Tuesday, September 20, 2016

छोड़ चले हम ये गलियां...जाने फिर कब होगा आना...((41))

पोर्ट ब्लेयर से हमारी वापसी की फ्लाइट कोलकाता तक के लिए है। एयर इंडिया की इस उड़ान का समय सुबह 8.35 बजे तय है। मैं सुबह 5 बजे ही जग कर स्नान करके तैयार हो जाता हूं। होटल ड्रिम पैलेस का प्रवास काफी सुखद रहा। हैडो से सुबह 5 बजे से ही मेडिकल वाली बसें चलने लगती है। वादे के मुताबिक मोउनुद्दीन भाई के पास चाय पीने जाता हूं। चाय पीने के बाद होटल ड्रिम पैलेस से चेकआउट कर लोकल बस में बैठ जाता हूं। पांच रुपये का टिकट लेकर गोलघर उतर जाता हूं। वहां से आगे पैदल चल पड़ता हूं, जंगलीघाट,  डेयरी फार्म उसके बाद लांबा लाइन। कोई डेढ़ किलोमीटर पदयात्रा या यूं कहें सुबह की सैर के बाद पौने सात बजे वीर सावरकर हवाई अड्डे के प्रवेश द्वार पर हूं।
छोटे से एयरपोर्ट पर आगमन और प्रस्थान टर्मिनल आसपास ही बने हैं। पोर्ट ब्लेयर का ये एयरपोर्ट जापान ने 1941 से 1943 के बीच अपने शासनकाल में बनवाया था।
पोर्ट ब्लेयर में आखिरी दिन की सुबह। 
भले एयरपोर्ट का भवन छोटा है पर एयर पोर्ट का रनवे पर्याप्त लंबा है। इसके आगे का हिस्सा सेना के हवाले है। सुरक्षा जांच के बाद अंदर पहुंचता हूं। एयर इंडिया के काउंटर पर बोर्डिंग पास के लिए पहुंचता हूं। मुझे मेरी इच्छित सीट मिल जाती है जो मैंने ऑनलाइन जाकर एयर इंडिया के वेबसाइट पर मार्क की थी। यह खिड़की के पास वाली 16ए है। सुबह यहां से चेन्नई के लिए जेट का विमान हमारे विमान से पहले उड़ान भरने वाला है। जेट के पैसेंजर के चेकइन के बाद हमारी बारी आती है। तब तक छोटे से हाल में बैठकर इंतजार। इस दौरान मैं अखबार पढ़ना शुरू करता हूं। इन्फो इंडिया एयरपोर्ट पर उपलब्ध है। यह हिंदी का आठ पन्नों का अखबार है।

एयरपोर्ट पर जितने टीवी लगे हैं उस पर जैन टीवी चैनल आ रहा है। इसमें सुबह के समय धार्मिक कार्यक्रम चल रहा है। इसके बाद रात का पुराना बुलेटिन दुबारा प्रसारित हो रहा है। प्रस्थान लांउज में अंडमान प्रशासन का सरकारी बिक्रय स्टाल सागरिका बना हुआ है। यहां अंदमान की तमाम वस्तुएं उपलब्ध है। कई लोग लकड़ी की वाल हैंगिंग खरीद रहे हैं। मैं यहां से काली मिर्च खरीदता हूं जो मैं नार्थ बे द्वीप पर नहीं खरीद पाया था। सागरिका का बड़ा शो रूम पोर्ट ब्लेयर के मिडल प्वाइंट पर है। आप वहां से जरूर कुछ यादगारी शापिंग करें।
इंतजार अपनी बारी का....पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट पर। 
थोड़ी देर में कोलकाता की उड़ान के लिए घोषणा होती है। सभी लोग दौड़कर लाइन में लग जाते हैं। मानो उन्हे विमान छोड़ जाएगा। टिकट चेक करने के बाद बस में बैठने को कहा जाता है। हालांकि गेट से विमान की दूरी 200 मीटर से ज्यादा नहीं है। पैदल भी पहुंचा जा सकता है। पर हम बस से पहुंचते हैं। कोलकाता को उड़ान भरने वाला विमान ए 319 है। इसमें बैठने की क्षमता ए 320 से कम है। कुल 144 सीटें ही हैं। प्रवेश के लिए दो द्वार खुले हैं। मैं पिछले द्वार से प्रवेश करता हूं। उड़ान संख्या एआई 0788  सुबह 8.35 की जगह विमान 8.50 में उड़ान भरता है। मैं पोर्ट ब्लेयर की धरती को नमन करता हूं, इस उम्मीद के साथ की दोबारा आना होगा। जहाज के कैप्टन पी बोस हैं, क्रू इंचार्ज हैं अदिती।

 मैंने शाकाहारी खाने का पंसद भरा था। पर शाकाहारी थाली खत्म हो गई। मजबूरी में मांसाहारी प्लेट ले लेता हूं। पर यह खाना मुझे भारी पड़ गया। खाने की गुणवत्ता खराब थी। मेरा पेट कोलकाता उतरते ही खराब हो गया। मेरे बगल वाली सीट पर बंगाल के मिदनापुर शहर की दो महिलाएं हैं जो एलटीसी में पोर्ट ब्लेयर घूमने के बाद घर लौट रही हैं। थोड़ी देर उनसे बातें करता हूं। उनकी यात्रा के अनुभव सुनता हूं। फिर अखबार पढ़ता हूं। विमान में कोलकाता का टेलीग्राफ और दूसरे बिजनेस अखबार भी उपलब्ध हैं। 
  
कोलकाता की ओर उड़ान में ...

कोलकाता की इस उड़ान में भी खराब मौसम की उदघोषणा बार बार हुई। आसमान में समंदर के ऊपर यह सुनकर मन घबराता है। 10.05 में सीट बेल्ट बांध लेने का ऐलान हुआ। फिर सीट बेल्ट खोलने का ऐलान नहीं हुआ, पर 10.55 में ऐलान हुआ कि हम थोड़ी देर में कोलकाता उतरने वाले हैं। पहले हरे भरे खेत दिखाई दिए,  फिर सिटी ऑफ जॉय यानी कोलकाता शहर की इमारते दिखाई देने लगीं। अचानक हम आसमान से जमीन पर थे, अब विमान रनवे पर कुलांचे भर रहा था और यात्री अपना अपना मोबाइल  ऑन कर अपने घरवालों को पहुंचने की जानकारी दे रहे थे।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य 
( ANDAMAN, PORT BLAIR, AIR INDIA, FOOD, KOLKATA, BENGAL ) 

अब अंदमान की चालीस कड़ियों में इस यात्रा वृतांत को यहीं विराम...फिर चलेंगे किसी यात्रा पर...जिंदगी यात्रा ही तो है...

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