Monday, June 22, 2015

जनकपुर की शाम...राम राम राजा राम राम...

राष्ट्रीय युवा योजना के सीतामढ़ी शिविर के दौरान 12 जून को जनकपुर जाने का कार्यक्रम तय हुआ। दोपहर में देश भर से आए 200 से ज्यादा शिविरार्थियों के लिए तीन बसों के इतंजाम किया गया जनकपुर जाने के लिए। विश्व बंधुत्व के नारे के साथ 20 राज्यों के लोग जनकपुर की ओर चले। भिट्ठामोड बार्डर पर बसों को नेपाल में प्रवेश करने की औपचारिकता पूरी करने के लिए एक घंटे रुकना पड़ा। नेपाल में भारतीय वाहन जा सकते हैं पर इसके लिए एंट्री पास लेना पड़ता है। हमलोग राजा जनक के शहर जनकपुर धाम में प्रवेश कर चुके थे। जीरो माइल पर पहुंचने के बाद पता चला कि रामानंद चौक के पास पार्किंग में बसें खड़ी होंगी। इस पार्किंग से माता जानकी का मंदिर तीन मिनट के रास्ते पर है।
जानकी मंदिर का प्रांगण काफी सुंदर है। 

यहां हजारों लोगों के बैठने की जगह है। तय हुआ की शाम की प्रार्थना यहीं पर होगी। इससे पहले देश भर से आए युवाओँ के पास एक घंटे का वक्त था जानकी मंदिर में दर्शन करने के लिए। दक्षिण भारत से आए हुए भाई बहनों के लिए जनकपुर पहुंचना एक बड़ा मौका था। वे मंदिर को देखकर अभिभूत थे। राम, जानकी के दर्शन के साथ मंदिर में खूबसूरत प्रदर्शनी का भी लोगों ने नजारा किया। तमाम लोगों ने मंदिर के आसपास खरीददारी भी की। हालांकि अब नेपाल से शापिंग करने का कोई आकर्षण नहीं रह गया है। बाजार में 90 फीसदी भारत में बनी वस्तुएं ही बिकती हैं।

शाम छह बजे मंदिर के प्रांगण में हमारी सभा शुरू हुई। 88 वर्ष के सुब्बराव जी ने सबसे पहले भजन गाना शुरू किया। रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीताराम...राम राम राजा राम राम...जनकपुर के मंदिर में रामधुन हमेशा बजती है। पर ये रामधुन कुछ अलग थी। सुब्बराव जी आवाज के साथ सुर मिला रहे थे देश भर के नौजवान। मंदिर के बाहर अदभुत माहौल बन गया। धीरे धीरे जनकपुर शहर के सैकड़ो लोग जुटने लगे। स्थानीय लोग भी हमारे साथ बैठकर भजन गाने लगे। मंच के पास नरेंद्र भाई चरखा पर सूत कात रहे थे। कुछ लोग झाल बजा रहे थे..कुछ तालियों पर साथ दे रहे थे।

उसके बाद सुब्बराव जी ने भजन गाना शुरू किया- हर देश में तू हर वेश में तू...तेरे नाम अनेक तू एक ही है....इस भजन के साथ सुर मिला रहे थे....हजारों लोग...तुकडो जी महाराज के इस भजन में अदभुत शक्ति है। ऐसे माहौल का निर्माण करता है जो हम सबको एक आध्यात्मिक दुनिया में ले जाता है। इसके बाद देश के अलग अलग राज्यों के लोगों ने अपना अपना परिचय अपने नारों के साथ दिया। अंत में भारत माता की जय और नेपाल माता की जय के नारे लगाए। नेपाल के लोग ये सब देखकर अभिभूत थे।

कार्यक्रम खत्म होने के बाद मेरी कुछ स्थानीय दुकानदारों से बात हुई। वे कार्यक्रम से काफी प्रसन्न थे। वे सुब्बराव जैसे महान संत के बारे में जानना चाहते थे। कार्यक्रम के बाद अजय पांडे ( लखनऊ) ने लोगों को सुब्बाराव के जीवन के बारे में बताया। ये जनकपुर की एक यादगार शाम थी। स्थानीय लोगों के लिए भी और देश भर से आए नौजवानों के लिए भी। सब अपनी यादों को सहेज लेना चाहते थे।


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