Friday, July 7, 2017

कोटिलिंगेश्वर मंदिर कोलार – 108 फीट ऊंचा शिवलिंगम

दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग कहां है, अगर ये सवाल पूछा जाए तो इसका उत्तर होगा कर्नाटक के कोलार जिले में। कोलार से 34 किलोमीटर दूर कोटिलिंगेश्वर का अनूठा शिव मंदिर है। यहां न सिर्फ अनूठा शिवलिंगम है बल्कि यहां अनगिनत शिवलिंगम की स्थापना की गई है। मुख्य शिवलिंगम के आसपास मौजूद लाखों शिवलिंग के दर्शन किए जा सकते हैं।

कोटिलिंगेश्वर धाम कर्नाटक के कोलार जिले के गांव काम्मासांदरा में है। यहां महादेव शिव का जो रूप दिखाई देता है वह अन्यत्र दुर्लभ है। यह दुनिया भर में अपनी तरह का इकलौता मंदिर है। मुख्य शिवलिंगम मंदिर का आकार ही शिवलिंग के रूप में ही है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग है। इस की ऊंचाई 108 फीट है। इस विशाल शिव-लिंग के सामने भव्य और विशाल नंदी की प्रतिमा स्थापित की गई है। नंदी प्रतिमा की ऊंचाई 35 फीट है। वह 60 फीट लंबे, 40 फुट चौड़े और 4 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थित है।

इस विशाल शिव-लिंग के चारों ओर देवी मां, श्री गणेश, श्री कुमारस्वामी और नंदी महाराज की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर परिसर में कोटिलिंगेश्वर के मुख्य मंदिर के अलावा 11 मंदिर और हैं। इनमें ब्रह्माजी, विष्णुजी, अन्न्पूर्णेश्वरी देवी, वेंकटरमानी स्वामी, पांडुरंगा स्वामी, पंचमुख गणपति, राम-लक्ष्मण-सीता के मंदिर प्रमुख हैं। मंदिर 15 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर का निर्माण स्वामी संभा शिवा मूर्ति द्वारा 1980 में कराया गया। तब यह संकल्प लिया गया था कि परिसर में एक करोड़ शिवलिंगम की स्थापना कराई जाएगी।

भक्त कराते हैं शिवलिंगम की स्थापना - आखिर मुख्य मंदिर के आस-पास लाखों शिवलिंग क्यों स्थापित किए गए हैं। दरअसल यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होने पर यहां शिवलिंगम की स्थापना कराते हैं। इस तरह यहां शिवलिंगम की संख्या बढ़ती जाती है।  भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक फीट से लेकर 3 फीट तक के शिवलिंग अपने नाम से यहां स्थापित करवाते हैं। कहा जाता है कि अब इन शिवलिंगों की संख्या करीब 1 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

सड़क से मंदिर की ओर जाते समय ही दोनों तरफ छोटे छोटे मंदिरों में स्थापित शिवलिंगम दिखाई देने लगते हैं। मुख्य प्रवेश द्वार से पहले छोटा सा बाजार है। यहां प्रसाद खिलौने आदि की दुकानें हैं। जूता चप्पल स्टैंड में अपनी पादुकाएं जमा कराने के बाद जब आप आगे बढ़ते हैं तो मंदिर में प्रवेश के लिए 20 रुपये का टोकन लेना पड़ता है। यह सबके लिए अनिवार्य है। इसके बाद लंबे घुमावदार रास्ते से मंदिर में प्रवेश करना पड़ता है। मंदिर के अंदर आप जहां भी नजर दौड़ाएं सिर्फ शिवलिंगम ही नजर आते हैं।

ऐसी भी मान्यता है की मंदिर परिसर में मौजूद दो वृक्षों पर पीले धागे को बांधने से मनोकामनाएं पूरी होती है। खास तौर पर लोग यहां शादी-ब्याह में आने वाली अड़चनें दूर कराने के लिए मनौती मांगने आते हैं।

मंदिर परिसर में संस्कार हॉल, ध्यान कक्ष और श्रद्धालुओं के लिए आवास का निर्माण भी कराया गया है। मंदिर प्रबंधन की ओर से निर्धन-गरीब परिवारों की कन्याओं का विवाह नाममात्र का शुल्क लेकर करवाया जाता है। महाशिवरात्रि पर तो इस मंदिर की छटा देखते ही बनती है। तब यहां श्रद्धालुओं की संख्या 2 लाख तक पहुंच जाती है।

मंदिर खुलने का समय – सुबह 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक मंदिर खुला रहता है। प्रवेश शुल्क 20 रुपये है। शिवलिंगम स्थापना कराने का शुल्क 6 हजार रुपये है। मंदिर के पास रहने के लिए अतिथिगृह भी बना हुआ है।

कैसे पहुंचे – कोलार जिले के प्रमुख शहर बंगारपेट के बस स्टैंड से कोटिलिंगेश्वर के लिए हर आधे घंटे पर एक स्थानीय बस खुलती है। 
बस स्टैंड में बसों का टाइमटेबल लगा हुआ है। बंगारपेट से कोटिलिंगेश्वर की दूरी 14 किलोमीटर है। वहीं केजीएफ से मंदिर की दूरी 8 किलोमीटर है। केजीएफ से भी मंदिर के लिए हमेशा बसें चलती रहती हैं।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( KARNATKA 38, KOTILINGESHWARA TEMPLE, LARGEST SHIVALINGAM, KOLAR, KGF, SHIVA, BANGARPET )

2 comments:

  1. असंख्य शिवलिंग,

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  2. बहुत बढ़िया जगह लगी हम भी यहां पर घूमकर आए थे

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