Sunday, October 1, 2017

पटना संग्रहालय में राहुल सांकृत्यायन और देशरत्न राजेंद्र प्रसाद

पटना संग्रहालय को बिहार की बौद्धिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। संग्रह के अलावा इसका भवन भी खास है। इसका भवन मुगल-राजपूत वास्तुशैली में निर्मित है। भवन के केंद्र में आकर्षक छतरी, चारों कोनों पर गुंबद और झरोखा शैली की खिड़कियां इसकी विशेषताएं हैं।

इस तरह बना संग्रहालय - 1912 में जब बंगाल से विभाजन होने के बाद बिहार राज्य बना तब यहां एक संग्रहालय की जरूरत महसूस की गई थी। तब तत्कालीन गवर्नर चार्ल्स एस बेली की अध्यक्षता में बिहार और ओडिशा सोसाइटी की बैठक में बिहार के लिए एक प्रांतीय संग्रहालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।

इसके बाद तत्कालीन गवर्नमेंट हाउस वर्तमान समय का मुख्य न्यायाधीश के आवास में 20 जनवरी 1915 को संग्रहालय की स्थापना की गई थी। जिस भवन में अभी संग्रहालय है, उस भवन में एक फरवरी 1929 को संग्रहालय की शिफ्टिंग की गई। इसी साल सात मार्च को बिहार-ओडिशा के तत्कालीन गवर्नर सर लैंसडाउन स्टीदेंसन ने इस संग्रहालय का उदघाटन किया।  इसका डिजायन राय बहादुर विष्णु स्वरूप ने किया था।

पटना संग्रहालय की दो गैलरियां बहुत खास हैं। ये गैलरियां महान लेखक, इतिहासकार और घुमक्कड़ राहुल सांकृत्यायन और भारत के पहले राष्ट्रपति देशरत्न डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद से जुड़ी हुई हैं। प्रथम तल पर स्थित है भारत के पहले राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद से जुड़ी हुई गैलरी। इस गैलरी में राष्ट्रपति के तौर पर डाक्टर राजेंद्र प्रसाद को मिले उपहारों का शानदार संग्रह है। दस साल के दौरान उन्हें अलग अलग देशों से जो उपहार मिले उसे उन्होंने पटना संग्रहालय को दान में दे दिया। 


वहीं राहुल सांकृत्यान दीर्घा में उनके द्वारा दी गई 250 से ज्यादा दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह है। इसमें कई शोध ग्रंथ भी हैं। कहा जाता है कि राहुल जी इसे अपनी तिब्बत यात्रा से वापसी दौरान खच्चरों पर लाद कर लाए थे। इनमें से कई पुस्तकें काफी बुरे हाल हैं। इनके संरक्षण के लिए इन शोध ग्रंथों का रासायनिक उपचार भी किया गया है।

पंडित राहुल सांकृत्यायन ने नालन्दा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का विशाल बौद्ध ग्रंथों का भण्डार जो नेपाल में कहीं गुमनामी के हाल में पड़ा था उसे पुनः पटना संग्रहालय को लौटा लाने का प्रयास किया। राहुल सांकृत्यायन साल 1938 में हजारों पांडुलिपियों को बड़े ही श्रम साध्य तरीके से तिब्बत से खच्चरों पर ढोकर लाए थे। क्योंकि तब परिवहन के साधन उन्नत नहीं थे, इसलिए ये कार्य अतीव चुनौतीपूर्ण था। इस संग्रह को उन्होंने पटना संग्रहालय को सौंप दिया। 

पटना के राजकीय संग्रहालय में एक पूरा फ्लोर ही उनको समर्पित है। वहां उनके द्वारा लाई गई सामग्रियों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें कई ग्रंथों को सोने चांदी के चूर्ण से लिखा गया है। कई ग्रंथ इतने कीमती हैं कि इन्हे स्ट्रांग रुम में संरक्षित किया गया है।

कुषाण कालीन मिथुन प्रतिमाएं - पटना संग्रहालय में एक आप एक मिथुन रत युगल की प्रतिमा भी देख सकते हैं। यह दूसरी सदी की कुषाण काल की प्रतिमा  है।  इसमें पुरुष स्त्री के वक्ष स्थलों को स्पर्श करता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि संग्रहालय में इस तरह की प्रेमालाप करती हुई प्रतिमाएं बहुत कम ही हैं।

चाचा भतीजा डेनियल की दीर्घा-  पटना संग्रहालय का नायब आकर्षण है चाचा भतीजा डेनियल की दीर्घा। चाचा थामस डेनियल और भतीजा विलियम डेनियल दोनों ही चित्रकार थे। वे 1785 में भारत यात्रा पर आए। तब विलियम डेनियल की उम्र 16 साल थी। वे दोनों लगभग 10 सालों तक भारत में भ्रमण करते रहे और इस दौरान कई प्रमुख स्थलों के चित्र बनाए।

उनके चित्रों में दिल्ली की जामा मसजिद, आगरा का ताजमहल, एलोरा की गुफाएं, एलीफैंटा की गुफाएं, बनारस के घाट, महाबलीपुरम के मंदिर, पटना का गंगा तट अजगैबीनाथ मंदिर आदि प्रमुख है। डेनियल ने बिहार के कैमूर जिले स्थित मुंडेश्वरी देवी मंदिर का भी अदभुत चित्र बनाया है।
पटना संग्रहालय में डेनियल द्वारा बनाई गई मुंडेश्वरी देवी मंदिर ( कैमूर ) का चित्र। 

भारत के पहले राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद जब 1962 में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद आकर पटना रहने लगे तब उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले तमाम उपहारों को पटना संग्रहालय को सौंप दिया। इसके बाद संग्रहालय में इन उपहारों की एक गैलरी का निर्माण किया गया। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ से प्राप्त उपहारों का भी संग्रह है।

पटना संग्रहालय के 2017 में सौ साल पूरे होने पर इसके परिसर का सौंदर्यीकरण किया गया है। हरित परिसर में बैठने के लिए बेंच बनाई गई है। पैदल चलने के लिए सुंदर रास्ते बनाए गए हैं। हालांकि कि परिसर में एक कैंटीन भी है लेकिन वह बंद रहती है। परिसर के अंदर भी आप कई ऐतिहासिक मूर्तियां और कलाकृतियां का नजारा कर सकते हैं।

-        - विद्युत प्रकाश मौर्य
   ईमेल - vidyutp@gmail.com 
   ( PATNA MUSEUM, RAHUL SANKRITYAN, BUDDHA, PAINTING, DR RAJENDRA PRASAD )  




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