Friday, July 29, 2016

दिल्ली से अंदमान निकोबार की ओर..((02 ))

अंदमान के वीर सावरकर  एयरपोर्ट के बाहर। 
सालों से अंडमान निकोबार जाने की इच्छा थी। पर समय दूरी और आर्थिक कारणों से ये इच्छा दबी रह जाती थी। पर देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की यात्रा कर लेने के बाद 33 वें प्रदेश के तौर पर अंडमान जाने का मौका 2016 में मिल गया। ये मौका गोआईबीबो डाट काम के अत्यंत रियायती ऑफर के कारण मिल सका। वैसे तो सालों भर अगर आप अंडमान जाना चाहें तो एक तरफ का हवाई किराया दिल्ली से 10 हजार रुपये से कम नहीं होता। अगर आप पानी के जहाज से भी जाना चाहें तो कोलकाता, चेन्नई या फिर विशाखापत्तनम से जाने वाले जहाज का किराया फर्स्ट क्लास में 7500 रुपये प्रति व्यक्ति है। फिर 55 घंटे का सफर। लंबी समुद्री यात्रा में सी सी-सिकनेस का भी खतरा रहता है। हालांकि मेरी दिली इच्छा अंदमान पानी के जहाज से ही जाने की थी। पर ऐसा मौका शायद भविष्य में आए।

अंदमान के मोहनपुरा चौराहा पर गांधी जी की प्रतिमा 
 फिलहाल तो हवाई यात्रा का मौका मिला। 11 जुलाई की सुबह हमारी एयर इंडिया की फ्लाइट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई  अड्डे के टी-3 से थी।  सुबह 6.55 की फ्लाइट का समय बदलकर 7.30 हो गया। इसकी सूचना एयर इंडिया की ओर से फोन करके दी गई। मैं सुबह सुबह टी-3 पहुंच चुका था। हमारा विमान 50 नंबर गेट से उडान भरने वाला था। थोड़ा समय था तो टी-3 पर बुक शॉप में कुछ किताबें देखने लगा। यहां कामसूत्र और बेहतरीन सेक्स कैसे करें जैसी किताबें डिस्प्ले में थी। बगल में हल्दीराम शोरूम था। वहां से कुछ सैनक्स खरीदा। पर एयर इंडिया में तो खाना पीना मिलने वाला था।

जहाज ने दिल्ली से नियत समय पर उड़ान भरी। मुझे मनचाही खिड़की वाली सीट 13 ए मिल गई थी। हमारे कैप्टन थे देवीदत्त मेंहदीरत्ता। तो क्रू की प्रभारी थीं सोनिया सोपोलिया। एयर इंडिया के ज्यादातर एयर होस्टेस उम्रदराज हैं। जबकि निजी विमान सेवाओं में नवयुवतियां दिखती हैं। हमें खाने में परोसा गया शाकाहारी व्यंजन जो मेरी मांग के अनुरूप ही था। उपमा और कुछ अन्य सामग्री के साथ चाय और ब्रेड बंद। जहाज आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम में ढाई घंटे बाद उतरा। यहां 40 मिनट का ठहराव था।

राजीव गांधी वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में राजीव गांधी
हम खराब मौसम से गुजर रहे हैं....

विशाखापत्तनम में काफी लोग उतर गए तो काफी लोग चढ़े भी। हमें विमान में ही रहने को कहा गया। मैं एक बार पहले विशाखापत्तनम से दिल्ली की उडान भर चुका हूं। यहां का एयरपोर्ट काफी साफ सुथरा और सुंदर है।

यहां से आगे की उड़ान के पायलट थे सचिन गुप्ता। क्रू की प्रभारी भी बदल गई थीं। सोमा भूटिया के साथ कुछ नवयुवतियां होस्टेस के तौर पर दिखाई दे रही थीं। जहाज आसमान में था एक बार फिर से.. पर अब दिखाई दे रहा है नीचे सिर्फ समंदर और बादल।
 जब जहाज समंदर के उपर उड़ान भर रहा था तब उदघोषणा हुई कि हम खराब मौसम से गुजर रहे हैं। आप सभी सीट बेल्ट बांध कर अपनी जगह पर ही बैठे रहें। टायलेट का इस्तेमाल न करें. यह सुनकर मानसून के मौसम में मन में कुछ डर जैसा बैठने लगा। पर एक घंटे 50 मिनट के उड़ान के बाद घोषणा हुई की हम जल्द ही पोर्ट ब्लेयर उतरने वाले हैं। अब हमने राहत की सांस ली। पोर्ट ब्लेयर का वीर सावरकर एयरपोर्ट अपेक्षाकृत छोटा है। यहां विमान से उतरने के बाद पैदल ही लांउंज की ओर पहुंच गए। अंदर फोटोग्राफी प्रतिबंधित है। पांच घंटे में हम दिल्ली से 4000 किलोमीटर से ज्यादा दूर अपने देश के एक केंद्र शासित द्वीप प्रदेश में पहुंच चुके थे।

अंदमान निकोबार द्वीप समूह -  एक नजर 




पोर्ट ब्लेयर के हैडो बंदर पर महान तमिल कवि तिरुवललुर की प्रतिमा
कुल  द्वीपों की संख्या -  572 
कुल निवास वाले द्वीप -  37 
कुल लंबाई -     726 किलोमीटर 
कुल क्षेत्रफल   8249 वर्ग  किलोमीटर 
वन क्षेत्र -     7171 वर्ग  किलोमीटर 
दलदली वनक्षेत्र - 671 वर्ग किलोमीटर 
आबादी    3,80581 (2011 की जनगणना)
दूरी पोर्ट ब्लेयर से कोलकाता - 1255 किमी
पोर्ट ब्लेयर से चेन्नई -  1190 किमी
पोर्ट ब्लेयर से विशाखापत्तनम - 1200 किमी

अंदमान का राजकीय वृक्ष - अंदमान पादुक 

राजकीय पशु -    डुंगडुंग

राजकीय पक्षी -   अंदमान वुड पीजन


-         vidyutp@gmail.com



( ANDAMAN N NICOBAR ISLAND, UT, AIR INDIA, FLIGHT, SHIP, PORT BLAIR ) 
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