Thursday, October 29, 2015

गणपति का अदभुत मंदिर - पुडुचेरी का मनाकुला विनायगर मंदिर

गणपति का अति प्रचीन मंदिर है पुडुचेरी का मनाकुल विनायगर मंदिर। इस मंदिर को लेकर न सिर्फ पुडुचेरी में बल्कि देश भर के लोगों की श्रद्धा है। इस मंदिर का इतिहास पुडुचेरी में फ्रेंच लोगों के आने के साल 1666 से भी पहले का है। शास्त्रों में गणेश के कुल 16 रूपों की चर्चा की गई है। इनमें पुडुचेरी के गणपति जिनका मुख सागर की तरफ है उन्हें भुवनेश्वर गणपति कहा गया है। इन्हें अब मनाकुल कहा जाता है। तमिल में मनल का मतलब बालू और कुलन का मतलब सरोवर से है। किसी जमाने में यहां गणेश मूर्ति के आसपास बालू ही बालू था। इसलिए लोग इन्हें मनकुला विनयागर पुकारने लगे।

पुडुचेरी में फ्रांसिसी शासन आने के बाद फ्रेंच लोगों ने कई बार इस मंदिर पर हमले की कोशिश की पर वे इसमें सफल नहीं हो सके। कहा जाता है कि फ्रेंच लोगों ने कई बार गणपति प्रतिमा को समंदर में डूबो दिया पर हर बार प्रतिमा अपने स्थान पर वापस आ जाती थी। कई बार इस मंदिर के पूजा में व्यावधान डालने की कोशिश की गई। खास तौर पर शुक्रवार को होने वाली विशेष पूजा रोकी गई।  




मंदिर तकरीबन 8000 वर्ग फीट इलाके में बना है। मंदिर की आंतरिक सज्जा स्वर्ण जड़ित है। मंदिर का गर्भ गृह अत्यंत सुंदर प्रतीत होता है। रात की रोशनी में मंदिर को देखने का आनंद कई गुना बढ़ जाता है। मंदिर के अंदर मुख्य गणेश प्रतिमा के अलावा 58 तरह की गणेश मूर्तियां स्थापित की गई हैं। मंदिर के आंतरिक दीवारों पर प्रसिद्ध चित्रकारों ने गणेश जी के जीवन से जुड़े दृश्य उकेरे हैं। इनमें गणेश जी का जन्म, सुद्धि, बुद्धि से उनका विवाह आदि के दृश्य हैं।

मंदिर में गणेश जी का 10 फीट ऊंचा भव्य रथ है। इसके निर्माण में साढ़े सात किलोग्राम सोना का इस्तेमाल हुआ है। हर साल विजयादशी के दिन गणेश जी इस रथ पर सवार होकर विहार करते हैं। अरविंदो आश्रम की मां ( मदर मीरा) की विनायक मंदिर अटूट आस्था थी। अगस्त सितंबर महीने में हर साल मनाया जाने वाला ब्रह्मोत्सव मंदिर का मुख्य त्योहार है जो 24 दिनों तक चलता है।

जो दे पैसा उसको गजराज देंगे आशीर्वाद-  मंदिर के बाहर प्रवेश द्वार पर आपको एक हाथी खड़ा मिलेगा। अगर आपके सूंड में कोई सिक्का डालेंगे तो वह आपके सिर पर आशीर्वाद की वर्षा करेगा। साथ ही अपने सूंड प्राप्त सिक्के को बगल में बैठे अपने महावत को दे देता है। 




कैसे पहुंचे – पुडुचेरी के नए बस स्टैंड से मंदिर की दूरी 4 किलोमीटर के करीब है। मंदिर बंगाल की खाड़ी सागर तट से 400 मीटर की दूरी पर है। शहर के एनसी बोस रोड और जवाहरलाल नेहरू स्ट्रीट मिलाप स्थल के पास मंदिर स्थित है। अरविंदो आश्रम भी मंदिर के बिल्कुल पास है। शहर के हर कोने से शेयरिंग आटो और स्थानीय बसें मंदिर के लिए उपलब्ध हैं।

खुलने का समय मंदिर सुबह 5.45 बजे खुलता है और दोपहर 12.30 बजे बंद हो जाता है। शाम को फिर 4 बजे दर्शन के लिए खुलता है और रात्रि 9.30 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में समान्य दर्शन की कोई फीस नहीं है। पर अर्चना टिकट 2 रुपये है जबकि स्पेशल दर्शन 20 रुपये का है। मंदिर में तीन बार प्रतिदिन अन्नदानम प्रसाद वितरित किया जाता है। मंदिर में दर्शन के लिए देश की जानी मानी हस्तियां समय समय पर पधार चुकी हैं।


http://www.manakulavinayagartemple.com/
- vidyutp@gmail.com
( PUDUCHERRY, GANESH TEMPLE, VINYAK )


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