Sunday, June 25, 2017

गिर गाय...स्नेह और प्रेम की भूखी

छोटी छोटी गइया छोटे छोटे ग्वाल छोटो सो मेरो नंद गोपाल...ये भजन तो आपने सुना ही होगा। गिर नस्ल की गाय को देखकर यही गीत गुनगुनाने की इच्छा होती है। गुजरात की गिर नस्ल की गाय कद काठी में छोटी होती है। पर यह प्रेम और स्नेह की भूखी होती है। आप इसके साथ खड़े होकर कितना भी प्यार और दुलार करें यह आपसे दूर नहीं जाएगी। ऐसा लगता है मानो हमारा इसका कोई जन्म जन्म का रिश्ता हो। बेंगलुरु के कनकपुरा रोड स्थित आर्ट ऑफ लिविंग की गौशाला में 400 से ज्यादा गिर नस्ल की गाय हैं। आश्रम के भोजनालय में इन्ही गायों के दूध से बने खीर, छाछ आदि श्रद्धालुओं को परोसे जाते हैं। इन गायों से मिलने वाला सारा दूध आश्रम में ही खर्च किया जाता है। दूध की बाहर बिक्री नहीं की जाती है।

गुजरात में पायी जाती है गिर गाय- बात गिर गाय की करें तो यह बहुतायत तौर पर गुजरात में पाई जाती है। मूल निवास गुजरात का गिर वन होने के कारण ही इन्हे गिर गाय कहा जाता है। कहा जाता है कि यह वही गाय है जिसे कान्हा जी चराया करते थे। कान्हा जी और बलराम इन गायों के साथ दिन भर जंगल में गुजार देते थे, पर गिर गाय का ममत्व देखकर लगता है कि दिन का इनके साथ पूरा जीवन गुजारा जा सकता है।
आमतौर पर यह गुजरात राज्य के गिर वन क्षेत्र और महाराष्ट्र और राजस्थान के आसपास के जिलों में पायी जाती है। यह गाय अच्छी नस्ल की मानी जाती है। आमतौर पर इस गाय के शरीर का रंग सफेद, गहरे लाल या चॉकलेट भूरे रंग के धब्बे के साथ या कभी कभी चमकदार लाल रंग में पाया जाता है। 
गिर गाय अपनी बेहतरीन रोग प्रतिरोध क्षमता के लिए जानी जाती है। यह नियमित रूप से बछड़े देती है। पहली बार यह तीन साल की उम्र में बछड़ा देती है। गिर गायों में थन भी अच्छी तरह विकसित होते हैं। देखने में छोटी लगने वाली यह गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देती है। कुछ लोग दावा करते हैं कि 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गाय है। पर यह सही नहीं है।
महज 5000 बची हैं गिर गाय - यह भी कहा जा रहा है कि भारत में अब गिर गाय सिर्फ पांच हजार ही बची हैं। भले ही गिर का मूल निवास दक्षिण काठिवाड़ के इलाके में है, पर गिर गाय हर मौसम के लिए अनुकूलित होती है। यह गर्म इलाकों में भी आसानी से रह सकती है। हालांकि गिर गाय के बछड़े अच्छे बैल नहीं होते। यह मूल रुप से दूध देने वाली गाय है। एक गिर गाय की औसत कीमत 60 हजार रुपये से आरंभ होती है। यह कई बार लाखों में भी चली जाती है। 

गिर गाय के मूत्र में सोना - हाल ही में जूनागढ़ एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (जेएयू) के वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण के बाद पाया कि गाय के मूत्र में सोने के कण होते हैं। ये प्रयोग गिर की गायों पर किया गया था।  गुजरात के जूनागढ़ एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने गिर की 400  गांवों के मूत्र के विश्लेषण के बाद पाया कि उसमें सोने के अंश हैं। गाय के एक लीटर मूत्र में तीन मिलीग्राम से लेकर दस मिली ग्राम तक सोने के कण पाए गए। ये सोना आयोनिक रूप में मिला, जोकि पानी में घुलनशील गोल्ड साल्ट है। वैज्ञानिकों का दावा है कि गाय के मूत्र में पाए जाने वाले सोने को निकाला जा सकता है और केमिकल प्रक्रिया से उसे ठोस बनाया जा सकता है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य 
 ( GIR COW, ART OF LIVING, KANAKPURA ROAD ) 




2 comments:

  1. गिर गाय की खूबियाँ बहुत सुनी थी, आज आपने दिखा भी दिया,
    दुबारा गुजरात जाऊँगा तो इनसे मिलकर भी आऊँगा, यहाँ के शेरों से मुलाकात अभी बाकी है।

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