Saturday, January 30, 2016

वो भूटिया लड़की याद आती है...

गंगटोक शहर- रात में कुछ यूं दिखाई देता है....
एमजी रोड पर लाल पीले फूलों के बीच हरी हरी बेंच पर बैठ कर शाम को टाइम पास कर रहा हूं। तभी मेरे बगल में आकर दो लड़कियां बैठ जाती हैं। पहले आपस में बातचीत और चुहलबाजी शुरू करती हैं। फिर एक मुझसे पूछती है आप कहां से आए हैं। बातचीत शुरू होती है। पता चलता है मेरे बगल में बैठी शोख लड़की भूटिया समुदाय की है। यहां एक होटल में काम करती है। होटल रिकासा शहर से थोड़ा बाहर है। वह अपने होटल के एक टूरिस्ट परिवार को एमजी रोड पर घुमाने लाई है। नीले रंग की लंबी स्कर्ट और सुर्ख टॉप में बैठी भूटिया बाला के बाल रेशम जैसे थे। वह हिंदी बहुत अच्छी बोल रही थी। जब मैंने उसकी हिंदी की तारीफ की थी तो उसने गर्व से कहा, सबको आनी चाहिए हमारी नेशनल लैंगवेज है हिंदी।

भूटिया नाम से कुछ याद आता है। बाइचुंग भूटिया (Baichung Bhutia) और डैनी (Danny Denzongpa) दो ऐसे लोकप्रिय नाम हैं जो भूटिया समुदाय से आते हैं। बाइचुंग बड़े फुटबालर बने। बाद में तृणमूल कांग्रेस से लोकसभा चुनाव भी लड़ा हालांकि राजनीति में सफलता नहीं मिली। पर डैनी फिल्म इंडस्ट्री के सफल नाम हैं। वे कभी सिक्किम से मुंबई पहुंचे। फिल्म स्टार होने के साथ वे सफल कारोबारी भी हैं। मुझे सुबह गंगटोक की सड़क पर एक भूटिया कुली मिले। वे बताते हैं कि आजकल भूटिया समाज के कई लोग बॉक्सिंग में भी बड़ा नाम कर रहे हैं। वे एक बाक्सर को दिखाते हुए कहते हैं कि इसका एक पंच कोई बरदास्त नहीं कर सकता। दुनिया के मानचित्र पर भूटिया लोगों की कुल आबादी 70 हजार के आसपास है। भूटिया भारत, नेपाल और भूटान में फैले हैं। इनमे से बड़ी संख्या में लोग सिक्किम में रहते हैं। सिक्किम में भी वे ज्यादातर उत्तरी सिक्किम में हैं। वे यहां पर आरक्षित ट्राईब (जनजाति, बीएल) श्रेणी में आते हैं।
गंगटोक की सड़क पर मिले एक और भूटिया

भूटिया लड़की बता रही है...वह पढाई के साथ नौकरी कर रही है। पत्राचार पाठ्यक्रम में बीए में एडमिशन ले रखा है। आगे वह कुछ और भी पढ़ाई करना चाहती है। भूटिया लड़की के बगल में उसकी एक तिब्बती दोस्त भी बैठी है, जो किसी से ऊंची आवाज में फोन पर बातें कर रही है। बीच बीच में ठठाकर हंस पड़ती है।

भूटिया लड़की बता रही है उसका गांव यहां से 80 किलोमीटर दूर है। छुट्टियों में वह गांव जाती है। अभी नवंबर में अपना नया साल लूसांग त्योहार मनाकर लौटी है। इसमे खूब मस्ती होती है। बांसुरी जैसे वाद्य यंत्र की धुन पर भूटिया लड़कियां अपने पारंपरिक पहनावे में जमकर नाचती हैं। यह त्योहार तिब्बती कैलेंडर में दसवें महीने में आता है। त्योहार 15 दिनों तक मनाया जाता है। वह बता रही है गांव में कुछ नहीं बदला। परंपराएं पुरानी है। शादी के नाम पर कहती है, भूटिया लड़कियां कई बार बाहर के समुदाय में शादी कर लेती हैं। पर गांव में इसकी इजाजत नहीं है। गांव के लोग कठोर होते हैं। वे भूटिया समाज की लड़कियां बाहर शादी करें तो जल्दी स्वीकार नहीं करते। हालांकि महिलाओं की भूटिया समाज में खूब सुनी जाती है। वे पुरुषों से बराबरी करती हैं। पर सोना पहनने का उन्हें खूब शौक है। वह 24 कैरेट गोल्ड हो तो अच्छा। वह बता रही है। फरवरी में उसका गांव में लोसार का त्योहार होगा, तब फिर वह गांव जाएगी। उसकी इच्छा तो सरकारी नौकरी में जाने की है। पर भूटिया समाज को बीएल में आरक्षण के बावजूद सरकारी नौकरी आसान नहीं है।
गंगटोक के एमजी रोड पर ...यूं ही अकेले...

मुझे याद आता है भूटिया समाज का समृद्ध इतिहास। कभी सिक्किम में जब राजतंत्र था तब यहां भूटिया समुदाय के नामग्याल वंश के राजाओं का ही शासन था। ज्यादातर भूटिया बौद्ध मत को मानने वाले होते हैं, इसलिए भूटिया समाज में काफी शाकाहारी भी हैं। भूटिया लोग बौद्ध में वज्रयान संप्रदाय को मानने वाले हैं। भूटिया लड़की बताती है वह भी शाकाहारी है।

बातों बातों में कितना वक्त गुजर गया पता नहीं चला। अच्छा तो अब मैं चलती हूं। हमारा टूरिस्ट इंतजार कर रहा होगा। पर आगे बढ़ने के बाद वह पीछे मुड़कर देखती है.. मुझे बाय..बाय कहने के साथ ही नए साल की ढेर सारी शुभकामनाएं देती है...आज 30 दिसबंर है...नया साल एक दिन बाद ही तो आने वाला है। मैं उसकी शुभकामनाएं स्वीकार करता हूं। पर दिल में उस शोख भूटिया लड़की की स्मृतियां बसी रह जाती हैं....
- vidyutp@gmail.com  
( SIKKIM, GAMGTOK, BHUTIA GIRL ) 

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