Wednesday, July 5, 2017

कोलार गोल्डफील्ड्स - कभी धरती उगलती थी सोना

बंगारपेट से केजीेफ जाने वाली लोकल बस। 
आपको पता ही होगा कभी भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। हां तो सचमुच सोने की चिड़िया ही था अपना भारत। कर्नाटक के कोलार जिले में प्रसिद्ध सोने की खान हुआ करती थी। कई हजार साल पहले से यहां की खानों से सोना निकला जाता था। 

कोलार गोल्डफील्ड्स का इलाका कोलार जिले के बंगारपेट शहर से 14 किलोमीटर आगे है। ऊंचे नीचे पथरीले इलाकों के बीच यहां सोने की खान हुआ करती थी। कर्नाटक का कोलार शहर वैसे भी बेंगलुरु की तुलना में काफी पुराना नगर है। इस शहर का अस्तित्व दो हजार साल पहले भी मिलता है।

कोलार जिले में बंगारपेट 50 हजार की जनसंख्या वाला घनी आबादी में बसा हुआ शहर है। मैं जब पहुंचा हूं देख पा रहा हूं कि कई जगह शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बुल्डोजर चल रहे हैं। यानी शहर में सफाई अभियान जारी है। पर बस स्टैंड काफी साफ सुथरा और खुला खुला सा है।
बंगारपेट से केजीएफ ( कोलार गोल्डफील्ड्स) की दूरी महज 14 किलोमीटर है। 

कोलार जिले की तहसील है केजीएफ 
केजीएफ भी अब आबादी बढ़ने के साथ कोलार जिले की तहसील बन चुका है। राबर्टसनपेट इसका मुख्यालय है। हालांकि अब यहां सोना नहीं निकलता पर गोल्डफील्ड्स की विशाल टाउनशिप यहां बन चुकी है। सोना निकालने वाली कंपनी भारत गोल्डमाइन्स लिमिटेड की यहां कालोनी है। इस इलाके में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड का भी प्लांट और उसकी स्टाफ कालोनी भी है। यह डोड बेटा पहाड़ी क्षेत्र में पड़ता है। 

साल 2001 के बाद सोना नहीं निकलता 
साल 2001 के बाद केजीएफ से सोना निकलना बंद हो गया है। पर कोलार से सोना निकालने का इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि हड़प्पा काल में जो आभूषण मिले हैं उनका सोना भी कोलार से निकला हुआ प्रतीत होता है। क्योंकि यहां जिस तरह कम प्यूरिटी वाला सोना निकलता था वह प्राचीन काल के आभूषणों से काफी मिलता था। यहां गुप्त काल और चोल शासन में भी सोना निकाला जाता था।
कोलार - इन पहाड़ो के नीचे दबा था ढेर सारा सोना 
 मैसूर राज्य के शासन में यहां बदस्तूर सोना निकाला जाता रहा। 1802 में और फिर ब्रिटिश शासन में 1875 के बाद यहां से सोना निकाला जाता रहा। जब पूरा इलाका ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया तो कोलार के सोने की खान पर ब्रिटिश अधिकारियों की नजर पड़ी। उन्होने यहां प्रयाप्त शोध के बाद खुदाई कराई। खूब सोना निकाला। इस सोने के साथ ही यहां बड़ी आबादी वाली टाउनशिप भी बनी। सोने के खान के कारण केजीएफ में दो बड़ी टाउनशिप राबर्टसनपेट और एंडरसनपेट का निर्माण ब्रिटिशकाल में ही हो गया था। यहां ब्रिटिशकाल में होटल, क्लब, बार, आधुनिक बाजार के साथ उच्चस्तरीय जीवन शैली देखी जा सकती थी।
जब सोना निकलता था तो गुलजार था केजीएफ 
देश आजाद होने के बाद 1962 में कोलार की सोने की खान भारत सरकार की कंपनी भारत गोल्डमाइन्स लिमिटेड के कब्जे में आ गई। इसके बाद कई दशक तक यहां की खानों से सोना निकला और केजीएफ गुलजार रहा। भारत गोल्डमाइन्स लिमिटेड के निदेशक कभी मोरारजी देसाई भी रह चुके थे। पर साल 2001आते आते यहां के खानों का काफी हद तक दोहन हो चुका था। सोना कम हो गया और निकालने का खर्च काफी बढने लगा। लिहाजा सोना निकालने का काम बंद हो गया। पर केजीएफ के कर्मचारी इस बंदी के बाद अदालत में चले गए। केजीएफ को लेकर अदालती कार्यवाही साल 2016 तक जारी थी। हालांकि अभी कोई नतीजा नहीं निकला है।


कोटिलिंगेश्वर मंदिर के दर्शन के बाद वापसी में मैं मंदिर के सामने से बंगारपेट की बस का इंतजार कर रहा हूं। पर मैं गलती से केजीएफ जाने वाली बस में चढ़ जाता हूं। फिर गलती पता चलने पर रास्ते में बीईएमएल की कालोनी के पास उतर जाता हूं। आधे घंटे बाद पीछे से दूसरी बस बंगारपेट वाली आती है फिर उसमें सवार हो जाता हूं। बंगारपेट से कोलार की बस लेता हूं। फिर कोलार से बेंगलुरू की बस पर इस बार केआरपुरम तक का ही टिकट लेता हूं, क्योंकि मुझे केआरपुरम में अपनी एक बहन से मिलने जाना है, बरसों बाद।  
-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email - vidyutp@gmail.com
( KOLAR, GOLD FIELDS, KGF, BANAGARPET, KARNATKA, KRSTC ) 


2 comments:

  1. अच्छी जानकारी

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  2. पर क्या गोल्ड माइंस में आज भी घूमने जाने देते हैं

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