Tuesday, October 27, 2015

क्यों 16 अगस्त है पुडुचेरी का स्वतंत्रता दिवस

भारत देश को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली, पर देश कई हिस्से हैं जो बाद में भारतीय गणराज्य का अंग बने। इसमें पुडुचेरी, गोवा, दादरा नगर हवेली, सिक्किम खास तौर पर शामिल हैं। बाद पुडचेरी की करें तो यह कई सौ सालों से फ्रांसिसी उपनिवेश हुआ करता था। तमिलनाडु से लगा हुआ छोटा सा खूबसूरत समुद्रतटीय राज्य औपचारिक रुप से 16 अगस्त 1962 को भारतीय गणराज्य का हिस्सा बना। इसलिए पुडुचेरी अपना स्वतंत्रता दिवस 16 अगस्त को मनाता है।
स्वतंत्रता के बाद  प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु फ्रेंच उपनिवेश वाले हिस्सों को भारत में मिलाने की कोशिश में लगे थे। इसी सिलसिले में पुडुचेरी को भारतीय गणराज्य में शामिल करने की कोशिश 1948 में आरंभ हो गई थी। जून 1948 में फ्रांस के साथ भारत का एक समझौता हुआ जिसमें पुडुचेरी के लोग कहां रहना चाहते हैं इसके लिए एक जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव रखा गया। बाद में वी सुब्बैया के नेतृत्व में पुडुचेरी में एक स्वतंत्रता आंदोलन शुरू हुआ। सुब्बैया पहले फ्रांस समर्थक थे लेकिन बाद में उन्होंने भारत में मिलने की इच्छा जताई।

पुडुचेरी की ज्यादातर आबादी भारत में मिलने की इच्छा रखती थी। 1954 में काफी लोगों ने आवाज उठाई और बिना किसी जनमत संग्रह के ही भारत में मिलने का प्रस्ताव रखा। एक नवंबर 1954 को एक जनमत संग्रह कराया गया जिसमें पुडुचेरी, कराईकल, माहे और येनम के कुल 181 पार्षदों में से 174 ने अपना मत भारत में शामिल होने के पक्ष में दिया। सात पार्षदों ने इस रायशुमारी में हिस्सा नहीं लिया था। व्यवहारिक रुप से इस तारीख से ही पुडुचेरी भारतीय गणराज्य का हिस्सा बन गया। मई 1956 में भारत और फ्रांस के बीच पुडुचेरी को लेकर एक समझौता हुआ। पर फ्रांस की संसद में मई 1962 में पुडुचेरी की सत्ता भारत को औपचारिक रुप से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पास किया गया। 16 अगस्त 1962 भारत और फ्रांस के बीच पुडुचेरी का औपचारिक सत्ता हस्तांतरण कार्य संपन्न हुआ। इसलिए हर साल पुडुचेरी में 16 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का सरकारी तौर पर औपचारिक आयोजन किया जाता है।

ऋषि अगस्त्य की भूमि है पुडुचेरी 
तमिलनाडु के पास नन्हा सा राज्य पुडुचेरी या पांडिचेरी महान ऋषि अगस्त्य की भूमि मानी जाती है। वही अगस्त्य मुनि जो समुद्र को पी गए थे। जिन्होंने संसार की श्रेष्ठ भाषा तमिल का आविष्कार किया। हालांकि पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश है पर यहां विधान सभा चुनाव कराए जाते हैं दिल्ली की तरह। पुडुचेरी का विस्तार कुल 479 वर्ग किलोमीटर में है। साल 2011 की जनगणना में पुडुचेरी की आबादी 12.48 लाख थी।


चार क्षेत्र में बंटा -  पुडुचेरी का संघ राज्‍य क्षेत्र चार क्षेत्रों - पुडुचेरीकराईकालमाहे और यनम से मिलकर बना है। पुडुचेरी और कराईकाल तमिलनाडु के पूर्वी तट पर हैं जबकि यनम आंध्र प्रदेश ( ईस्ट गोदावरी जिला) और माहे केरल में पश्चिम तट पर कोचीन के पास है। पुडुचेरी 1 नवंबर 1954 को आजाद हुआ, यानी देश की आजादी के सात साल बाद। तकनीकी तौर पर सत्ता का हस्तांतरण 16 अगस्त 1962 को हुआ। इसी दिन पुडुचेरी का स्वतंत्रता दिवस होता है। पुडुचेरी में आज भी बड़ी संख्या में तमिल हैं जिनके पास फ्रेंच पासपोर्ट होता है। 

पुडुचेरी की आध्यात्मिक शक्ति तब बढ़ी जब यहां अरविदों आश्रम की स्थापना हुई। हर साल दुनिया भर से हजारों लोग सुकून की तलाश में यहां आते हैं। पुडुचेरी आकर लोगों को अनोखी आध्‍यात्मिक अनुभूति होती है। यहां के निवासियों की कहानियां शुरुआती दिनों के इतिहास बताती हैं। यहां पोंडी नाम का अर्थ यहां के अपनेपन की भावना को समाहित करता है जो घर आने जैसा है।


PUDUCHERY - RAILWAY STATION

बड़े शहर की भागदौड़ से दूर पुडुचेरी दक्षिणी तट पर एक छोटा शांत कस्‍बा है। यहां के फ्रांसीसी संबंधपेड़ों की कतार से भरे हुए किनारेउपनिवेश काल कि विरासत कहे जाने वाले भवनआध्‍यात्मिक पवित्रताअछूते सुंदर तटों के अं‍तहीन किनारेबैक वॉटरकई प्रकार के स्वाद परोसने वाले रेस्‍तरांयहां आने वाले सैलानियों का मन मोह लेते हैं।  यह आपके लिए एक आदर्श स्‍थान है यदि आप अपने व्यस्त जीवन से अलग हटकर आनंद के कुछ पल गुजारना चाहते हैं। 

फ्रेंच आधिकारिक भाषा -  तमिलतेलुगुमलयालम और फ्रेंच यहां की आधिकारिक भाषाएं है। यहां की मुख्‍य भाषा तमिलतेलुगु और मलयालम हैं। अंग्रेजी और फ्रेंच अन्‍य भाषाएं हैं जो काफी संख्‍या में लोग बोलते हैं। यहां अधिकांश लोग हिन्‍दू हैं। यहां ईसाई और मुस्लिम समुदाय की अच्‍छी संख्‍या हैजबकि जैनसिक्‍ख और बौद्ध लोग भी थोड़ी संख्या में हैं।




भारत का यह क्षेत्र लगभग 300 वर्षों तक फ्रांसीसी अधिकार में रहा है और आज भी यहां फ्रांसीसी वास्तुशिल्प और संस्कृति देखने को मिल जाती है। पुडुचेरी 1670 से 1954 तक एक प्रमुख फ्रांसीसी उपनिवेश था। फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी में लगभग तीन शताब्दियों तक निर्बाध शासन किया और शहर में सबसे अच्छी संस्कृति और वास्तुकला के रूप में एक महान विरासत छोड़ गए। पुडुचेरी एक फ्रांसीसी उपनिवेश था जिसमे 4 जिलों का समावेश था। पुदुच्चेरी का नाम पॉन्डिचरी इसके सबसे बड़े जिले पुदुच्चेरी के नाम पर पड़ा था। 

सितम्बर 2006 मे पॉन्डिचरी का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर पुदुच्चेरी कर दिया गया जिसका कि स्थानीय तमिल मे अर्थ नया गांव होता है।

पुराने समय में यह फ्रांस के साथ होने वाले व्यापार का मुख्य केंद्र था। आज अनेक पर्यटक इसके सुंदर समुद्र तटों और तत्कालीन सभ्यता की झलक पाने के लिए यहां आते हैं। केवल पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। इस कारण प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।

कैसे पहुंचे - पुडुचेरी शहर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 162 किलोमीटर की दूरी पर है। चेन्नई से बस से पुडुचेरी जा सकते हैं। वैसे सीधी रेलगाड़ी भी यहां आती हैं जो तिरूपति वेल्लोर, विलुपुरम होकर यहां तक पहुंचती हैं। सिंगल लाइन विद्युतीकृत रेल ट्रैक है पुडुचेरी तक। दिल्ली से पुडुचेरी के लिए सीधी ट्रेन भी उपलब्ध है।



 होटल श्री साईराम, लाल बहादुर शास्त्री स्ट्रीट, बॉटनिकल गार्डन के पास -  हमारा पहले दिन का पुडुचेरी में ठिकाना बना होटल श्री साईराम। बस स्टैंड से 400 मीटर की दूरी पर है होटल। कमरे काफी बड़े और हवादार। बुकिंग क्लियर ट्रिप से कराई थी। स्टाफ का व्यवहार अति सौम्य रहा। हमने एक दिन बार की बुकिंग दूसरे होटल में करा ली थी वरना ये रहने के लिए अच्छी जगह थी। http://www.cleartrip.com/hotels/details/377741?c=051115|061115&r=2,0&compId=&fr=32&ur=7&urt=Price#



होटल सुबुया इन, लाल बहादुर शास्त्री स्ट्रीट ( http://www.hotelsubuya.com/ ) हमारा दूसरा दिन होटल सुबुया में गुजरा। ये होटल लाल बहादुर शास्त्री स्ट्रीट पर महात्मा गांधी स्ट्रीट  क्रास से ठीक पहले है। यहां से रेलवे स्टेशन आधा किलोमीटर है। होटल में बेहतर रेस्टोरेंट है। रूम रेंट में सुबह का नास्ता शामिल रहता है। फ्री वाईफाई भी है। सभी कमरे वातानुकूलित हैं। पर कमरे आकार में छोटे हैं। होटल में पार्किंग मीटिंग हाल आदि भी सुविधा है।


-         vidyutp@gmail.com

-          ( AGASTYA MUNI , PUDUCHERRY, CHENNAI ) 



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