Thursday, December 29, 2016

माजुली का पर्यावरण बचाने की मुहिम ((26))

अपनी हरितिमा और पर्यावरण के मामले में माजुली द्वीप अनूठा है। माजुली की हरितिमा बची रहे इसके लिए जरूरी है कि माजुली का पर्यावरण बचा रहे। माजुली को बचाए रखने की मुहिम में न सिर्फ यहां लोग बल्कि देश दुनिया के अलग हिस्सों के लोग रूचि रखते हैं। 

हमें ला मैसन डी आनंदा में एक अनूठी साइकिल दिखाई देती है। हरे रंग की इस साइकिल में दो बैठने की सीटें और दो पैडल लगे हैं। कुछ विदेशी माजुली प्रेमी लोगों ने खास तौर पर यह साइकिल तैयार की और इससे पूरे माजुली की सैर करके लोगों को पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया। फ्रांस के दो कलाकार टीना होलार्ड और हाफिड शोफ ने इस साइकिल को डिजाइन किया। इस साइकिल की यात्रा के साथ साथ नुक्कड़ नाटक पेंटिंग प्रतियोगिताओं आदि से लोगों में जागरूकता लाने की कोशिश की गई।  

माजुली में बैंक और अर्थव्यवस्था - किसी भी जगह की अर्थव्यवस्था को चलाने में बैंकों की प्रमुख भूमिका होती है। कमलाबाड़ी फेरी घाट पर उतरने पर माजुली में स्वागत करता हुआ यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का बोर्ड नजर आता है। यानी यहां पर इस बैंक की शाखा है। गड़मूर बाजार में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा है। यह माजुली का प्रमुख बैंक है। गड़मूर बाजार में ही हमें असम ग्रामीण विकास बैंक की शाखा नजर आती है। यहां यूनाइटेड बैंक और असम ग्रामीण बैंक की दो दो शाखाएं हैं।
असम की सरकार माजुली को लेकर संजीदा है। सितंबर 2016 में माजुली राज्य का 35वां जिला बन चुका है। इससे छोटे सेद्वीप जिले में कलेक्टर और एसपी की पोस्टिंग हो गई है। पर क्या इतने भर से द्वीप का क्षरण रुक जाएगा। यह सवाली कमलाबाड़ी से फेरी पर वापस होते समय माजुली द्वीप को पीछे छूटता देखते हुए सहज ही मन में आता है। दो बार माजुली को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में शामिल करवाने की असफल कोशिश भी हो चुकी है। पर इनसे हासिल क्या होता है। 

माजुली कालेज के असमिया के प्रोफेसर  अबनी कुमार दत्ता कहते हैं कि मैंने एक घर जोरहाट टाउन में बनवा रखा है। रिटायर होने पर वहीं जाकर रहूंगा। 


माजुली की सड़कों पर घूमते हुए दुलियाजान में एक कालेज की प्रोफेसर मामोनी देवी मिलती हैं वह भी माजुली के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर करती हैं। कहा जाता है कि यह द्वीप ब्रह्मपुत्र में कुछ बड़े भूकंप और बड़े बाढ़  आने  बाद बना है।  पर यह जैव विविधता का अदभुत नमूना है। कुल 260 प्रजाति के पक्षी यहां पाए जाते हैं। पर यह 1256 वर्ग किलोमीटर से घट कर अब 50 फीसदी के आसपास रह गया है। कुछ लोग कहते हैं कि जो कटाव की दर है उसमें माजुली अगले 15 से 20 साल में खत्म भी हो सकता है। खास तौर पर साल 1966 से 2008 के बीच माजुली ने काफी कटाव झेला है। हर साल 8.76 वर्ग किलोमीटर की दर से भूमि का कटाव हो रहा है। खास तौर पर 1998 से 2008 के बीच कटाव की दर काफी ऊंची रही है। माजुली के कुल 67 गांव अब तक कटाव के कारण खत्म हो चुके हैं।
हालांकि सरकार ने कटाव रोकने के लिए माजुली में तटबंधों का निर्माण कराया है। हमें दक्षिणापथ सत्र के आसपास ऐसे तटबंध दिखाई देते हैं। पर इसका खास लाभ होता हुआ दिखाई नहीं देता।


1973 में माजुली में एक ब्लॉक दफ्तर की स्थापना हुई
1979 में 26 जनवरी को माजुली को सब डिविजन का दर्जा मिला
2016 के सितंबर में माजुली असम का 35वां जिला बना

अगर प्रशासनिक नजरिए से देखें तो सरकार काइस द्वीप जिले पर पूरा ध्यान रहा है। पर जरूरत इस बात की है कि विश्व भर के पर्यारण में रूचि रखने वाले लोग इस नदी द्वीप के सरंक्षण को लेकर जागरूक हों।

-- vidyutp@gmail.com


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