Tuesday, October 31, 2017

गोवा - ओसबोर्न रिजार्ट में कुछ दिन

गोवा में हमारा पहले दो दिन का ठिकाना बना आसबोर्न होलीडे रिजार्ट। यह कालांगुट इलाके में एक मध्यम वर्गीय अपार्टमेंट नुमा होटल है। इसमें रेस्टोरेंट और स्विमिंग पुल की भी सुविधा है। गोआईबीबो डाट काम से मुझे यह अत्यंत रियायती दरों पर मिला था। इतने कम दर के होटल में गोवा में स्विमिंग पुल शायद ही कहीं मिले। हमें उन्होंने सी ब्लाक में तीसरी मंजिल पर कमरा दिया। बड़े आकार के कमरे में बालकोनी, के साथ एक किचेन और बड़े आकार का टायलेट भी है। किचेन में फ्रिज मौजूद है। मानो आप वन रुम के स्टूडियो अपार्टमेंट में रह रहे हो। अनादि को ये कमरा काफी पसंद आया।
होटल बुकिंग में बच्चे का जिक्र जरूर करें - अगर आप गोवा के लिए होटल बुक कर रहे हों और आपके साथ कोई बच्चा हो तो उसका जिक्र बुकिंग में जरूर करें। गोवा में होटल वाले 5 साल से अधिक उम्र के बच्चे के लिए अतिरिक्त चार्ज करते हैं। भले ही होटल बिना ब्रेकफास्ट के केवल कमरे के लिए बुक किया गया हो। दूसरे शहर के तमाम होटल वाले बच्चे के लिए एक्सट्रा बेड नहीं मांगने पर कोई चार्ज नहीं करते। हमने गोवा में आनलाइन बुकिंग के दौरान बच्चे का जिक्र नहीं किया था तो हमें अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ा। ऐसा पहले कभी नहीं करना पड़ा था।
भले ही गोवा सैलानियों की आमद के लिहाज के सालों भर गुलजार रहने वाला लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, पर यहां आपकी जेब के अनुकूल हर रेंज के होटल उपलब्ध हो जाएंगे।आप यहां 400 रुपये प्रतिदिन से लेकर 40 हजार तक के होटलों में ठिकाना बना सकते हैं। अक्सर समुद्र तट से लगे हुए, स्विमिंग पुल युक्त होटल महंगे हैं। वहीं समंदर से दूर गेस्ट हाउस या काटेज टाइप के होटल सस्ते भी हैं।

अगर बीच के लिहाज से देखें तो कालंगुट, कैंडोलियम इलाका ज्यादा भीड़ भाड़ वाला है। वहीं अंजुना, बागा और साउथ गोवा के बीच पर आपको सस्ते होटल भी मिल सकते हैं। बीच से दूर मडगांव, वास्को, पणजी जैसे शहरों में भी आप रहने के लिए बुकिंग कर सकते हैं।
पसंद अपनी अपनी है, कुछ लोगों को नार्थ गोवा में रहना अच्छा लगता है तो कुछ लोगों को साउथ गोवा में।  जो लोग शांतिपूर्ण कम कोलाहल वाले स्थल तलाश रहे हों उनके लिए साउथ गोवा बेहतर हो सकता है।

तो बात ओसबोर्न की। यह एक अपार्टमेंट टाइप का रिजार्ट है। इसमें ए, बी, सी. डी, ई ब्लाक  हैं। बीच में एक स्विमंग पुल है। इसमें सुबह 7 से शाम 7 बजे तक नहाने की अनुमति है। ओसबोर्न कई अलग अलग ट्रैवेल साइट और टूर पैकेज बेचने वाली कंपनियों पर भी उपलब्ध है। जब हमलोग यहां ठहरे हैं तो एक व्यापारिक दोस्तों का समूह भी यहां आकर ठहरा हुआ है। तीन दिन हमने भी स्विमिंग पुल  में घंटो नहाने का खूब मजा लिया। दीव के बाद हमारा यह दूसरा प्रवास था जब हम किसी स्विमिंग पुल वाले होटल में रुके थे। हालांकि हम यह यहां बिना ब्रेकफास्ट वाले पैकेज में थे। पर आप बुकिंग के दौरान कांटिनेंटल प्लान भी चुन सकते हैं। होटल द्वारा पेश किया जाने वाला ब्रेकफास्ट अच्छा है। लोकेशन, पहुंच, सुविधाएं, सेवा आदि के लिहाज से देखें तो अगले गोवा प्रवास में भी शायद हम यही होटल चुनें।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य



  
( OSBORNE RESORT, CALANGUTE, NORTH GOA ) 

Sunday, October 29, 2017

गोवा एयरपोर्ट – यहां रात में विमान नहीं उतरते

हमलोग शाम के 7 बजे गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट पर उतर रहे हैं। विमान में यह ऐलान किया जाता है कि गोवा नौ सेना का एयरपोर्ट है, यहां फोटोग्राफी की इजाजत नहीं है। हालांकि एयरपोर्ट पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। एयरब्रिज से उतर कर तेजी से लांउंज में पहुंच गए हमलोग। हैंगर से सामान प्राप्त करने में थोड़ा वक्त लग गया। इस बीच हमने एयरपोर्ट के आगमन टर्मिनल का मुआयना किया।

गोवा का एयरपोर्ट डाबोलिम में है। अगर मानचित्र में देखें तो यह गोवा के लगभग बीच में है। यह गोवा के वास्कोडिगामा शहर से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर है। यह हवाईअड्डा पूरी तरह से नौसेना के अधीन है। यहां पर व्यावसायिक उड़ानें सिर्फ दिन में ही टेकऑफ या लैंडिंग करती हैं। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से यहां के लिए रोज कई उड़ानें हैं। हालांकि यह एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यहां से दुबई समेत कुछ अन्य शहरों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी हैं।
गोवा में पहुंच के लिहाज से यह साउथ गोवा के मडगांव से 23 किलोमीटर और राजधानी पणजी से 30 किलोमीटर की दूरी पर है। साल 2013 में इसके नए आधुनिक टर्मिनल का उदघाटन हुआ। आजकल रोज यहां 130 से 140 विमान उड़ान भरते हैं। सैलानियों के नियमित आमद के लिहाज से अब यह छोटा पड़ रहा है इसलिए अब गोवा में मोपा में दूसरे एयरपोर्ट का भी निर्माण कार्य चल रहा है।

प्रीपेड टैक्सी और बस – अगर आप गोवा एयरपोर्ट से शहर जाने के लिए बाहर निकले हैं तो आपके लिए सबसे सस्ता साधन बस हो सकता है। बाहर निकल कर दाहिनी तरफ जाएं तो वास्कोडिगामा शहर के लिए बसें मिलती रहती हैं। अगर टैक्सी लेनी है तो एयरपोर्ट के अंदर ही प्रीपेड काउंटर है। यहां से अलग अलग शहरों के लिए टैक्सी की दरें तय हैं। प्रीपेड वाले आपको एक रसीद देते हैं और टैक्सी का नंबर एलाट कर देते हैं। 

गोवा के सबसे लोकप्रिय बीच कालंगुट के लिए टैक्सी किराया 1150 रुपये है। दूरी कोई 40 किलोमीटर है। जबकि पणजी शहर और मडगांव आदि के लिए 800 से 900 के बीच किराया है। देखा जाए तो गोवा में टैक्सी का किराया थोड़ा महंगा है। ज्यादातर जगहों का किराया फिक्स है। यहां पर ओला उबर जैसी सेवाएं नहीं चलतीं। अगर आप टैक्सीवालों से सीधे बात करते हैं तो भी वे ज्यादा किराया मांगते हैं। वे किराया मोलभाव करके कम भी नहीं करते। इसलिए गोवा घूमने का सस्ता तरीका यहां की बसे हैं। बसों में ज्यादा भीड़ नहीं होती। कई जगह पर तो वे टैक्सी से भी जल्दी पहुंचा देती हैं। एयरपोर्ट से पणजी और कालांगुट आदि के लिए शटल बस सेवा भी आरंभ की गई है पर उनका समय तय है। 

खैर हमारे टैक्सी वाले नाम गणेश है। वे एयरपोर्ट से हमें कालंगुट के लिए ले चलते हैं। वास्को शहर पीछे छूट गया। गोवा की सर्पीली सड़कों पर वे काफी तेज ड्राईव कर रहे हैं। पणजी शहर में मंडोवी नदी का पुल पार करने के बाद वे हमें पोरोवोरीम के रास्ते ले जाते हैं। रास्ते में बाइपास फ्लाइओवर का निर्माण होता दिखाई दे रहा है। कारण गोवा की राजधानी पणजी में वाहनों की भीड़ बढ़ रही है। हमलोग सालीगांव से कालंगुट के लिए मुड़ते हैं। यहां सड़क के बीचों बीच बने सेंट एंथोनी चेपल के पास ही एक गली में हमारा होटल ओसबोर्न होलीडे रिजार्ट है। टैक्सी वाले लोगों से रास्ता पूछते हुए हमें होटल के प्रवेश द्वार तक छोड़ देते हैं। हम उन्हें बिल देकर चेक इन के लिए रिसेप्शन की ओर बढ़ जाते हैं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य
(GOA, AIRPORT, CALANGUTE, TAXI, BUS ) 
 
गोवा का कालंगुट स्थित सेंट एंथोनी चेपल। ( प्रार्थना गृह ) 
     



Friday, October 27, 2017

मुंबई का टर्मिनल-2 और लाइव म्युजियम

मुंबई के छत्रपति शिवाजी विमान तल का नया नवेला टी-2 टर्मिनल बड़ा शानदार बना है। बाहर से इसकी इमारत को आते जाते हाईवे से देखें तो काफी भव्य नजर आती है। अंदर से यह विशाल शापिंग मॉल सा नजर आता है। टर्मिनल के अंदर घूमते टहलते हुए आप सारा दिन गुजार सकते हैं। इसके अंदर एक शानदार म्युजियम भी बनाया गया है।
संयोग से हमें 20 सिंतबर को यहां पांच घंटे गुजारने का मौका मिला। दरअसल हमें दिल्ली से गोवा की सीधी फ्लाइट भी मिल रही थी। पर उतने ही किराये में जेट एयर का टिकट वाया मुंबई मिल रहा था। सो हमने जेट को चुना ये सोचकर दोनों विमान में खाना भी मिलेगा। पर इस बार जेट के खाने के पैकेज ने निराश किया। दिल्ली चेन्नई फ्लाइट जैसा शानदार खाना इस बार नहीं था। मुंबई से गोवा की बीच तो चाय-कॉफी भी नहीं मिली।
मुंबई टी-2 टर्मिनल का निर्माण जीवीके समूह ने कराया है। इसका डिजाइन और वास्तु विश्व स्तर का है। इसके निर्माण में परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भी ख्याल रखा गया है।

इस टर्मिनल में 3.2 किलोमीटर लंबी मल्टी स्टोरी कला दीर्घा का निर्माण किया गया है। जय हे दीर्घा के निर्माण में ख्याति प्राप्त कलाकारों का सहयोग लिया गया है। इसमें 5000 कलाकृतियां देखी जा सकती हैं। टी-2 में घरेलू आवागमन प्रस्थान के अलावा अंतरराष्ट्रीय आवागमन प्रस्थान के टर्मिनल हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानो के लिहाज से यह देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है।  
किसी जमाने में टी-2 को सहार एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता था। अब यह नए भव्य रूप में दिखाई देता है। वहीं टी1 टर्मिनल को लोग सांताक्रूज एयरपोर्ट के नाम से भी जानते हैं।
टी-2 पर विशाल शापिंग लांच है, जहां आप खादी से लेकर कई तरह के कपड़ों, किताबों और गिफ्ट की खरीददारी कर सकते हैं। खाने पीने के लिए तमाम लोकप्रिय ब्रांड के आउटलेट हैं। पर यहां बिकने वाले बिस्कुट,नमकीन के पैकेट बाजार से काफी महंगे हैं।
टी-2 व्यस्तता के मामले में दुनिया में 29 वें नंबर का एयरपोर्ट है। कोई 850 विमान यहां से रोज उड़ान भरते हैं। टेकऑफ और लैंडिंग की समयबद्धता में भी इसे कई अवार्ड मिल चुके हैं। टी-2 को आधुनिकीकरण के बाद जनवरी 2014 में शुरू किया गया। बाहर से पहुंचने के लिए मुंबई में बने वेस्टर्न एक्सप्रेसवे से यह 6 लेन के सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

आस्वाद में फ्रेंच फ्राइज- पांच घंटे के इंतजार में हमें भी हल्की भूख लगने लगी थी। पर यहां बिकने वाली ज्यादातर रेस्टोरेंट की सामग्री काफी महंगी थीं। हमने आस्वाद नामक फूट आउटलेट में फ्रेंच फ्राइज खाई। वैसे आस्वाद के मीनू की बाकी चीजें भी काफी सुस्वादू थीं। इनका आउटलेट गेट नंबर 50 के पास है।  
टी-2 पर उतरते ही मैं एक यात्री से टकरा जाता हूं। वे मेरे फोन से एक मिस्ड कॉल मारने का आग्रह करते हैं। मैं उन्हें कहता हूं मिस्ड क्या फोन लिजिए और जिससे भी बात करनी हो पूरी बात करें। उन्हें अबू धाबी जाना है। पर सुबह 4.00 बजेकी फ्लाइट इस गफलत में छूट गई कि वे उसे शाम 4 बजे की समझ बैठे थे। उनके पास भारत का सिम कार्ड नहीं है। अब अपने भाई को फोन कर अपनी परेशानी बयां कर रहे हैं। मैंने उनकी बात तो करा दी पर और कोई मदद नहीं कर सका। आगे बढ़ता हूं तो खादी की दुकान पर बापू नजर आते हैं। प्रस्थान लांज में जाने के दौरान हमें एक बार फिर सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। पर यहां पर बने सुंदर कृत्रिम झरने ने मन मोह लिया।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य

( MUMBAI AIRPORT, CST, SAHAR, SANATACRUZ, T2, GVK GROUP )

Wednesday, October 25, 2017

चलो दिलदार चलो...बादलों के पार चलो...

गोवा यानी देश में  सैलानियों का सबसे लोकप्रिय पड़ाव। पर हमने गोवा जाने का कार्यक्रम कई सालों बाद बाद बनाया। देश के 33 राज्य घूमने के बाद। वैसे गोवा के मडगांव रेलवे स्टेशन पर हमारे कदम साल 2012 में केरल जाते हुए पड़े थे। पर इस बार गोवा में चार-पांच दिन गुजारने का इरादा था। आप गोवा के बारे में जैसी भी छवि रखते हों हमने अपने नजरिए से देखा। हमारी यात्रा 20 अक्तूबर की सुबह दिल्ली से शुरू हुई जेट एयर के विमान से वाया मुंबई। विमान का समय 10.30 बजे तय था पर उड़ान 15 मिनट की देरी से शुरू हुई। दो घंटे में हमलोग मुंबई के आसमान पर थे। 

पर यह क्या... विमान को उतरने में दिक्कत आने लगी। हमारा विमान घने बादलों के बीच था। कई बार नीचे आया फिर उपर गया। इस दौरान तेज झटके लगे। शायद विमान को उतरने का सिग्नल नहीं मिल पा रहा था। मुंबई में 19 सितंबर से ही बड़ी तेज बारिश हो रही है। सुबह चलते समय में माधवी को स्विटी ने फोन पर बताया था कि यहां काफी बारिश हो रही है। तो क्या विमान मुंबई में उतर नहीं पाएगा। तो क्या अहमदाबाद या फिर गोवा में जाकर उतरेगा। कई सवाल मन में उठने लगे। खैर आधे घंटे में लैंडिंग हो पाई। 9डब्लू 358 के कैप्टन सूरज चेरियन और को पायलट रमन्ना मुथु को धन्यवाद। पर हमने देखा रनवे पर घनघोर बारिश हो रही थी। 
मुंबई आसमान से ऐसी दिखाई दे रही है...

जब हमलोग मुंबई के छत्रपति शिवाजी विमान उड़ान तल के नवनिर्मित टी-2 के विशाल भवन के अंदर पहुंचे तो अंदर रोज से कई गुना ज्यादा भीड़ थी, और हर तरफ अफरातफरी का आलम दिखाई दे रहा था। इधर-उधर बिखरे अखबारों पर नजर पड़ी। मुंबई में तेज बारिश। सभी स्कूल कालेज आज बंद कर दिए गए हैं। पता चला मुंबई से उड़ान भरने वाली 70 फीसदी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हो गई हैं। लोग परेशान परेशान इधर उधर घूम रहे हैं। गोवा की भी कई उड़ानें रद्द हैं। एक सज्जन टकराए उनकी इत्तेहाद एयर की फ्लाइट छूट गई है।

हमारी अगली उड़ान जेट कनेक्ट की 3.25 बजे (एस2-4384) की है। पता किया वह उड़ान रद्द तो नहीं है। सूचना पट्ट पर उसके समय पर होने की जानकारी आ रही है। पर जेट के ग्राउंड स्टाफ ने बताया कि विमान देर से ही उड़ेगा। आप 50 नंबर प्रस्थान द्वार के आसपास बैठ कर इंतजार करें। समय आने पर उड़ान की घोषणा होगी। दो घंटे इंतजार के बाद मेरे मोबाइल पर संदेश आया कि विमान 5.00 बजे उड़ेगा। प्रवेश 51 नंबर गेट से होगा। शाम 5 बजे प्रवेश आरंभ हुआ। 5.20 में विमान के द्वार बंद हो गए। पर कैप्टन प्रकृति यादव ने एलान किया कि एटीसी से क्लिरेंस मिलने में देरी हो रही है। इंतजार करना पड़ेगा। बंद विमान में आधे घंटे तक इंतजार। इस बीच बारिश तेज हो गई। फिर लगा शायद ये विमान रद्द न हो जाए। आधे घंटे बाद विमान ने रनवे पर सरकरना शुरु कर दिया। पर अगले आधे घंटे रनवे पर ही सरकता रहा। इधर से उधर।
मुंबई से गोवा के लिए उड़ान...

खैर एक घंटे बाद 6.20 में विमान आसमान में उड़ने लगा। पर ऊंचाई पर भी लगातार बादल दिखाई दे रहे थे। लगातार दूसरी उड़ान मुश्किलों में नजर आ रही थी। हमें साल 2014 का सितंबर महीने में ही कश्मीर में बाढ़ में फंसना याद आने लगा। इस उड़ान में नास्ता मिला पर चाय काफी नहीं। पर 40 मिनट की उड़ान के बाद हमलोग गोवा के डाबोलियम ( या दाबोली )  एयरपोर्ट पर थे। यहां भी बाहर बारिश हो रही है। पर जैसे विमान ने गोवा में जमीन को छुआ सारे यात्रियों ने पायलट के सम्मान में तालियां बजाई। धन्यवाद, कैप्टन प्रकृति यादव और सह पायलट अंशुमान रेड्डी को, हमें सुरक्षित गोवा में उतारने के लिए। इस उड़ान में क्रू प्रभारी यशवंत बहुत ही सुंदर हिंदी में उदघोषणा कर रहे थे। 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( DELHI T-3, MUMBAI, TERMINAL-2, GOA, DABOLIM, JET AIRWAYS ) 
मुंबई के एयरपोर्ट पर भारी बारिश। 

(यात्रा मार्ग - दिल्ली- मुंबई- गोवा (नार्थ), गोवा साउथ, मडगांव-कारवार- अंकोला- गोकर्ण- मंगलुरू- कोचीन, मुन्नार. वापसी- मुन्नार- अलुवा- उडुपी- मुंबई- दिल्ली ) 

Monday, October 23, 2017

हवाई यात्रा के दौरान बरतें ये सावधानियां

एक शहर से दूसरे शहर में जल्दी पहुंचने के लिए हवाई यात्रा अच्छा विकल्प है। भारतीय आसमान में कई निजी विमानन कंपनियों के आने से हवाई यात्रा मध्यम वर्ग के जेब के अनुकूल हो गई है। पर अगर आप कहीं हवाई यात्रा पर जा रहे हैं तो कुछ सावधानियां बरते तों यात्रा सुगम और सुरक्षित होगी।

-    उड़ान के समय से कम से कम डेढ़ घंटे पहले एयरपोर्ट पर जरूर पहुंच जाएं, जिससे आपको बोर्डिंग पास प्राप्त करने और सुरक्षा जांच में शामिल होने में आसानी हो।

-    अगर आपने ऑनलाइन टिकट खरीदा है तो बोर्डिग पास भी यात्रा शुरू करने से 48 घंटे पहले ऑनलाइन ही निकाल सकते हैं। इससे एयरपोर्ट पर बोर्डिंग पास बनवाने में लगने वाला समय बच जाएगा।

-    कई विमानन कंपनियां टिकट बुक करने के बाद आपको मनचाही सीट चुनने का विकल्प भी देती हैं। इसका लाभ उठाएं। घर बैठे विमानन कंपनी की वेबसाइट पर जाकर अपनी मनचाही सीट चुन लें।

-    आपके साथ जितने भी यात्री सफर कर रहे हों उन सभी का कोई सरकार द्वारा जारी परिचय पत्र साथ लेकर चलें। रेलयात्रा में किसी एक का पर हवाई यात्रा में सभी का परिचय पत्र होना जरूरी है।

-    नाम की जांच कर लें – यह सुनिश्चित कर लें कि आपके टिकट पर छपा हुआ नाम और आपके पहचान के परिचय पत्र पर छपा हुआ नाम बिल्कुल एक जैसा ही हो। नाम में अंतर होने पर परेशानी पेश आ सकती है।

-    हवाई यात्रा के दौरान अपने बैग में शेविंग ब्लेड, कैंची, चाकू आदि सामान नहीं रखें। किसी भी तरह का हथियार तो बिल्कुल ही प्रतिबंधित रहता है।   
-    अगर आप नियमित तौर पर दवाएं लेते हैं तो अपनी दवाएं हैंडबैग में ही रखें। उसे स्टोर में जाने वाले लगेज के साथ नहीं जमा कराएं।

-    ज्यादातर विमानन कंपनियां 7 किलो तक का सामान (बैग) केबिन में साथ ले जाने की अनुमति देती हैं। साथ ही 15 किलो सामान सूटकेस में ले जा सकते हैं जिसे लगेज स्टोर में जमा कराना पड़ता है। अपने सूटकेस को लॉक रखें और अपने नाम की पर्ची भी लगाकर रखें। यात्रा खत्म होने के बाद उदघोषणा सुनें और जिस हैंगर पर आपका सामान आने वाला हो वहां उसे प्राप्त करने के लिए तत्पर रहें। कई बार लोग दूसरे का सामान लेकर भी चले जाते हैं। तो कई बार लोग लापरवाही में अपना सामान छोड़कर बाहर निकल जाते हैं।

-    कई संवेदनशील एयरपोर्ट पर फोटोग्राफी की मनाही रहती है। इसका ख्याल रखें। श्रीनगर, पोर्ट ब्लेयर जैसे एयरपोर्ट पर आंतरिक फोटोग्राफी निषेधित है।

- मोबाइल चार्च करने के लिए पावर बैंक लेकर यात्रा कर रहे हैं तो उसे आप अपने केबिन बैग या हैंड बैग में ही रखें, उसे कभी भी स्टोर मे जाने वाले लगेज के साथ नहीं रखें। आग लगने की घटनाओं के कारण ऐसा करने से मनाही की जाती है। 
 - vidyutp@gmail.com


( AIR TRAVEL, FLIGHTS, BAG, POWER BANK ) 



Saturday, October 21, 2017

फिश स्पा दे आपके पांव को आराम

नन्ही नन्ही मछलियां इंसानों की कई मामले में दोस्त हो सकती हैं। आपने मछली के तेल की बात सुनी होगी जी हां काड लीवर आयल। पर नहीं मछलियां आपको पांव का पेडिक्योर भी करती हैं। इन खास मछलियों को डॉक्टर फिश या गारा रुफा के नाम से जाना जाता है। वास्तव में ये मछलियां दांत रहित होती हैं इसलिए ये पेडिक्योर करते समय काटती नहीं है। आजकल महानगरों के कई मॉल में इस तरह का फिश स्पा आप देख सकते हैं। जैसे ही आप पेडिक्योर के लिए अपने पांव पानी में डालते हैंबहुत सारी मछलियां आकर आपके पांव के चारों तरफ काटने लगती है। इस दौरान पांव में हल्की सी गुदगुदी होती है।

वास्तव में ये मछलियां फिश स्पा के दौरान आपके पांव के डेड स्किन को खा जाती हैं। फिश स्पार एक ऐसी प्रक्रिया हैजिसमें पर मछलियों का इस्तेवमाल पैरों से डेड स्किन को हटाने में किया जाता है। आम तौर पर पेडीक्योर में मृत त्वचा निकालने के लिए रेजर (ब्लेड) का प्रयोग किया जाता हैजबकि फिश पेडीक्योर में यह काम मछलियां कर देती हैं। यह एक किस्म का प्राकृतिक पेडिक्योडर है। इसके कई फायदे हैं।

चमकदार होंगे पांव -  यह पैरों से डेड स्किन हटा कर उनको चमकदार बनाता है। मछलियां पैर से बैक्टीहरिया और डेड स्किन खा जाती हैंजिससे पैरों की त्वचा पहले से निखर जाती है।



दर्द और तनाव से मुक्ति -  जब भी आप बहुत थक जाएं और अपने पैरों को आराम देना चाहेंतो तुरंत ही पास के फिश स्पा कराएंआपको आराम मिलेगा।

मन को शांति - जब पैरों को फिश टैंक में डाला जाता है और मछलियां उन पैरों पर हमला करके त्वचा को खाना शुरू कर देती हैं। इस दौरान मन को बहुत ही अच्छा महसूस होता है। यह सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि उसी समय हमारे दिमाग से इंडोर्फिन नामक रसायन निकलता है जो सुखद एहसास दिलाता है।

नई कोशिकाओं का जन्म - फिश टैंक में गर्रा रुफा नामक मछली है तो त्वचा को काफी लाभ होगा। यह मछली अपने मुंह से डिर्थनॉल नामक एंजाइमलार के रुप में निकालती है जिससे नई कोशिकाएं पैदा होती हैं।

पैर होंगे मुलायम - फिश स्पा यह न केवल पैरों को मुलायम बनाता हैबल्कि खुजली और दाग-धब्बों को भी दूर करता है। इससे शरीर में रक्त संचालन भी ठीक हो जाता है।



गर्रा रुफा मछली करती है फिश स्पा
स्पा में गर्रा रूफा नाम की मछली का इस्तेमाल एक चिकित्सा उपचार के रुप में किया जाता है।यह सिरोसिसमस्सा और कॉलयूसिस जैसे पैरों की बीमारियों को दूर करती है। 

सावधानियां – हमेशा अपने पैरों को अच्छी तरह साफ करके ही टैंक में दोनों पांव को डालें। इससे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पांव में इनफेक्शन नहीं पहुंचेगा। हमने गाजियाबाद के पेसफिक मॉल में गर्रा रुफा मछलियों द्वारा संचालित फिश स्पा सेंटर देखा। पर आप इस तरह के फिश स्पा सेंटर जगह जगह देख सकते हैं। तो कभी आजमा कर देखिए। 

 vidyutp@gmail.com
( GARRA RUFA, FISH SPA, PEDICURE  )


Thursday, October 19, 2017

दिल्ली में शाकाहारी थाली श्रीहरिशरणम की...

दिल्ली में कभी शाकाहारी थाली खाने की इच्छा हो तो श्री हरि शरणम का रुख करें। कहां है, और कहां पुरानी दिल्ली में। कश्मीरी गेट बस अड्डे के बिल्कुल पास। कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन के पास स्थित है हरि शरणम। ऐतिहासिक कश्मीरी गेट के सामने एक सुंदर, सुसज्जित शाकाहारी रेस्टोरेंट है श्री हरि शरणम। यह भोजनालय पहली मंजिल पर स्थित है। प्रबंधन का आवासीय होटल भी है।

सीढ़िया चढ़ते ही दो हाल हैं एक एसी और एक बैगेर एसी वाला। रेस्टोरेंट की सजावट काफी सुरुचि से की गई है। जगह कृष्ण से जुड़ी कथाएं और भगवान विष्णु की अराधना के मंत्र लिखे गए हैं। भोजनालय का प्रबंधन देख रहे गौरव जी का ग्राहकों के प्रति व्यवहार भी काफी अच्छा है।

तो हमने पहले दिन यहां पर आर्डर की 150 रुपये वाली शाकाहारी थाली। इसमें नान और लच्छा पराठा। बेहतरीन किस्म का पुलाव। जिसमें कई तरह के ड्राई फ्रूट डाले जाते हैं। रायता, दाल मखानी और मिक्स वेजिटेबल। हर सब्जी का स्वाद उम्दा है।

यहां की मारवाड़ी थाली का भी आनंद ले सकते हैं। दोनों थाली 150 रुपये की हैं पर उनका मीनू कुछ अलग अलग है। आपकी इच्छा है तो आप अलग अलग सामग्री का भी आर्डर कर सकते हैं। पर इनकी खास बात यहां के पराठे हैं। ये पराठे तवे वाले और तंदूर वाले दोनों ही तरह के हैं। पराठे के साथ रायता. चटनी आदि उसका स्वाद और भी बढ़ा देते हैं।
यहां पर दक्षिण भारतीय मसाला डोसा आदि का भी स्वाद ले सकते हैं। कश्मीरी गेट मेट्रो से होकर गुजरने वाले तमाम लोग जो शाकाहारी खाने के शौकीन हैं यहां पहुंचते रहते हैं।
 श्री हरिशरणम में पुरुषों के साथ महिलाएं भी वेटर के रुप में अपनी सेवाएं देती हैं। ये वर्दीधारी वेटर काफी अनुशासन में रहते हैं और ग्राहकों से सम्मान से पेश आते हैं। यहां आप सुबह से लेकर रात्रि 11 बजे तक भोजन का स्वाद ले सकते हैं।

हां, श्री हरिशरण में आपस कहीं बाहर से आए हैं तो रहने के लिए दरियाफ्त कर सकते हैं। यहां पर वातानुकूलित डारमेट्री महज 300 रुपये प्रतिदिन में उपलब्ध है। इसी प्रबंधन का एक होटल चांदनी चौक से आगे फतेहपुरी के पास भी है। वहां होटल क्राउन में भी शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध है।

-विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com


(SHREE HARI SHARNAM, DELHI6, KASHMIRI GATE,  ) 


Tuesday, October 17, 2017

किला राय पिथौरा कभी कहलाता था लालकोट


दिल्ली के मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन के पास दिल्ली की एक प्राचीन विरासत है। यहां कम लोग पहुंचते हैं। पर इतिहास के पन्नों में इसका खास महत्व है। हम बात कर रहे हैं किला राय पिथौरा की। हालांकि अब किले के नाम पर यहा कुछ खास मौजूद नहीं है। पर यह हमें दिल्ली के स्वर्णिम अतीत की स्मृतियों में ले जाता है।
किला राय पिथौरा का निर्माण पृथ्वीराज चौहान ने कराया था। कुछ लोग उन्हें दिल्ली के अंतिम हिंदू शासक के तौर पर देखते हैं। उन्हें राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता था। भारतीय इतिहास के पन्नों पर पृथ्वीराज चौहान का नाम मुस्लिम अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध हिन्दू प्रतिरोध की कथाओं के प्रसिद्ध नायक के रुप में है। किला राय पिथौरा के परिसर में घोड़े पर सवार पृथ्वीराज चौहान की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है।
जहां अभी किला राय पिथौरा है वहां पहले लालकोट नामक प्राचीन नगर हुआ करता था। इसे तोमर वंश के राजाओं ने बसाया था। तोमर राजाअनंगपाल ने दिल्ली में संभवत पहला नियमित रक्षा संबंधी कार्य किया था। उनके नाम पर हरियाणा में फरीदाबाद के पास अनंगपुर नामक गांव है। अनंगपाल ने जो शहर बसाया उसे लालकोट नाम दिया गया था। 



लाल कोट अर्थात लाल रंग का किलाजो कि वर्तमान दिल्ली क्षेत्र का प्रथम निर्मित नगर था। इसकी स्थापना तोमर शासक राजा अनंगपाल द्वितीय ने 1060 में की थी। तोमर वंश ने दक्षिण दिल्ली क्षेत्र में सूरजकुण्ड के पास से राजधानी बनाकर शासन किया। तोमरवंश का इतिहास 700 ईस्वी से आरम्भ होता है। फिर चौहान राजापृथ्वीराज चौहान ने 12वीं सदी में लालकोट को अपने अधिकार में ले लिया और उस नगर एवं किले का नाम किला राय पिथौरा रखा।

पृथ्वीराज चौहान ने 1191  में मुहम्मद गोरी को तराइन ( थानेशर, हरियाणा) के प्रथम युद्ध में हरा कर दिल्ली पर कब्जा किया था। इसके बाद पृथ्वीराज ने किला राय पिथौरा को विशाल नगर में तब्दील किया। लेकिन दिल्ली की तख्त पर चौहान का कब्जा ज्यादा दिनों तक रह नहीं पाया। एक साल बाद 1192 में वह कुतुबुद्दीन ऐबक के हाथों हार गया और ये नगर मुस्लिम शासकों के कब्जे में आ गया।

राय पिथौरा के अवशेष अभी भी दिल्ली के साकेत,  महरौलीकिशनगढ़ और वसंत कुंज क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं। इस किले की प्राचीरों के खंडहर अभी भी कुतुब मीनार के आसपास के क्षेत्र में आंशिक रूप से देखे जा सकते हैं।
किला राय पिथौरा यानी लालकोट दिल्ली के सात प्राचीन नगरों में से एक है। इस किला में कुल 28 बुर्ज हुआ करते थे। इसके बुर्ज बिल्कुल नष्ट प्राय हो चुके हैं। अब इसमें किला के नाम पर कुछ बुर्ज और दीवारें ही बची हैं। इस किले में बुर्ज नंबर 15 सबसे बड़ा बुर्ज है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने इसका संरक्षण किया है।


आजकल महरौली बदरपुर रोड (एमबी रोड ) कुतुबमीनार से अधचीनी के बीच इस किले को काटती हुई जाती है। इस किले का विस्तार जितने हिस्से में था उसमें अब दक्षिण दिल्ली की तमाम नई नई कालोनियां बस चुकी हैं। इसलिए अब किले का पूरा घेरा अब पुनर्स्थापित करना मुश्किल है। पर इसमें किसी जमाने में कुल 13 दरवाजे हुआ करते थे।

दिल्ली के प्राचीन शहरों में से एक जहांपनाह की एक दीवार किला राय पिथौरा से मिलती है। इस दीवार को संरक्षित किया गया है। मुहम्मद बिन तुगलक ने सीरी और किला राय पिथौरा के बीच जहांपनाह नामक नगर बसाया था।

कैसे पहुंचे  आप मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन से उतरने के बाद मालवीय नगर थाने की तरफ बढ़े। यानी साकेत मॉल की उल्टी तरफ गीतांजलि कालोनी के सामने किला राय पिथौरा का परिसर है। बस नंबर 680 और 534 किला राय पिथौरा से होकर गुजरती है। परिसर के अंदर एक सुंदर पैदल चलने के लिए ट्रैक बनाया गया है। बीचों बीच एक छोटा सा संग्रहालय और चित्र प्रदर्शनी है, जहां दिल्ली के इतिहास से रुबरू हुआ जा सकता है। इस इमारत के ऊपर ही पृथ्वीराज चौहान की प्रतिमा स्थापित की गई है।




06 मीटर चौड़ी दीवार हुआ करती थी किला राय पिथौरा की

18 मीटर तक ऊंचाई थी कई जगह किले की दीवार की

13 दरवाजे हुआ करते थे किला राय पिथौरा में प्रवेश के लिए। 




 -vidyutp@gmail.com  

( QUILA RAI PITHAURA, DELHI, LALKOT  ) 



Sunday, October 15, 2017

रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे...

सन 1853 में भारत में जब मुंबई से थाणे के बीच पहली बार रेल चली तो यह एक आश्चर्यजनक घटना थी। पर अगले दो दशक में देश के कई हिस्सों में रेल की सिटी पहुंच गई। न सिर्फ लोग रेलगाड़ियों के सफर का आनंद ले रहे थे, बल्कि लोकगीतों और गीतों रेलगाड़ियों की चर्चा सुनने को मिली। हिंदी और भोजपुरी में कई गीत और कविताएं रेलगाड़ियों पर लिखी और गाई गईं। तो आइए कुछ गीतों की चर्चा करते हैं।
हिंदी के महान कवि वाराणसी के भारतेंदु हरिश्चंद्र ने रेलवे के बारे में कुछ इस तरह लिखा।
धन्य किहिन विक्टोरिया जिन्ह चलाईस रेल, मानो जादू किहिस दिखाइस खेल... ( भारतेंदु हरिश्चंद्र)
पैसे लेके पास भगावे, ले भागे मोहि खेले खेल, का सखि साजन,  ना सखि रेल।
तो अब भोजपुरी का एक और लोकगीत सुनिए। इस गीत को लखनऊ की मशहूर लोक गायिकी मालिनी अवस्थी ने अपनी मधुर आवाज में की बार गाया है।

रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे,
रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे ।


जौन टिकसवा से बलम मोरे जैहें, रे सजना मोरे जैहें,
पानी बरसे टिकस गल जाए रे, रेलिया बैरन ।।


जौने सहरिया को बलमा मोरे जैहें, रे सजना मोरे जैहें,
आगी लागै सहर जल जाए रे, रेलिया बैरन ।।


जौन सहबवा के सैंया मोरे नौकर, रे बलमा मोरे नौकर,
गोली दागै घायल कर जाए रे, रेलिया बैरन ।।


जौन सवतिया पे बलमा मोरे रीझे, रे सजना मोरे रीझें,
खाए धतूरा सवत बौराए रे, रेलिया बैरन ।।


और अब एक कवि कविता जो रेल गाड़ी के पैसेंजर ट्रेन में भीड़ का चित्रण करते हैं। क्या शानदार शब्द चित्र खींचा है - इलाहाबाद के चर्चित कवि कैलाश गौतम ने – अमवसा के मेला कविता में रेल गाड़ी में भीड़ का चित्रण करते हैं।
खचाखच भरल रेलगाड़ी निहारा
एहर गुर्री-गर्रा ओहर लोली लोला
 बिच्चे में हउवै सराफत से बोला
चपायल  केहूदबायल हौ केहू
 घंटन से उप्पर टंगायल  केहू
केहू हक्का-बक्काकेहू लाल-पीयर
केहू फनफनात हउवै कीरा के नीयर
 बप्पा रे बप्पा दइया रे दइया
तनी हमें आगे बढ़े देत्या भइया
मगर केहू दर से टसकलै  टसकै
टसकलै  टसकैमसकले  मसकै
छिड़ल हौ हिताई-नताई  चरचा
पढ़ाई लिखाईकमाई  चरचा
दरोगा  बदली करावत हौ केहू
 लग्गी से पानी पियावत हौ केहू
अमावास के मेला अमावस  मेला
इहइ हउवै भइया अमावस  मेला।

एक भोजपुरी फिल्म आई थी लागी नाही छूटे रामा. उसके के गीत में रेल गाड़ी की चर्चा कुछ इस तरह से शुरू होती है।
छुक छुक गाडी,  धदे पइसा, चल कलकत्ता (लाही नाही छुटे रामा )
एक युवा कवि की कविता सुनिए....
कविता - लोहे के गाड़ी लोहे के पटरीजाए के बा टाटा नगरी
बचपन में स्कूली कोर्स में एक कविता थी
रेल हमारी, लिए सवारी, काशी जी से आई है।
भोजपुरी के गीतकार उमाकांत वर्मा फिल्म पिया के प्यारी में एक गीत लिखते हैं – आइल तूफान मेल गड़िया हो साढे तीन बजे रतिया....

अगर हिंदी फिल्मों की बात करें तो इसके कई गीत रेलगाड़ियों के आसपास घूमते हैं। साल 1974 की फिल्म दोस्त का गीत सुनिए - गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है, चलना ही जिन्दगी है, चलती ही जा रही है...इसे गाया था बड़े भाव से किशोर कुमार ने। ये फिल्म दुलाल गुहा ने बनाई थी।

एक और फिल्मी गीत देखिए - छुक छुक छुक छुक रेल चली . चुनू मुनू आए तो ये खेल चली ( 1959 में बनी फिल्म सोने की चिड़िया का ये गीत बच्चों की लोरी की शैली में है।

अशोक कुमार की फिल्म आशीर्वाद ( 1968 ) में ये गीत देखिएगा – रेलगाड़ी रेलगाड़ी, रेलगाड़ी रेलगाड़ी, छुक छुक छुक छुक बीच वाले स्टेशन बोले रुक रुक रुक। इस गीत को अशोक कुमार ने खुद अपनी आवाज में ही गाया है। संगीतबद्ध किया था वसंत देसाई ने। गीत के लेखक थे हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय।  इस गीत की आगे की लाइनें सुनिए -  बीच वाले स्टेशन बोलें, रुक रुक रुक रुक , ब्रह्मपुर धरमपुर ब्रह्मपुर , मांडवा खंडवा , रायपुर जयपुर , तालेगांव मालेगांव , नेल्लोर वेल्लोरे, शोलापुर,कोल्हापुर , कुक्कल डिंडीगुल , मच्छलीपट्नम बींबलीपट्नम , ऊंगोल नंदीगुल , कॉरेगांव, गोरेगांव , ममदाबाद अमदाबाद अमदाबाद ममदाबाद, शोल्लुर कोन्नुर शोल्लुर कोन्नुर,  छुक छुक छुक छुक।
ये गीत पूरी तरह बच्चों का गीत था। इस गीत पर नन्हे मुन्ने बच्चों ने खूब मजा लिया है। क्या आपको भी कोई रेलगाड़ी वाला गाना या कोई कविता याद आती है तो बताइए ना।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य  ( RAIL, MOVIE SONGS, POEMS, BHOJPURI )