Monday, February 22, 2016

मिनी इंडिया है, शिलांग के बाजार

मेघालय की राजधानी शिलांग है तो शिलांग शहर की धड़कन है पुलिस बाजार। अब भला इसका नाम पुलिस बाजार क्यों पड़ा ये खोज का विषय हो सकता है। पर पुलिस बाजार शिलांग शहर का केंद्र है। कई बड़े आवासीय होटल, खाने पीने के रेस्टोरेंट, शापिंग के लिए बाजार यहां हैं। साथ ही मेघालय राज्य का सरकारी बस स्टैंड और राज्य की विधान सभा भी पुलिस बाजार में ही है। 

पुलिस बाजार के चौराहा काफी विस्तारित है। यहां से आपको कहीं भी जाने के लिए टैक्सियां मिल सकती हैं। अब पुलिस बाजार में नन्हें शापिंग मॉल भी बन गए हैं। केएफसी भी शिलांग के पुलिस बाजार में पहुंच गया है। पहाड़ी शहरों में बडे मॉल तो बनाए भी नहीं जा सकते हैं ना। किसी जमाने में यहां पुलिस मुख्यालय होने के कारण लोग इसे पुलिस बाजार कहने लगे होंगे ऐसा प्रतीत होता है। शिलांग शहर के हर कोने में रहने वाले लोग शापिंग और खाने पीने के लिए पुलिस बाजार आते हैं। पुलिस बाजार में स्ट्रीट शापिंग का भी आनंद लिया जा सकता है। फुटपाथ पर बड़ी संख्या में दुकाने हैं। आसपास की कई गलियों में भी अच्छा खासा बाजार है।

तांबुल और भोजपुरी - पुलिस बाजार में सुबह से ही फुटपाथ पर तांबूल की दुकानें सजी नजर आती हैं। तांबूल बेचने वाली ज्यादातर महिलाएं हैं। कुछ खासी हैं तो कई भोजपुरी बोलने वाली। ये भोजपुरी बोलने वाली महिलाएं पूरी तरह से शिलांग की संस्कृति में भले रच बस गई हों पर जुबान पर वही भोजपुरी है। तांबुल बेच रही हैं और आपस में पटर पटर संवाद कर रही हैं। वैसे तांबुल मेघालय की संस्कृति का खास हिस्सा है। हरा पान और कच्ची सुपारी तांबुल का खास हिस्सा है। दस रुपये का एक तांबुल बिकता है। आप मेघालय में किसी के घर जाएं तो भी वे सम्मान मे तांबुल पेश करते हैं। महिलाएं और पुरुष सभी जमकर तांबुल खातें हैं और उनके दांत धीरे धीरे सड़ने लगते हैं।


पुलिस बाजार से आगे चलते हैं अब।  सही मायने में शिलांग का सबसे बड़ा बाजार है उसका नाम ही बड़ा बाजार है। यह पूरी तरह से स्थानीय बाजार है। पुलिस बाजार से इसकी दूरी ज्यादा नहीं है। पर इस बाजार में स्थानीय दुकानें हैं और सस्ती चीजें मिलती हैं। बड़ा बाजार में हर तरह की दुकाने हैं। अनाज, चावल दाल सब्जियां से लेकर सब कुछ। बड़ा बाजार में स्थानीय खासी लोगों की दुकानें ज्यादा हैं।

कई पीढ़ी से सिख रहते हैं पंजाबी कालोनी में - 
बड़ा बाजार से लगी हुई पंजाबी बस्ती है। यहां हजारों की संख्या में पंजाबी लोग रहते हैं। यहां पर इनका गुरुद्वारा भी है। पंजाबी समुदाय के लोग यहां कई सौ साल पहले आकर बस गए थे। पंजाब के सिख लोगों की जीने की इच्छा यानी जीजिविषा प्रेरणा लेने लायक होती है। ये लोग विपरीत परिस्थितियों व्यापार करना और जीना जानते हैं। हजारों पंजाबियों के लिए शिलांग अब घर बन चुका है।

पुलिस बाजार की गलियों में घूमते हुए मुझे राणी सती मंदिर नजर आता है। इसके ये अंदाज लगाया जा सकता है कि यहां राजस्थानी लोग भी बड़ी संख्या में हैं। यहां मारवाड़ी बासा होटल की मौजूदगी भी यही बताती है। बाजार में बाबा रामदेव (राजस्थान वाले) का मंदिर भी नजर आता है। यानी यहां पर राजस्थान के बाबारामदेव के भक्त भी बड़ी संख्या में है। अगर आपको मेघालय के हस्तशिल्प की खरीददारी करनी है तो पूरबाश्री के शोरुम में पहुंच सकते हैं। चींजें थोड़ी महंगी हैं पर हाथ से बनी चीजें भला सस्ती भी कैसे हो सकती हैं।

आईआईएम शिलांग- भारतीय प्रबंधन संस्थान की शिलांग शाखा है। आपको याद होगा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम साहब का यहीं पर व्याख्यान देने के दौरान निधन हो गया था। अब देश में कुल 19 आईआईएम हो गए हैं, पर शिलांग का आईआईएम पुराना है। यह सातवें नंबर पर आता है। इसकी स्थापना 2004 में हुई। संस्थान का संचालन चीड़ के हरे भरे पेड़ों से आच्छादित मयूरभंज कांप्लेक्स में हो रहा है। यह मयूरभंज के राजघराने का निवास हुआ करता था।

नार्थ ईस्ट हिल यूनीवर्सिटी शिलांग – यह एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1973 में हुई। इसका मुख्य परिसर शिलांग में है तो दूसरा तुर्रा में। शिलांग में इसका कैंपस शहर से थोड़ा किनारे माउकिनरो में है। परिसर 1025 एकड़ में विस्तारित है। विश्वविद्यालय से संबंद्ध पूर्वोत्तर के 53 कालेज हैं।


( SHILLONG, MEGHALYA, PUNJABI BASTI, BHOJPURI, NEHU, IIM ) 

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