Friday, June 23, 2017

युगादि का दिन श्री श्री के नाम

बेंगलुरु के कनकपुरा रोड पर है आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी का आश्रम। इस बार के बेंगलुरु यात्रा में हमारी इच्छा श्री श्री के आश्रम में जाने की थी। तो संयोग ऐसा बना कि हिंदू नववर्ष यानी युगादि हमने यहां मनाया। बेंगलुरु पहुंचने पर हम उत्तरहाली के पास गुबलाला में रुके थे। यहां हमें पता चला की श्री श्री रविशंकर जी का आश्रम कनकपुरा रोड में निकट ही स्थित है। तो हमने अपने पत्रकार मित्र स्वंय प्रकाश से बात की। स्वयं प्रकाश भाई ने श्री श्री रविशंकर की हिंदी में जीवनी जीना सीखा दिया लिखी है। हिंदी में श्री श्री के जीवन परिचय पर ही बेहतरीन पुस्तक है। इसे आप देश भर के बुक स्टाल पर बिकते हुए देख सकते हैं। 


हमने स्वंय भाई को बताया कि हमलोग आर्ट ऑफ लिविंग का आश्रम देखना चाहते हैं। उन्होंने तुरंत हमारी बात सुजीत भाई से कराई। पर सुजीत भाई यूपी में कहीं दौरे पर थे। उन्होंने श्री श्री के आश्रम में मीडिया सेल में कार्यरत श्रीकुमार जी से बात कराई। उन्होंने तारीख और कितने लोग आएंगे आदि पूछा। तय कार्यक्रम के अनुसार 29 मार्च को युगादि के दिन हमलोग कनकपुरा रोड स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के आश्रम के प्रवेश द्वार पर पहुंचे। यह शहर के बाहर सुरम्य वातावरण में स्थित है। अंदर स्वागत कक्ष पर पहुंचने के बाद श्रीकुमार जी ने आश्रम की वैन सेवा से रसोई घर के पास आने को कहा। रसोई घर के प्रवेश द्वार पर युवा श्रीकुमार जी मुलाकात हुई।

हमलोग सीधे भोजन कक्ष की ओर चले। विशाल हाल में कुर्सी टेबल पर बड़ी संख्या में भक्तगण भोजन कर रहे थे। पर श्री कुमार जी हमारे पूरे परिवार को विशिष्ट अतिथि कक्ष में ले गए। दोनों कक्ष का खाना एक समान ही है। आज युगादि होने के कारण खाने मे मिष्ठान खीर आदि भी था। खाना अत्यंत सुस्वादु था।यह भी पता चला कि आश्रम को भोजन में जो दही और छाछ इस्तेमाल होता है वह आश्रम की ही गायों का होता है।

भोजन के बाद हमलोग आश्रम के अलग अलग हिस्सों में घूमने निकले। सबसे पहले संस्कृत विद्यालय और वहां स्थित मंदिर थे। यहां बालकों के लिए कई सालों का लंबा संस्कृत का पाठ्यक्रम चलाया जाता है। शिक्षा में पारंगत बटुक वेद की ऋचाओं का अत्यंत शुद्धता से उच्चारण करते हैं।

इसके बाद हमने आश्रम का सरोवर कृषि क्षेत्र देखा। आश्रम के परिसर में विशाल पंचकर्म केंद्र है। यहां पर शुल्क देकर पंचकर्म कराया जा सकता है। केंद्र का वातावरण अत्यंत मनोरम है। यह आपको केरल के वन प्रदेश में ले जाता है। नारियल के विशाल वृक्षों पर बंदरों खूब हैं। वे नारियल तोड़कर नीचे फेंक देते हैं। तो थोड़ा उनसे सावधान रहने की सलाह गी गई हमें। पर हमने बंदरों द्वारा फेकें गए नारियल को प्रसाद समझकर उठा लिया। इसके बाद हमलोग आश्रम की ओर से संचालित आयुर्वेदिक हास्पीटल और मेडिकल कालेज देखने गए।
कालेज से लौटने के बाद कुछ वक्त आश्रम के बिक्रय केंद्र में गुजारा। यहां श्री श्री के आश्रम के आयुर्वेदिक उत्पाद कपड़े आदि खरीदे जा सकते हैं। शाम गहराने लगी और हमलोग चल पड़े विशालाक्षी मंडपम की ओर। हर रोज शाम को इस विशाल मंडप में 6.30 से 8.00 बजे तक सत्संग होता है। आज युगादि है तो गुरुदेव लाइव थे दुनिया के किसी और देश से। आधे घंटे से ज्यादा ध्यान के बाद थोड़ा प्रवचन और काशी भाई ने भक्तों के लिए नववर्ष का संदेश दिया। यहां हमारी मुलाकात हिमांशु कालरा से हुई। वे आईआईटी दिल्ली से निकलने के बाद दस साल कारपोरेट जगत में रहे। अब श्री श्री के आश्रम में नदियों को पुनर्जीवित करने की परियोजना की अगुवाई कर रहे हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की 23 छोटी छोटी नदियों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है आर्ट ऑफ लिविंग ने।

-   - विद्युत प्रकाश मौर्य   (ART OF LIVING, KANAKPURA ) 

2 comments:

  1. श्री श्री रवि शंकर जी के इस ठिकाने की सैर कराकर बहुत अच्छा काम किया भाई,
    यदि कभी इस तरफ जाना हुआ तो यहाँ भी अवश्य जाऊँगा।

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