Tuesday, June 27, 2017

बेंगलुरू से श्रवणबेलगोला, बाहुबली के पास

इस बार बेंगलुरु आया हूं तो श्रवणबेलगोला जाने की इच्छा है। एक दिन सुबह निकल पड़ता हूं इस महान जैन तीर्थ के लिए। हालांकि मार्च 2017 के आखिरी दिनों में भारतीय रेलवे ने श्रवणबेलगोला के लिए एक नियमित ट्रेन का संचालन भी शुरू कर दिया है। इंटरसिटी एक्सप्रेस 22679 शाम को 6.15 बजे चलती है हासन के लिए। ट्रेन 133 किलोमीटर का सफर करके श्रवणबेलगोला 8.10 बजे पहुंचती है। पर सुबह जाकर शाम को बेंगुलुरू लौटने के लिहाज से इस ट्रेन का समय मुझे मुफीद नहीं बैठ रहा है। वैसे यशवंतपुर से सुबह सात बजे कारवार एक्सप्रेस है श्रवणबेलगोला जाती है। यह ट्रेन सुबह साढ़े दस बजे हासन पहुंचा देती है। इस रेलवे स्टेशन का स्टेशन कोड एसबीजीए (एसबीजीए) है। मैंने बस से सफर करने का तय किया है।
श्रवणबेलगोला के लिए पैकेज भी - कर्नाटक स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन श्रवणबेलगोला,बेलुर और हेलेबीडू का एक दिन का टूर पैकेज भी संचालित करता है। इसके लिए बस सुबह 6.30 बजे बेंगलुरु के बादामी हाउस से संचालित होती है। अगर आप बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन के आसपास रहते हैं तो इस पैकेज को ले सकते हैं। ये पैकेज 800 रुपये का नॉन एसी बस से और 950 रुपये का वोल्वो बस से हैं। ये टूर पैकेज आप कर्नाटक पर्यटन के बादामी हाउस दफ्तर से प्राप्त कर सकते हैं। यह बेंगलुरु रेलवे स्टेशन के पास ही स्थित है। आराम से यात्रा करने वालों के लिए पैकेज बेहतर है। 
हिरीसावे से भी मुड़कर जा सकते हैं श्रवणबेलगोला 

बेंगलुरु से श्रवणबेलगोला की दूरी वाया चेनेरायपटना 157 किलोमीटर है। मेजेस्टिक बस स्टैंड से कुछ बसें सीधी भी वहां तक जाती हैं। पर आप जल्दी जाना चाहते हैं तो अच्छा विकल्प है किसी भी हासन की ओर जाने वाली बस में बैठे और चेनेरायपटना उतरकर वहां से श्रवणबेलगोला की दूसरी बस लें। चेनेरायपटना से श्रवणबेलगोला 11 किलोमीटर है।

मैं सुबह नौ बजे के आसपास बेंगलुरु सिटी के सामने मैजेस्टिक बस स्टैंड पर पहुंच गया हूं। सुबह का नास्ता नहीं किया है। हालांकि मैजेस्टिक बस स्टैंड परिसर में नास्ते और भोजन के लिए अच्छे कैफेटेरिया हैं पर मैं नास्ते का विचार छोड़कर पहले हासन जाने वाली बस की तलाश करता हूं। बस नौ बजे चल पड़ती है। बेंगलुरु शहर के भीड़भाड़ वाले रास्तों को पार करती हुई बस यशवंतपुर का इलाका पार करती है। बस में ज्यादा भीड़ नहीं है। कुछ सवारियां रास्ते में चढ़ती हैं। बस यशवंतपुर के बार बेंगलुरू के बाहरी इलाके पेन्नेमा में दाहिनी तरफ नए बने बसेसवरा बस स्टैंड में जाकर कुछ मिनट रुकती है।
चेनेरायपटना और श्रवणबेलगोला के बीच विशाल सरोवर 

यह बस स्टैंड काफी विशाल और शानदार बना है। उत्तर भारत के राज्यों को ऐसे बस स्टैंड देखकर सीख लेनी चाहिए। बस एनएच 75 पर सरपट भाग रही है। सड़क काफी अच्छी बनी है। यह बेंगलुरू मेंगलुरू हाईवे  है। रास्ते कुणिगल नामक एक तहसील स्तर का शहर आता है। यहां पर बस नेशनल हाईवे छोड़कर शहर के अंदर बने बस स्टैंड में जाती है। मैं यहां खीरा खाता हूं। कुणिगल तुमकुर जिले में आता है। रास्ते में बस ढाबे में रुकी। यहां पर राइस भात की थाली 40 रुपये की है। मैं यहां पर नास्ते या भोजन जो समझ लिजिए ये मिनी थाली खाता हूं। खाना स्वादिष्ट है। उत्तर भारत के हाईवे ढाबों की तरह कोई ठगी नहीं है। सभी वस्तुओं की दरें लिखी हुई हैं। सबसे बड़ी बात की दरें वाजिब भी हैं।

चेनेराय पटना में बस से मैं उतर जाता हूं। ये बस हासन तक जा रही है। चेनेरायपटना हासन से 35 किलोमीटर पहले है। चेनेरायपटना बस स्टैंड के अंदर से ही श्रवणबेलगोला जाने वाली लोकल बस मिली। यह सरकारी बस  है जेएनआरयूएम योजना के तहत चलने वाली। कुल 11 किलोमीटर की दूरी का किराया 15 रुपये है।

श्रवणबेलगोला के रास्ते में एक विशाल सरोवर आता है। इस सरोवर में मछलियां खूब हैं। सरोवर के किनारे ताजी मछलियों की दुकान सजी है। सड़क के दोनों तरफ हरियाली भी खूब है। हम पहुंच गए हैं श्रवणबेलगोला के बस स्टैंड में। वैसे आप अपने वाहन से बेंगलुरु से आ रहे हैं तो आपको चेनेरायपटना तक आने की जरूरत नहीं है। फिर आप चेनेरायपटना से पहले हिरीसावे से ही श्रवणबेलगोला के लिए मुड़ जाएं।  

कुल 616 सीढ़ियों की चढ़ाई - श्रवणबेलगोला के बस स्टैंड से 500 मीटर चलने आगे चलने के बाद विंध्यगिरी पर्वत पर स्थित बाहुबली की प्रतिमा तक जाने के लिए चढ़ाई शुरू होती है। कुल 616 सीढ़ियां चढ़नी है नंगे पांव। सीधी चढ़ाई है। धूप तेज है। पत्थर गर्म हो गए होंगे। तो चप्पल स्टैंड वाले सलाह देते हैं कि बगलवाली दुकान से सूती मोजे खरीद लिजिए। मैं 50 रुपये जोड़ी का एक एंकल कट वाला मोजा खरीद लेता हूं। 
बाहुबली की प्रतिमा तक जाने के लिए विंध्यगिरी पर्वत के नीचे बना प्रवेश द्वार...


प्रवेश द्वार पर चप्पल स्टैंड, क्लाक रूम आदि का इंतजाम है। स्वागत कक्ष में पुस्तकों की एक दुकान है। जैन श्रद्धालुओं के लिए पालकी का भी इंतजाम है। यहां पर पालकी सेवा की दरें लिखी हुई हैं। हालांकि आज पालकी सेवा बंद है।
बाहुबली के दर्शन की आस में कड़ी धूप में सैकड़ो लोग चढ़ाई कर रहे हैं। मैं भी उनका सहयात्री बन जाता हूं। कुछ लोग अपने नन्हें बच्चों को कंधे पर रखकर भी चढ़ाई कर रहे हैं। पर्वतशिखर को काटकर सीढियां बनाई गई हैं। सहारे के लिए लोहे की रेलिंग भी है। बीच में थकने पर सुस्ताने के लिए दो विश्राम स्थल भी बने हैं। पर मुझे विश्राम की इच्छा नहीं। लगता है बाहुबली अपनी ओर लगातार खींच रहे हैं।  
- vidyutp@gmail.com  
( BAHUBALI, SHARVANBELGOLA, GOMATESHWARA, JAIN TIRTH ) 

6 comments:

  1. विद्युत् जी नमस्कार, आप हमें दक्षिण भारत के ऐतिहासिक स्थल घुमा रहे हैं, जो की बहुत प्रसिद्द हैं, कभी उधर जाना हुआ तो आपकी ब्लॉग पोस्ट से बहुत सहायता मिलेगी. धन्यवाद...

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  2. सुन्दर पोस्ट. काफी जानकारी दी है जिससे नए घुमक्कड़ों को सहायता मिलेगी.

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    1. धन्यवाद नैनवाल जी

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  3. आपको पढने की अब तो आदत सी हो चली है , अच्छा है आपके साथ ही भ्रमण भी हो रहा है और अनमोल जानकारियाँ भी मिल रही हैं |

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