Friday, December 28, 2012

फिलोमेनिया चर्च – मैसूर शहर का सुंदर इबादत घर

मैसूर शहर का प्रमुख आकर्षण है फिलोमेनिया चर्च। यह देश के प्रमुख सुंदर चर्च में शुमार है। अक्सर मैसूर दर्शन कराने वाली बसें फिलोमेनिया चर्च जरूर जाती हैं। चर्च मैसूर में मीना बाजार के पास स्थित है। आप भी अगर मैसूर में हों तो इस चर्च तक जाना नहीं भूलें। यह एक कैथोलिक चर्च है। इसे संत फिलोमेनिया के सम्मान में बनवाया गया था। 1936 में निर्मित यह चर्च नियो गोथिक वास्तुकला का सुंदर नमूना है। इसकी वास्तुकला जर्मनी को कोलोन केथेड्रल से प्रेरित है।
इस चर्च में रोज सुबह 5.30, 6.15, 7.00 बजे और फिर शाम को 4.00 बजे प्रार्थना होती है। रविवार के दिन सुबह 5.00, 6.00, 7.00, 8.00, 9.00 और शाम को 4.00 बजे प्रार्थना होती है। संत फिलोमेनिया के लैटिन मूल के कैथोलिक संत थे।  वह एक युवा ग्रीक प्रींसेज थीं जो चौथी सदी में हुईं थीं।
जहां अभी फिलोमेनिया चर्च है वहीं पर 1843 में महाराजा कृष्ण वाडियार ने एक चर्च का निर्माण कराया था। कालांतर में इसका भवन ध्वस्त हो गया। बाद में इसी स्थल पर मैसूर के महाराजा ने 28 अक्तूबर 1933 में विशाल चर्च बनवाने के लिए आधारशिला रखी। इस मौके पर महाराजा ने अपने भाषण में कहा कि नया चर्च डबल फाउंडेशन में काफी मजबूती से बनाया जाएगा। तीन साल में यह चर्च बनकर तैयार हुआ।

 चर्च के निर्माण में स्थानीय वास्तुकला भी पूरा ख्याल रखा गया। इस चर्च का डिजाइन एक फ्रेंच वास्तुकार डेली ने तैयार किया था। चर्च की लंबाई 175 फीट ( 53 मीटर ) है। इसके वास्तु में कोलोन केथेड्रल जर्मनी के अलावा न्यूयार्क के सेंट पैट्रिक चर्च की भी छाप है। चर्च की इमारत बाहर से इतनी सुंदर दिखाई देती है कि इसे काफी देर तक निहारने की जी चाहता है। इसके मुख्य प्रार्थना भवन में 800 लोगों के बैठने की जगह है। चर्च के अंदर ईसा मसीह के जीवन से जुड़ी कई झांकियां भी देखी जा सकती हैं। इसमें मसीह का जन्म और लास्ट सपर प्रमुख है।
( CHURCH, PHILOMENA, MYSORE, KARNATKA )



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