Friday, September 9, 2016

एक अनूठी दुनिया वांडुर की ओर...((30))

अंदमान के वांडुर में महात्मा गांधी मरीन कांप्लेक्स है। वास्तव में यह 15 द्वीपों का समूह है। ये सभी द्वीप काफी महत्व वाले होने के कारण संरक्षित किए गए है। इन द्वीपों पर कोई आबादी नहीं रहती। वांडुर की दूरी पोर्ट ब्लेयर से 30 किलोमीटर है। यहां दो प्रमुख द्वीप हैं जॉली बॉय और रेड स्कीन। इनमें जॉली बॉय साल के छह महीने बंद रहता है। इस दौरान सैलानियों को रेड स्कीन द्वीप का दौरा कराया जाता है। 
वांडुर जाने वाली बस में

सफर के लिए परमिट जरूरी - हमने रेडस्कीन जाने की तैयारी एक दिन पहले ही कर ली थी। दरअसल इन द्वीपों की सैर के लिए आपको परमिट और टिकट एक दिन पहले ही बनवाना पड़ता है। बिना परमिट के इन द्वीपों पर नहीं जाया जा सकता। ये परमिट मिड्ल प्वाइंट स्थित टूरिज्म विभाग के दफ्तर में बनाए जाते हैं। परमिट की फीस 50 रुपये है। फार्म के साथ आपका कोई परिचय पत्र होना आवश्यक है। रेड स्किन आने जाने का टिकट 750 रुपये का है। अगर भीड़ भाड़ वाला समय न हो तो परमिट और टिकट वांडुर में भी मिल जाता है। पर आप टूरिज्म विभाग से पहले से ही परमिट और टिकट बनवाकर जाएं तो अच्छा रहेगा।

वांडुर के रास्ते में बस से दिखाई देता समंदर 

सुबह हल्की हल्की बारिश हो रही है। मैं अपने हैडो के होटल ड्रीम पैलेस से बस से सुबह 6 बजे ही बस स्टैंड मोहनपुरा के लिए चल देता हूं। दरअसल वांडुर में रेड स्किन के लिए जहाज का समय 8.30 बजे का बताया गया है। बस स्टैंड में पूछताछ काउंटर पर पता चला कि वांडुर की बस 6.30 बजे जाएगी। मुझे बस का नंबर भी बता दिया। पर 6.30 हो गए बस के ड्राईवर और कंडक्टर महोदय कहीं दिखाई नहीं दिए। मेरे अलावा बस में सिर्फ एक सवारी है। खैर 6.35 में अचानक ड्राईवर और कंडक्टर अवतरित हुए और बस चल पड़ी। बस मिडल बाजार, गोलघर  लांबा लाइन (एयरपोर्ट) भातू बस्ती होते हुए आगे बढ़ी। रास्ते में कुछ और लोग चढ़ते गए। हल्की बारिश जारी है। गाराचमा से बसे दाएं मुड़ जाती है। यहां से चिड़िया टापू के लिए एक रास्ता जाता है। चिड़ियाटापू भी अंदमान के दर्शनीय स्थलों में शामिल है। आगे हंफ्रीगंज आता है। हंफ्रीगंज में शहीदों की वेदी है। ये शहीद जापानी सेना के अत्याचार की दास्तां सुनाते हैं।

बस आगे बढ़ती है मंगलूटान आता है। यहां पर मुझे स्टेट बैंक की शाखा दिखाई देती है। रास्ते में बस में स्कूल जाने वाले बच्चे चढ़ते हैं। उनका स्कूल आने पर उतर जाते हैं। मोहनपुरा बस स्टैंड से वांडुर तक का किराया 20 रुपये है। बस हरे भरे ग्रामीण इलाके से होकर गुजर रही है। बारिश के मौसम में ठंडी हवाएं चल रही हैं और नारियल के पेड़ झूम रहे हैं। ये एक सुहाना सफर है। हमारी सड़क समंदर के साथ साथ चल रही है। थोड़ी देर मे वांडुर का बोर्ड नजर आता है। कुछ रेस्टोरेंट दिखाई देते हैं। पर हमें कंडक्टर साहब कहते हैं कि बस में बैठे रहें लौट कर आने पर उतरिएगा। वे हमें दो किलोमीटर आगे एक गांव तक ले जाते हैं। बस वापस चलती है। रास्ते में वांडुर का सी-बीच (समुद्र तट) दिखाई देता है। महात्मा गांधी मरीन कांप्लेक्स का साईन बोर्ड देखकर मैं उतर जाता हूं।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य

    

No comments:

Post a Comment