Thursday, June 15, 2017

कलात्मकता का शानदार नमूना - हजार राम मंदिर


देश भर में मर्यादा पुरुषोत्तम  रामचंद्र जी के मंदिर बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। दक्षिण भारत में तो शायद ही कोई मंदिर मिल जाए। पर हंपी में है रामजी का मंदिर। हंपी का यह हजार राम मंदिर द्रविड़ शैली में 15वीं सदी का बना हुआ भव्य परिसर है। हंपी की सैर करते हुए जनाना प्रांगण से आगे बढ़ने के बाद हम रुकते हैं हजार राम मंदिर के सामने। इस मंदिर के उल्टी तरफ कभी विशाल पान सुपारी बाजार हुआ करता था।


हजार राम का मंदिर विजयनगर के राजसी अंचल में स्थित है। यह मंदिर आम आदमी के लिए नहीं खुला था। यह राज परिवार का निजी मंदिर था। इसे राज परिवार के अनुष्ठान के लिहाज से बनवाया गया था। मंदिर की योजना में गर्भ गृह अंतराल, मुख मंडप और उत्तर और दक्षिण में अर्ध मंडप बनाए गए हैं।
हजार राम मंदिर के महामंडप का रुख पूरब दिशा की ओर है। मुख्य मंदिर के चारों ओर तीन श्रेणियों में रामायण की कथा को अत्यंत कलात्मक मूर्तियों में उकेरा गया है। इसमें वाल्मिकी रामायण से प्रेरणा ली गई है। राम के पुत्र लव कुश के सुंदर चित्र भी बनाए गए हैं। मंदिर की दीवारों पर हाथी, घोड़ा पालकी, युद्ध के लिए जाती हुई राजा की सेना आदि के सुंदर चित्र उकेरे गए हैं। 

खास बात है कि मंदिर परिसर में भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा भी स्थापित की गई है। जयदेव ने गीत गोविंद में बुद्ध को विष्णु का नवां अवतार माना था। इस लिहाज से उन्हे इस विष्णु परंपरा के मंदिर में जगह मिली है। मंदिर परिसर में भागवत कथा से जुड़ी मूर्तियां भी हैं। यहां कृष्ण के बाल्यकाल से जुड़ी सुंदर मूर्तियां भी देखी जा सकती हैं। मंदिर की बाहरी दीवारों और स्तंभों पर ग्रेनााइट पत्थरों पर नयनाभिराम नक्काशी की गई है। 

हजार राम मंदिर में सुंदर काले पत्थरों के पालिश किए हुए स्तंभ हैं जिनकी सुंदरता देखते ही बनती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस मंदिर की सुंदरता में खो जाते हैं। यह हंपी एक ऐसा बेजोड़ कलात्मक मंदिर है जिसका सौंदर्य निहारने के लिए आपके पास एक घंटे से ज्यादा का वक्त होना चाहिए।
हजार राम नाम क्यों - हां  एक सवाल मन में सहज ही उठता है कि इस मंदिर का नाम हजार राम क्यों है। ऐसा प्रतीत होता है  कि यहां राम कथा से जुड़े हुए 1000 से ज्यादा चित्र उकेरे गए हैं इसलिए इसका नाम हजार राम रखा गया होगा। 


अनूठी जल प्रणाली से लैस हंपी का शाही अहाता

हंपी की सैर करते करते अब हम महानवमी टिब्बा पहुंच गए हैं। यह वास्तव में विशाल राज प्रांगण है। इसके प्लेटफार्म की ऊंचाई 8 मीटर है। राजकीय प्रयोग में लाया जाना वाले ग्रेनाइट पत्थरों से बना यह विशाल ढांचा है। इसमें जाने के लिए पूर्व-पश्चिम और दक्षिण दिशा से से सीढ़ियां बनी हैं। यहां पर हर साल दशहरा के मौके पर नवमी और विजयादशमी के दिन बड़े राजकीय आयोजन हुआ करते थे। इस अहाते के अंदर एक सुंरग भी है। इससे लगा हुआ एक शाही अहाता भी है। 
शाही अहाता का क्षेत्रफल 59,000 वर्ग मीटर है। ऊंची और दोहरी दीवारों के अंदर इस अहाते में कुल 43 इमारतें हुआ करती थीं। अहाते में जाने के लिए तीन प्रवेश द्वार बने हैं। इसी अहाते में राजा का निवास भी हुआ करता था। इस अहाते में पानी पहुंचाने के लिए सुंदर जल प्रणाली निर्मित की गई थी। इसमें कुल 23 छोटे बड़े हौज थे जिन्हें भरा जाता था।था। संभवतः इसमें तुंगभद्रा नदी से जल लाने का इंतजाम किया गया था। अहाते में एक कुआं भी है। शाही अहाता विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। 


तो यहां नहाती थी रानी - आगे चलने पर हमें रानी स्नान कुंड दिखाई देता है, इसे क्वीन्स बाथ के नाम से जाना जाता है। जो 15 वर्ग मीटर में बना हुआ है। रानी के स्नान कुंड के बाहर विशाल उद्यान बना हुआ  है।

इस कुंड के चारों ओर सुसज्जित बरामदे और बालकोनी बनी हुई है। इन बरामदों की नक्काशियां भी शानदार हैं। हालांकि हमें देश के अलग अलग हिस्सों में शाही बावड़ियां देखने को मिलती हैं। क्वीन्स बाथ कुछ उसी तरह का है, पर यह खास तौर पर रानी के लिए बनाया गया था। रानियां यहां रथ में सवार होकर जल क्रीड़ा करने के लिए आती थीं।

हमारा हंपी का सफर अभी जारी है। हमारी अगली मंजिल होगी हंपी का मशहूर विट्ठल स्वामी का मंदिर तो बने रहिए दाना पानी के साथ।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य  

(HAMPI, MAHNAVMI TIBBA, QUEENS BATH, HAJARRAM MANDIR, ) 

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