHYAMLA HILLS, MANAV SANGRAHALYA ) 

    

1 comment:

  1. रोचक जानकारी। मैं आने वाले समय में भोपाल जाने वाला हूँ तो उस दौरे में इधर जाने की भी कोशिश करूँगा। क्या इधर तस्वीरें खींचने की अनुमति दी जाती है?

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