Monday, August 14, 2017

पटना संग्रहालय और कैमूर की मुंडेश्वरी देवी

अग्नि की प्रतिमा (कैमूर ) 
बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटना संग्रहालय और बिहार के कैमूर जिले के मुंडेश्वरी का बड़ा गहरा संबंध है। संग्रहालय में प्रदर्शित कई विलक्षण मूर्तियां बिहार के कैमूर जिले से प्राप्त की गई हैं।

इससे साफ जाहिर होता है कि बिहार के कैमूर जिले में इतिहास के अलग अलग कालखंडों में मूर्तिकला, मंदिर और स्थापत्य को तत्कालीन राजाओं ने कितनी प्रमुखता दी थी। पटना संग्रहालय में 10 से ज्यादा प्रतिमाएं बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित कैमूर जिले के मुंडेश्वरी से प्राप्त की गई हैं। ये मूर्तियां कई मायने में विलक्षण हैं। इससे ये भी साबित होता है कि मुंडेश्वरी इतिहास में हिंदू सभ्यता संस्कृति का बड़ा केंद्र था, जो अब बिसार दिया गया है। 

हरिहर की प्रतिमा (कैमूर ) 
सातवीं सदी की अग्नि देवी की प्रतिमा 

हमें संग्रहालय मे सातवीं सदी की बनी अग्नि की प्रतिमा दिखाई देती है जो मुंडेश्वरी कैमूर से प्राप्त हुई। पत्थर की इस प्रतिमा में अग्नि को एक देवी के रूप में चित्रित किया गया है। 

देवी के मुख्य के चारों तरफ अग्नि प्रज्जवलित होते हुए चित्रित किया गया है, इससे यह परिलक्षित होता है कि यह अग्नि देवी की प्रतिमा है। देवी के गले में माला है और एक हाथों से वह आशीर्वाद देती हुई प्रतीत होती है।


हरिहर की विशाल प्रतिमा  - अगली प्रमुख प्रतिमा है हरिहर की। यह छठी शताब्दी में निर्मित है। यह प्रतिमा खड़ी अवस्था में है। इसका ऊपरी भाग खंडित हो गया है, पर संग्रहालय में उसे संरक्षित करके रखा गया है। हरिहर यानी शिव और विष्णु एक साथ। प्रतिमा के सिर पर विशाल मुकुट बना हुआ है। पांव के पास दो गण उनकी अराधना में लगे हुए दिखाई दे रहे हैं। भगवान आशीर्वाद देने की मुद्रा में हैं। उनके चेहरे पर एक खास किस्म के संतोष का भाव दिखाई देता है।


शिव पुत्र कार्किकेय (कैमूर ) 
शिव पुत्र कार्तिकेय की प्रतिमा - छठी शताब्दी की ही कार्तिकेय की प्रतिमा पटना संग्रहालय में देखी जा सकती है। यह भी मुंडेश्वरी कैमूर जिले से प्राप्त की गई है। कार्तिकेय शिव के पुत्र हैं गणेश जी के भ्राता।
कार्तिकेय की प्रतिमा का एक हाथ भंग हो गया है।

पर प्रतिमा की भाव भंगिमा देखते ही  बनती है। कार्तिकेय के साथ देवी भी खड़ी दिखाई देती हैं। प्रतिमा काले पत्थरों से बनाई गई है। देवता के कमर में नक्काशीदार कमरबंद देखा जा सकता है।


छठी शताब्दी के सूर्य  देव की प्रतिमा

सूर्य छठी शताब्दी (कैमूर ) 
और आइए अब देखते हैं छठी शताब्दी की सूर्य की प्रतिमा को। आम तौर पर सूर्य की प्रतिमाएं देश में कम ही देखने को मिलती हैं। पर कैमूर के मुडेश्वरी में सूर्य की प्रतिमा का भी निर्माण हुआ था। यह भी मुंडेश्वरी से प्राप्त की गई अदभुत प्रतिमा है। सूर्य देव के सिर पर विशाल मुकुट देखा जा सकता है। 

प्रतिमा के सिर के चारों तरफ गोलाकार आकृति उनके सूर्य होने का बोध कराती प्रतीत होती है। उनके दोनो हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में हैं। उनके पांव के दोनों तरफ एक पुरुष और स्त्री की कृति बनी हुई है। हालांकि स्त्री की कृति भंग हो गई है। पर सूर्य को दर्शन करना अदभुत अनुभूति है। इस मूर्ति से यह भी पता चलता है कि बिहार में सूर्य पूजा की पुरानी पंरपरा रही है। बिहार के देव (औरंगाबाद ) में शिव का अति प्राचीन मंदिर भी है। 

पार्वती की प्रतिमा  (कैमूर ) 

छठी शताब्दी की देवी पार्वती 

पटना संग्रहालय में छठी शताब्दी की पार्वती की प्रतिमा भी प्रदर्शित की गई है। यह भी मुंडेश्वरी कैमूर से प्राप्त की गई है। पार्वती के चार हाथ दिखाए गए हैं। उनके पांव के दोनों तरफ दो बालक बने हैं। देवी की प्रतिमा की सिर से लेकर पांव तक की बनावट विलक्षण है। चेहरे पर एक खास तरह की ममता दिखाई देती है।


ब्रह्मा और कार्तिकेय की अदभुत प्रतिमाएं – 

संग्रहालय के प्रांगण में मुंडेश्वरी से ही प्राप्त ब्रह्मा और कार्तिकेय की प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं। ये दोनों प्रतिमाएं भी छठी शताब्दी की  निर्मित हैं। हालांकि की ब्रह्मा जी की प्रतिमा खंडित हो गई है। यह लाल बलुआ पत्थर से बनी हुई प्रतिमा है। इसका सिर खंडित हो चुका है। साथ में दो देवताओं की और भी प्रतिमा है जो खंडित हो चुकी है। ब्रह्मा जी बैठे हुए मुद्रा में हैं।


कार्तिकेय की जो प्रतिमा बाहर रखी गई है वह संग्रहालय के गैलरी में रखी प्रतिमा से अलग है। लाल बलुआ पत्थर से बनी यह प्रतिमा भी काफी विलक्षण है। इन तमाम प्रतिमाओं को देखकर लगता है कि छठी से आठवीं शताब्दी तक कैमूर जिले का मुंडेश्वरी क्षेत्र मूर्तिकला का बड़ा केंद्र रहा होगा। तभी यहां से देवताओं की इतनी सुंदर प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य  (KAIMUR, MUNDESHWARI, ART, SCULPTURE, PATNA , BIHAR ) 
कैमूर जिले के मुंडेश्वरी से प्राप्त कार्तिकेय की प्रतिमा। 








1 comment:

  1. सुन्दर मूर्तियाँ। आपने काफी शानदार चित्र खींचे हैं। हमारे इतिहास की अनुपम धरोहर है ये।

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