Saturday, July 15, 2017

फिल्मकारों को भी लुभाता है बेंगलुरु का कब्बन पार्क

बेंगलुरु शहर में कई पार्क हैं। लाल बाग के बाद दूसरा प्रसिद्ध पार्क है कब्बन पार्क। यह विधानसभा और हाईकोर्ट के बिल्कुल पास है। मेट्रो के तीन स्टेशन कब्बन पार्क के आसपास हैं। यह बेंगलुरु शहर का ऐतिहासिक पार्क है। आप अगर बेंगलुुरू का लाल बाग घूम चुके हैं तो हो सकता है कि आपको कब्बन पार्क में कुछ खास नहीं लगे, पर यह बेंगलुर शहर की धड़कन है। कब्बन पार्क कर्नाटक विधानसभा भवन में सचिवालय में और अदालतों का चक्कर लगाने वालों के लिए फुर्सत के पल गुजाने की सुंदर जगह है।

 यह रेलवे स्टेशन और मुख्य बस स्टैंड से काफी करीब है। बेंगलुरू की भरी दोपहरी में भी आप यहां अमराई की छांव पा सकते हैं। पार्क की बेंच पर बैठकर हरीतिमा से संवाद कर सकते हैं। कई लोगों को कब्बन पार्क बोरिंग लगता है तो कई लोगों की खास पसंद है। 1870 में कब्बन पार्क का निर्माण मैसूर के कमिश्नर जॉन मिडे के कार्यकाल के दौरान हुआ। इसका लैंडस्केप मेजर जनरल रिचार्ड शैंकी ने तैयार किया था। पर पार्क का नाम मेजर जनरल मार्क कब्बन के नाम पर पड़ा। मार्क कब्बन मैसूरु को सबसे ज्यादा समय तक सेवाएं देने वाले कमिश्नर थे। उनकी मूर्ति भी पार्क के एक कोने में लगी हुई है। इसे एक पब्लिक पार्क के तौर पर सौ एकड़ में विकसित किया गया था। बाद में इसका विस्तार होता रहा। इस पार्क की देखभाल कर्नाटक सरकार का उद्यान विभाग (हार्टिकल्चर डिपार्टमेंट) करता है। 

पार्क का कोई एक कैंपस नहीं है। पार्क के अंदर से होकर कई सड़के भी गुजरती हैं। इसलिए यह पार्क कई हिस्सों में है। इसमें प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है।आप कब्बन पार्क एमजी रोड, कस्तूरबा रोड, हडसन रोड, अंबेडकर रोड आदि से पहुंच सकते हैं।

हर पार्क के चारों किनारे में टहलने वालों के लिए ट्रैक बना हुआ है। लिहाजा इसमें सुबह दोपहर और शाम हमेशा टहलने वाले मिल जाते हैं। पार्क में आम के पेड़ अच्छी संख्या में है। मार्च की दोपहर में हमलोग पार्क में टहल रहे हैं। पेड़ की छांव में आम टिकोले ताजे ताजे गिरे हैं। हमलोग कुछ टिकोले जमा कर लेते हैं चटनी बनाने के लिए... आपने बचपन में टिकोले खाए हैं क्या नमक मिर्च मिलाकर...हमने तो खूब खाए हैं।

कब्बन पार्क में सिल्वर ओक का पेड़ देखा जा सकता है। दक्षिण भारत में ऑस्ट्रेलिया से लाकर पहला सिल्वर ओक यहां लगाया गया था। पार्क के पास सिटी सेंटर लाइब्रेरी की लाल रंग की कलात्मक बिल्डिंग देखी जा सकती है। समय हो तो लाइब्रेरी में जाकर पढ़ाई भी कर सकते हैं।

हाल में कब्बन पार्क में डांसिंग म्युजिकल फाउंटेन शुरू किया गया है, इसे शाम को देखा जा सकता है। आधे घंटे आप संगीत की सुर लहरियों का आनंद ले सकते हैं। कब्बन पार्क में आप कुछ पुराने पेड़ों के बनी हुई सुंदर कलाकृतियां भी देख सकते हैं।
कब्बन पार्क की सीमा में गवर्नमेंट म्यूजिम, आर्ट गैलरी, एक्वेरियम, प्रेस क्लब, जवाहर बाल भवन, यूथसेंटर, वाईएमसीए, टेनिस पैवेलियन आदि भी देख सकते हैं।

6000 वृक्ष लगाए हैं कब्बन पार्क में
96 प्रजातियों के पेड़ पौधे यहां देखे जा सकते हैं
300 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में विस्तारित है कब्बन पार्क
1870 में पार्क का लैंडस्केप तैयार किया गया।
01 किलोमीटर है बेंगलुरु सिटी स्टेशन से पार्क की दूरी।

कुली फिल्म की शूटिंग हुई थी - अब आपको यह भी बता दें कि अमिताभ बच्चन की सुपर हिट फिल्म कुली की शूटिंग कब्बन पार्क में हुई थी। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान बेंगलुरु में ही अमिताभ बच्चन को पेट में गहरी चोट लगी थी। चोट तब लगी जब बेंगलुरु यूनीवर्सिटी में शूटिंग चल रही थी। कब्बन पार्क में गीत लंबू जी टींगू जी...को शूट किया गया तो,  एक्सीडेंट हो गया रब्बा रब्बा में कब्बन पार्क की लाइब्रेरी दिखाई देती है। फिल्म कुली नंबर वन के गीत मैं तो रस्ते से जा रहा था की पूरी शूटिंग बेंगलुरु शहर में हुई है। इसमें भी कब्बन पार्क दिखता है।
चिन्नास्वामी स्टेडियम में कई रूपों में गांधी जी 


कब्बन पार्क से निकलकर पैदल चलते हुए हमलोग एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की ओर बढ़ते हैं। वही स्टेडियम जहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच होते हैं। स्टेडियम के मुख्य प्रवेश द्वार के बगल में एक पार्क हैं जहां बापू की कई मूर्तियां लगाई गई हैं। साल 1992 में भी मैं यहां पहुंचा था। बापू की मूर्ति को देखकर 25 साल पुरानी यादें ताजा हो गईं। तब कई दोस्त साथ थे, इस बार बेटे साथ हैं।
-vidyutp@gmail.com

 ( CUBBON  PARK, BENGALURU, M CHINNASWAMI STADIUM , GANDHI, BAPU ) 

3 comments:

  1. आज सलिल वर्मा जी ले कर आयें हैं ब्लॉग बुलेटिन की १७५० वीं पोस्ट ... तो पढ़ना न भूलें ...

    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "१७५० वीं बुलेटिन - मेरी बकबक बेतरतीब: ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. कृपया अपने ब्लॉग पर ब्लॉगर का फ़ालोवर वाला विजेट लगाएँ ताकि आप के ब्लॉग की फीड लेने में पाठकों को सहूलियत हो |
    सादर|

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