Tuesday, October 3, 2017

भोपाल शहर की कुछ हसीन शामें और बिड़ला मंदिर

साल 1994 का दिसंबर महीना। गुनगुनी सी ठंड में भोपाल शहर में कुछ दिन यादगार रहे। वाराणसी से भोपाल पहुंचा था मैं कोई परीक्षा देने। पर शहर इतना अच्छा लगा कि कुछ दिन यहीं गुजराने और शहर को तफ्शील से घूमने का फैसला लिया। वाराणसी से भोपाल की कोई सीधी ट्रेन नहीं थी। सो हम पहले पहुंचे महानगरी एक्सप्रेस से इटारसी जंक्शन। फिर इटारसी से भोपाल दूसरी ट्रेन से। भोपाल में मैंने रहने के लिए यूथ होस्टल बुक कराया था। यह न्यू मार्केट चौराहे पर था। यूथ हास्टल का परिसर शानदार था। 25 रुपये प्रतिदिन में रहने के लिए डारमेटरी में इंतजाम। पर हमने अपने भोपाल आने की सूचना अपने एक मित्र प्रिंस अभिषेक अज्ञानी को खत लिखकर दे दी थी। उनसे अलीगढ़ में लगे एनवाईपी के शिविर से जान पहचान थी। अगले दिन सुबह सुबह वे यूथ होस्टल में टपक पड़े। बड़े अधिकार से बोले। आप मेरे घर चलेंगे रहने। 


हमने यूथ हास्टल से चेकआउट किया और चल पड़े साउथ तांत्याटोपे नगर में उनके घर। अज्ञानी समाजसेवक साथ पत्रकार भी हैं। और तब मैं पत्रकार बनने की सोच रहा था। उनके पिता कैलाश आदमी निर्दलीय नामक एक अखबार निकालते थे। अगले कुछ दिन गुजरे हमारे उनके घर में। वैसे तो मैं भोपाल दो दिन के लिए ही गया था। पर शहर इतना अच्छा लगा कि पांच दिन रुक कर शहर को इत्मीनान से घूमना तय किया। तो रोज सुबह अभिषेक हमें एक रुट बनाकर देते थे। मैं दिन भर घूमने के बाद शाम को लौटकर न्यू मार्केट आ जाता था। न्यू मार्केट में एक जलेबी की दुकान हुआ करती थी। वहीं जलेबियां खाने के बाद घर को लौट आता।

भोपाल का विशाल बिड़ला मंदिर



कई शहरों की तरह भोपाल में भी बिड़ला परिवार द्वारा बनवाया गया विशाल मंदिर है। यह लक्ष्मीनारायण जी का मंदिर है। हैदराबाद की तरह ही यह मंदिर ऊंचाई पर बना हुआ है। यों जानिए कि बिड़ला मंदिर भोपाल शहर की सबसे ऊंची चोटी पर निर्मित है। इसलिए यहां से पूरे शहर का नजारा काफी सुंदर दिखाई देता है। अगर आप यहां शाम ढलने के बाद जाएं तो और भी आनंद आता है। रात को यहां से पूरा भोपाल शहर रोशनी में नहाया हुआ नजर आता है। इसे निहारना अत्यंत सुखद अनुभूति होती है। मैं अपने भोपाल प्रवास में कई बार बिड़ला मंदिर गया। मंदिर से लगा हुआ एक संग्रहालय भी है। इस संग्रहालय में प्राचीन मूर्तियों का संग्रह है। इनमें ज्यादातर मूर्तियां भोपाल के पास, रायसेन, सीहोर, मंडला, मंदसौर आदि जिलों से लाई गई हैं। मंदिर सुबह 6.30 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है।



जिस समय मैं भोपाल गया था संयोग से उसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ की मांग को लेकर धरने पर बैठी थीं। कई बार मैं दोपहर में धरना स्थल पर चला जाता था। वहां नर्मदा बचाओ आंदोलन के आदिवासी कार्यकर्ता खास तौर पर महिलाएं लोकधुन पर नाचते गाते नजर आते थे। इसी दौरान धरना स्थल पर एक दिन मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल आए। तब मुख्यमंत्री कांग्रेस के दिग्विजय सिंह हुआ करते थे।


भोपाल में क्या क्या देखें  बिड़ला मंदिर, बड़ी ताल, मानव संग्राहलय, भारत भवन। ताजुल मसजिद। 


- vidyutp@gmail.com

( BHOPAL, BIRLA TEMPLE, NEW MARKET, YOUTH HOSTEL ) 
  

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