Friday, August 4, 2017

हीनवा बार्डर पर के फौजी भतार मांगेले....

कई साल बाद अपने जिले की शादी में शामिल होने का मौका मिला तो ये देखने में आया कि शादी में भोज की पुरानी परंपराएं खत्म होती जा रही हैं। गांव में अब शहरीकरण हावी होता जा रहा है। बचपन के भोज याद आते हैं जब हम पातं में बैठकर खाया करते थे। पर अब यह परंपरा गांवों में भी खत्म हो गई है। इस बार देख रहा हूं कि शहर के बुफे सिस्टम ने गांव में दस्तक दे दी है।

तो गांव में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। आज शाम तिलक आने वाला है। तिलकहरु लोगों के लिए बिस्तर गद्दे का इंतजाम शहर के टेंट हाउस से किया गया है। खाने के लिए अलग से टेंट लगाया गया है। शाम होते ही बुफे सिस्टम के टेबल सज गए। इतना ही नहीं खाना परोसने के लिए शहर से लड़कियां बुलाई गई हैं, जो यूनीफार्म में आकर काउंटरों पर खड़ी हो गईं। हालांकि गांव के काफी लोग अभी भी बुफे सिस्टम में खाने में संकोच करते हैं। पर हर गांव के सड़क से संपर्कित हो जाने के बाद शहर से तमाम आधुनिक सुविधाएं जुटाना अब आसान हो गया है।  

बारात निकलने की तैयारी हो रही है। इससे पहले काली पूजा और भड़सार की पूजा होती है। महिलाएं काली पूजा के लिए सजधज कर निकलती हैं। इनके साथ बैंड बाजा और लौंडा नाच भी होता है। लौंडा नाच तो भोजपुरी समाज का अभिन्न अंग है। एक पुरुष महिला बनकर नाचता है। कमाल है कि वह घंटो नाचता है पर थकता नहीं है। उसका अंग संचालन अदभुत होता है। मैं पक्का कह सकता हूं कि शकीरा भी इतनी देर तक नहीं नाच सकती। बैंड बाजा के साथ एक गायक भी होता है जो भोजपुरी गीत गाता है। 
मुझे याद आता है कि किसी जमाने में ऐसे मौके पर घोड़ा नाच भी होता था। एक आदमी घोड़े के मुखौटे के अंदर घुसकर नाचता था। अब उस तरह का नाच कम होता जा रहा है। पर इस बार लौंडा नाच के साथ बिंदास होकर हमारे घर की बेटियां भी नाच रही हैं। पहले उन्हें इस तरह उन्मुक्त होकर नाचते नहीं देखा था। यहां गांव में भी अब टीवी के सैकड़ों चैनल आ गए हैं उसका ये असर है।


बंद हो गई कानू की भड़सार - चरपुरवा गांव में किसी समय बगीचे में भड़सार हुआ करता था। यहां स्थायी चूल्हा बना था, जहां कानू आकर चना, जौ आदि भूनते थे। अलग अलग घर के लोग अपनी जरूरत के मुताबिक अनाज भुनवाते थे। पर अब लाभ कम होने के कारण कानू ने अपना काम बंद कर दिया है। दूसरे रोजगार में लग गया है। पर शादी में उसकी रस्म अदायगी होनी है, सो कानू अपने झोले में अनाज भून कर लाया है। भड़सार पूजा की रस्म निभाई गई। शाम को बारात निकल पड़ी। अलग अलग 15 बुलेरो गाड़ियों में। अब ज्यादातार बाराती बुलेरो में ही जाते हैं। पर किसी जमाने में मैंने ट्रैक्टर और बैलगाड़ी से भी बारात जाने का आनंद उठाया है। नजदीक की बारात हो तो लोग पैदल भी जाते थे।

भोजपुरी शादी में बारात के शामियाने में नाच या ड्रामा हो  तो उसका आकर्षण बढ़ जाता है। अमरपुर गांव में खेतों में डिजाइनर शामियाना लगा हुआ है। रात 10 बजने के साथ ही चौकी पर बने मंच पर नाच शुरू हो गया। पांच नर्तकियां हैं। एक चुटुकुलेदार एनाउंसर भी है। पहले सरस्वती वंदना उसके बाद भोजपुरी के हिट नंबरों पर डांस शुरू हुआ। एक साथ दो या तीन नर्तकियां नाच रही हैं। लोग फरमाइसी गाने भेज रहे हैं। पैसे लुटा रहे हैं। कई रसिया लोग तो मंच पर चढ़कर डांसर के साथ नाचने भी लग जा रहे हैं।

हमारे महुआ चैनल के गायक रहे अजीत आनंद के कई गीत आजकल इन नाच में हिट हो रहे हैं... जूलिया नाचेले....जूलिया का मांगे ले...जूलिया बार्डर पर फौजी भतार मांगेले...हीनवा नाचेले ....हीनवा का मांगेले ....हीनवा सिलवट पर लोढ़ा दमदार मांगेले... कई गाने द्विअर्थी तो कई थोड़े गरम टाइप के भी हैं। सुबह के पांच बजने तक नाच होता रहा। 
साल 2016 का सुपर डुपर हिट गीत है - पवन सिंह का- रात पिया बुता के दीया क्या क्या किया...यह गाना तो रात भर में कई बार बजा.. जनता की मांग पर। गांव में एंड्राएड फोन खूब पहुंच गया है, लोग वीडियो बनाने  में मस्त हैं। भोजपुरी इलाके में ऐसे नाच में कई बार लड़ाई होने और गोलियां चलने की नौबत भी आ जाती है। शादी में नाच देखने ऐसे लोग भी पहुंच जाते हैं जो आमंत्रित नहीं होते पर रसिया किस्म के होते हैं। कई बार वे भी लड़ाई का कारण बनते हैं। इस शादी में सब कुछ शांतिपूर्ण निपट गया। दुल्हा दुल्हन लेकर घर की ओर चला और मैं अपने ठिकाने की ओर।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  ( BHOJPURI SHADI, DANCE, SONGS, AJEET ANAND ) 



No comments:

Post a Comment