Sunday, July 12, 2015

सालासर बालाजी- यहां स्वयं प्रकट हुए थे हनुमान जी

सालासर के बालाजी भगवान यानी हनुमान जी देश भर के बजरंगबली के भक्तों में काफी लोकप्रिय हैं। कहा जाता है कि यहां स्वयं हनुमान जी प्रकट हुए थे। सालासर बालाजी का मंदिर राजस्थान के चूरु (CHURU) जिले में स्थित है। वर्ष भर में लाखों भारतीय भक्त दर्शन के लिए सालासर धाम जाते हैं। सालासर बालाजी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर के आसपास भक्तों के आवास के लिए 180 से ज्यादा धर्मशालाएं, सेवा सदन और होटल बने हैं।

सालासर में बाला जी का मंदिर का परिसर अति विशाल है। मंदिर में बालाजी की प्रतिमा पूर्व मुखी है। मंदिर में प्रवेश के लिए तीन द्वार बने हैं। मुख्य द्वार से प्रवेश के बाद आपको लंबी लाइन में लगकर बाला जी के दर्शन प्राप्त होते हैं। मंदिर में मंगलवार और शनिवार को ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कहा जाता है कि यहां स्थापित होने की इच्छा स्वयं बजरंगबली ने प्रकट की थी। तब करीब ढाई सौ साल पहले बालाजी के परम भक्त बाबा मोहनदास ने यहां बालाजी की स्थापना की।

बालाजी की कथा - शक्ति पीठ का इतिहास सन् 1754 ई. में नागौर के असोटा निवासी साखा जाट को घिटोला के खेत में हल जोतते समय एक मूर्ति मिली। रात को स्वप्न में श्री हनुमान ने प्रकट होकर मूर्ति को सालासर पहुंचाने का आदेश दिया। उसी रात सालासर में भक्त मोहनदास जी को भी हनुमान जी ने दर्शन देकर कहा कि असोटा ठाकुर द्वारा भेजी गई काले पत्थर की मूर्ति को धोरे (टीले) पर ठाकुर सालमसिंह की उपस्थिति में स्थापित कर देना। धोरे पर जहां बैल चलते-चलते रुक जाएंवहीं श्री बालाजी की प्रतिमा स्थापित करना। वह बैलगाड़ी (रेड़ा) आज भी सालासर धाम में दक्षिण पोल पर दर्शनार्थ रखी हुई है। 
हर पूर्णिमा के दिन सालासर में मेला लगता है। श्रद्धालुओं की भीड़  बढ़ जाती है। इसके अलावा हर वर्ष चैत्र पूर्णिमा और अश्विन पूर्णिमा पर बड़े मेले लगते हैं जो कई दिनों तक चलते हैं। इन मेलों के समय 6 लाख से ज्यादा लोग सालासर पहुंच जाते हैं। मेला और मंदिर का प्रबंधन हनुमान सेवा समिति देखती है।

खुलने के समय---  मंदिर सुबह 5 बजे प्रातः आरती के साथ खुलता है। शाम को 8 बजे संध्या आरती और रात 11 बजे शयन आरती होती है। दिन भर मंदिर में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते रहते हैं।

मोहनदास की धुनी- मंदिर के आग्नेय क्षेत्र में बाबा मोहनदास की धूनी है। कई साल से यहां अखंड धूनी जल रही है। श्रद्धालु इस अखंड धूनी से राख लेकर जाते हैं। इसके बाद आता है बाबा मोहनदास की समाधि। आमतौर पर श्रद्धालु बाबा मोहनदास के भक्त की समाधि के दर्शन करके ही भक्त बालाजी के दर्शनों के लिए आगे बढ़ते हैं।

मोहन मंदिर - मोहन मंदिर, बालाजी मंदिर के पास स्थित है। यहां मोहनदास जी के पैरों के निशान यहां आज भी मौजूद हैं। इस स्थान को इन दोनों पवित्र भक्तों का समाधि स्थल माना जाता है। पिछले आठ सालों से यहां निरंतर रामायण का पाठ किया जा रहा है। 



अंजनी माता मंदिर   बालाजी मंदिर के दो किलोमीटर पूरब तरफ चलने पर अंजनी माता का मंदिर है। इस मंदिर का श्रंगार अति सुंदर है। अंजनी माता भगवान हनुमान या बालाजी की मां थी। अंजनी माता का मन्दिर सालासर धाम से लक्षमणगढ जाने वाली सड़क पर स्थित है। यह मंदिर ग्राम जुलियासर में पड़ता है।

कैसे पहुंचे -  दिल्ली से जोधपुर जाने वाली ट्रेन से सुजानगढ़ उतरें। यहां से 25 किलोमीटर है सालासर। अगर बीकानेर जाने वाली ट्रेन हो तो रतनगढ़ उतरें। रतनगढ़ से सालासर 55 किलोमीटर है। दिल्ली से सीकर जाने वाली ब्राडगेज लाइन के ट्रेन से जा रहे हैं मुंकुदगढ़ स्टेशन उतरें। यहां से सालासर लक्ष्मणगढ़ होते हुए 61 किलोमीटर दूर है। 
अगर जयपुर से आ रहे हैं तो मीटरगेज लाइन पर लक्ष्मणगढ़ उतरें। यहां से सालासर 30 किलोमीटर है। इन सभी शहरों से बस सेवा उपलब्ध है। दिल्ली से सीधे बस से जा सकते हैं। बस रेवाड़ी, नारनौल, सिंघाना, चिड़ावा, मुकंदगढ़ होते हुए जाती है। चुरु और सीकर और जयपुर शहर से भी सालासर के लिए सीधी बसें मिल जाती हैं। जिला मुख्यालय चुरु से सालासार की दूरी 83 किलोमीटर है।

सालासर में मुरलीधर मानसिंह धर्मशाला
कहां ठहरें –  सालासर में 180 से ज्यादा होटल, धर्मशाला और सेवा सदन हैं। ये सेवा सदन सितारा होटलों की तरह भव्य बने हैं। यहां 500 रुपये में डबलबेड एसी रुम मिल जाता है। मंदिर के पास मुरलीधर मानसिंह धर्मशाला में 100, 200 के अटैच टायलेट वाले कमरे उपलब्ध हैं। यहां 600 रुपये में एसी कमरा है जिसकी एडवांस बुकिंग भी कराई जा सकती है। ( फोन नंबर – 01568-252953 और 01568 252067) सालासर में कई सेवा सदन में भोजनालय भी हैं। जींद सेवा सदन, गंगा नगर बाबा मोहनदास में शाकाहारी भोजनालय हैं। गंगानगर में 50 रुपये में अनलिमिटेड थाली मिलती है। हनुमत धाम में 70 रुपये की थाली है। यहां 24 घंटे भोजन मिलता है।
vidyutp@gmail.com

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